यूरोप में हो रहे हैं दो अहम चुनाव

 रविवार, 6 मई, 2012 को 12:10 IST तक के समाचार
सार्कोजी और ओलांड

कहा जा रहा है कि फ्रांस के नतीजे यूरोप में नए समीकरण बनाएँगे

आर्थिक संकट झेल रहे यूरोप में रविवार को दो अहम चुनाव होने जा रहे हैं.

एक चुनाव ग्रीस में होने जा रहा है, जहाँ से आर्थिक संकट की शुरुआत हुई थी और दूसरा फ़्रांस में जिसने इस संकट का हल निकालने की कोशिशों में अहम भूमिका निभाई है.

ग्रीस में संसदीय चुनाव हो रहे हैं जबकि फ्रांस में नए राष्ट्रपति चुनने के लिए मतदान हो रहे हैं.

ग्रीस में इन चुनावों को अंतरराष्ट्रीय सहायता के बदले पीड़ादायक सरकारी कटौती पर जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा है.

वहीं फ्रांस में आर्थिक संकट से उबरने के लिए आर्थिक पैकेज जुटाने में अहम भूमिका निभाने वाले निकोला सार्कोजी को सोशलिस्ट फ्रांस्वा ओलांड का सामना करना पड़ रहा है जो कह रहे हैं कि अगर वे जीते तो इस समझौते पर पुनर्विचार करेंगे.

वैसे चुनाव सर्बिया में भी हो रहे हैं जहाँ संसद और राष्ट्रपति पद दोनों के लिए मतदान हो रहा है.

फ़्रांस में सार्कोजी को कड़ी चुनौती

वर्ष 2007 से फ्रांस के राष्ट्रपति का पद संभाल रहे सार्कोजी इन चुनावों में एक कड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं.

फ्रांस

फ्रांस में सामाजिक सुरक्षा भी एक मुद्दा है

पेरिस में वरिष्ठ पत्रकार वैजू नारावने कहती हैं कि पिछले एक साल में जितने भी सर्वेक्षण हुए हैं, सबमें सार्कोजी के प्रतिद्वंद्वी फ्रांस्वा ओलांड को काफ़ी आगे दिखाया गया है.

उनका कहना है कि लोग ये मानकर चल रहे हैं कि ओलांड को ही जीतना है, बस मुद्दा ये है कि उनकी जीत बड़ी होगी या छोटी.

सार्कोजी की पार्टी का नाम है यूएमपी (यूनियन फ़ॉर ए पॉपुलर मूवमेंट). उनका कहना है कि इस समय फ्रांस को एक ऐसे नेता की ज़रूरत है जो कड़े फैसले ले सके और इन अनिश्चितता वाले समय में फ्रांस की रक्षा कर सके.

वैसे सार्कोजी की छवि कठोर निर्णय लेने वाले नेता की है जो बहुत काम करते हैं मगर आर्थिक संकट के कारण सारकोजी की लोकप्रियता को काफी धक्का लगा है. उनकी शाहखर्ची और जीने के अंदाज़ ने भी परंपरावादियों की त्यौरियाँ चढ़ा रखी हैं.

दूसरी ओर ओलांड सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी हैं. वे सारकोज़ी की आर्थिक नीतियों की सख्त आलोचना करते हैं.

ओलांड एक मिलनसार, उदारवादी और शांत नेता हैं जिन्हें कई लोग सुस्त भी बताते हैं.

वे एक अनुभवी राजनेता हैं जिन्होंने आजतक किसी भी सरकारी पद पर काम नहीं किया है.

फ़्रांस में चुनावी मुद्दे आर्थिक संकट और देश के विकास की दर है जो पिछले कुछ समय से शून्य के लगभग ही है. दूसरी ओर देश से उद्योग मोरक्को, ट्यूनिशिया, भारत और ब्राजील जैसे देशों की ओर जो रहे हैं जहाँ मजदूरी की दर सस्ती है.

ग्रीस का संकट

ग्रीस में रविवार को संसद के चुनाव हो रहे हैं.

इसमें देश की दो प्रमुख पार्टियों मध्य-वाम पार्टी पैसॉक और मध्य-दक्षिण न्यू डेमोक्रेसी पार्टी के बीच मुकाबला है.

ग्रीस

ग्रीस में आर्थिक संकट और सरकारी कटौती अहम मुद्दा है

ये दोनों पार्टियाँ गठबंधन में सरकार चलाती रही हैं.

चुनाव का मुद्दा है आर्थिक संकट से निपटने के लिए सरकार की ओर से लागू खर्चों में कटौती का फैसला.

चूंकि दोनों पार्टियाँ सरकार में रह चुकी हैं इसलिए दोनों को इस मुद्दे पर नुकसान हो सकता है.

आसार है कि इसकी वजह से किसी भी दल को बहुमत मिलेगा.

आगे आने वाले दिनों में भी सरकारी कटौती जारी रखना होगा क्योंकि इसी के आधार पर यूरोपीय यूनियन से आर्थिक सहायता मिलती रहेगी.

ग्रीस को मिलने वाली 11 अरब की सहायता जून में मिलने वाली है. अगर सरकारी कटौती की योजना से भटकती है तो ये सहायता टल जाएगी और नतीजा सरकार को भुगतना होगा.

सर्बिया में चुनाव

सर्बिया में संसद और राष्ट्रपति के लिए चुनाव हो रहे हैं.

राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के मौजूदा राष्ट्रपति बोरिस टैडिक का मुकाबला सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी के तोमिस्लाव निकोलिक से है.

इन चुनाव में बेरोज़गारी बडा़ मुद्दा है क्योंकि सर्बिया की एक चौथाई आबादी अब बेरोजगार है.

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