BBC navigation

कब्र के लुटेरे...

 शनिवार, 12 मई, 2012 को 05:11 IST तक के समाचार

खोदी गई कब्र को ठीक करते हुए कुछ कार्यकर्ता

रूस में द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गए सैनिकों की कब्रें मुनाफे के लिए अवैध तरीके से खोदी जा रही है.

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1941 में नाजी जर्मनी ने रूस पर हमला बोल दिया था जिसमें दोनों तरफ के लाखों सैनिक मारे गए थे जिनकी कब्रें रूस में है.

द्वितीय विश्व युद्ध में सबसे कड़ी लड़ाई रूस के जमीन पर हुई थी. युद्ध के बाद कई बार रणभूमि को वैसे ही छोड़ दिया जाता था क्योकि उसे साफ करने के लिए न तो वक्त था और न ही जरूरी संसाधन मौजूद थे.

कुछ गैर सरकारी संस्थानें भी स्थानीय अधिकारियों से परमिट लेकर इन कब्रों की खुदाई कर रहे हैं ताकि सैनिकों की पहचान की जा सके. इस तरह से काम कर रहे लोग स्वैच्छिक होते हैं और उन्हें कोई वेतन नहीं दिया जाता था.

लेकिन काले बाजार में मुनाफे के लिए कब्र की खुदाई में भी कई लोग लगे हुए हैं.

ब्लैक और व्हाइट

सैनिकों की पहचान या श्रद्धांजलि देने के लिए कब्र खोदने वालों को 'व्हाइट डिगर' कहा जाता है जबकि मुनाफे के लिए अवैध रूप से कब्र खोदने वालों को 'ब्लैक डिगर' कहा जाता है.

बीबीसी रूसी डॉट कॉम की संवाददाता ओल्गा इव्शीना ने रूस के जंगलों में इन लोगों के साथ कुछ दिन बिताए और उनके बारे में जानने की कोशिश की.

"ये लोग खूनी हैं. जिन लोगों ने हमारे लिए जानें दी, कोई उनके साथ ऐसा बर्ताव कैसे कर सकता है"

अनातोली स्कोरयुकोव, व्हाइट डिगर

ऐसे ही एक कब्र खोदने वाले व्यक्ति एलेक्स 15 साल की उम्र से ही 'लोहे' की तलाश में 'डिगर' यानी खनक बन गए.

एलेक्स कहते हैं, "सभी स्थानीय लोग ऐसा करते है, कुछ शौक से तो कुछ फायदे के लिए."

लेकिन इस तरह के फायदे के लिए सैनिकों की हड्डियों में तलाशना कई लोगों को बहुत अखर रहा है.

ब्लैक डिगर मैदानों में सैनिकों की कब्रें ढूंढते हैं और कभी कभी तो सैन्य कब्रगाहों को भी खोद डालते हैं. जंगलों में विश्व युद्ध के समय के काफी हथियार, गोला-बारूद और टूटे फूटे साजोसामान जमीन के अंदर दफन है.

एक व्हाइट डिगर अनातोली स्कोरयुकोव एक खोदी गई कब्र को दिखाते हुए कहते हैं, "ये देखिए किस तरह उन्होंने यहां की कब्र खोदी और सैनिक के अवशेष ऐसे ही बाहर फेंकी रहने दी. ये लोग खूनी हैं. जिन लोगों ने हमारे लिए जानें दी, कोई उनके साथ ऐसा बर्ताव कैसे कर सकता है?"

नाजी साजो-सामान कीमती

कब्रों से विश्व युद्ध के समय के हथियार चुराए जाते हैं

कब्र से खोदी गई चीजें संग्रहकर्ताओं और नव-नाजी आंदोलनों के अनुगामियों को बेची जाती है. इन चीजों के लिए रूस, यूक्रेन और पूर्वी यूरोप के कुछ देशों में बड़ा बाजार है. कई वेबसाइट भी इन्हें बेचती हैं.

लेकिन रूसी साजो-सामान के मुकाबले नाजी वस्तुओं की ज्यादा मांग है.

एक रूसी हेलमेट की कीमत 25 डॉलर हो सकती है जबकि नाजी हथियारों के दाम दस गुणा ज्यादा हो सकते हैं.

जर्मनी के सैन्य मेडल जैसे लोहे का क्रॉस 600 डॉलर तक में बिक सकता है.

अवैध खनक अकसर कब्र से जवाहरात चुराने की फिराक में रहते हैं. शादी की अंगूठियां और क्रॉस को निकालने में वो जरा भी नहीं घबराते.

इसके अलावा पूरानी बंदूकें भी खूब बिकती हैं.

लेकिन इस तरह अवैध रूप से कब्रों को खोदना या हथियारों को बेचने पर रूस में आठ साल की सजा हो सकती है. लेकिन इसके बावजूद इस तरह की घटनाओं के लिए सिर्फ जुर्माना लगाना भी कम ही होता है.

एलेक्स कहते हैं, "अगर ये चीजें इस तरह जंगलों में दबे पड़े हैं इसका मतलब की सिर्फ हम इसके लिए रूचि रख रहे हैं. अगर सरकार को दिलचस्पी होती तो वो इन्हें कब का यहां से हटा देती."

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.