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अमरीका के मूल निवासी भेदभाव का शिकार

 शनिवार, 5 मई, 2012 को 11:21 IST तक के समाचार
अमरीका के मूल निवासी

अमरीका के मूल निवासी लंबे समय से अपनी जमीनें वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं

संयुक्त राष्ट्र के एक जांचकर्ता ने अमरीका के मूल निवासियों के खिलाफ़ व्यवस्थित ढंग से भेदभाव किए जाने का आरोप लगाया है.

मानवाधिकार परिषद के विशेष जांचकर्ता जेम्स अनाया दुनिया भर में कबाईली और मूल निवासी लोगों के अधिकारों के बारे में जांच करते हैं.

अनाया ने पिछले 12 दिनों में अमरीका का दौरा किया और जगह-जगह मूल निवासियों से मुलाकात करके उनकी मुश्किलों के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की.

शुक्रवार को उन्होंने अपनी प्राथमिक जानकारी के आधार पर यह कहा कि अमरीका के मूल निवासियों या 'नेटिव अमेरिकन्स' के खिलाफ़ व्यवस्थित भेदभाव किए जाने के सुबूत मिले हैं.

'नस्ली भेदभाव'

जेम्स अनाया ने कहा, “पिछले 12 दिनों में मैंने ऐसी कहानियां सुनी हैं, जिससे मूल निवासियों के कई दशकों के गहरे दुख को साफ़ देखा जा सकता है. कई दशकों पहले से हो रहे अत्याचार को वह अब भी गहराई से महसूस कर रहे हैं."

"उनकी ज़मीनों और खनिज संपदा को छीनना, उनके बच्चों को उनके परिवार और समुदाए से अलग करना, उनकी परंपराओं को तोड़ना, उनकी भाषा का लुप्त होना, और उनके साथ किए गए समझौतों को भी तोड़ना और उनक साथ अमानवीय व्यहवार करना, यह सब नस्ली भेदभाव के तहत किया जाता है"

जेम्स अनाया

वे कहते हैं, "उनकी ज़मीनों और खनिज संपदा को छीनना, उनके बच्चों को उनके परिवार और समुदाए से अलग करना, उनकी परंपराओं को तोड़ना, उनकी भाषा का लुप्त होना, और उनके साथ किए गए समझौतों को भी तोड़ना और उनक साथ अमानवीय व्यहवार करना, यह सब नस्ली भेदभाव के तहत किया जाता है.”

जेम्स अनाया का कहना है कि इन मूल निवासियों को अमरीका में कई क्षेत्रों में जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक सेवाओं को हासिल करने में भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है.

अमरीका में कई पुश्तों से विभिन्न मूल निवासी कबीले रह रहे हैं. और अमरीकी सरकार ने इन लोगों के संरक्षण के लिए कुछ कदम उठाए हैं.

इनकी संस्कृति और भाषा को भी संरक्षित करन की कोशिश की गई है.

'जमीन वापस चाहिए'

लेकिन बहुत से मूल निवासी अमरीकी सरकार से बेहद नाराज़ हैं. उनका कहना है कि बरसों पहले जो समझौते और वादे किए गए थे, उन पर आज तक अमल नहीं हुआ.

"हम लोग यहां पहले से रहते आए हैं, बाद में आक्रमणकारी आए और उन्होंने हमारे लोगों का नरसंहार किया और फिर नस्ल भेदी हिंसाएं भी कीं. हमारे साथ अमरीका ने कई संधि और समझौते किए थे, लेकिन जब हमारे इलाके में ज़मीन के अंदर सोने की खान पाई गई तब से अमरीका ने समझौतों का उल्लंघन करना शुरु कर दिया"

डेबरा प्लूम

ऐसी ही एक अमरीकी मूल निवासी लकोटा कबीले की महिला डेबरा प्लूम कहती हैं,“हम लोग यहां पहले से रहते आए हैं, बाद में आक्रमणकारी आए और उन्होंने हमारे लोगों का नरसंहार किया और फिर नस्ल भेदी हिंसाएं भी कीं. हमारे साथ अमरीका ने कई संधि और समझौते किए थे, लेकिन जब हमारे इलाके में ज़मीन के अंदर सोने की खान पाई गई तब से अमरीका ने समझौतों का उल्लंघन करना शुरु कर दिया.”

अमरीका के यह कबाइली मूल निवासी अमरीकी सरकार की ओर से रकम देने की पेशकश को भी नकार देते हैं.

डेबरा कहती हैं, “अमरीकी सरकार तो हमसे कहती है कि ज़मीन के बदले रकम ले लो. लेकिन हमे डॉलर नहीं हमे अपनी ज़मीन वापस चाहिए.”

डेबरा कहती हैं कि उनके लकोटा कबीले के लोगों की तो दोहरी नागरिक्ता है, लकोटा और अमरीकी. लेकिन वह गैर मूल निवासी अमरीकियों से अपील करते हुए कहती हैं कि, “न्यायसंगत अमरीकी लोगों को चाहिए कि वह अपनी सरकार पर दबाव डालें जिससे हमारे लोगों को उनके पूरे हक़ दिए जाएं.”

जांचकर्ता जेम्स अनाया का कहना है कि इन मूल निवासियों को उनका हक़ वापस देने में कोई रूकावट नहीं आनी चाहिए.

उन्होंने उम्मीद जताई है कि अमरीकी सरकार इन मूल निवासियों की ज़मीन से संबंधित शिकायतों समेत सभी मुद्दों का ठोस हल निकालने की ओर काम करेगी और इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र के मूल निवासियों के अधिकारों से संबंधित समझौते का भी पालन करेगी.

अमरीका ने सन 2010 में मूल निवासियों के अधिकारों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

उन्होंने यह भी कहा कि अमरीकी सरकार मूल निवासियों को भी अहम फ़ैसलों में शामिल करे.

संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ता अब इस मामले में अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके इस साल के अंत तक संयुक्त राष्ट्र को सौंप देंगे.

इस रिपोर्ट में अमरीका के मूल निवासी लोगों की मुश्किलों और उनके अधिकारों के हनन का विस्तृत वर्णन होगा और उनको हल करने के लिए अपनाए जाने वाले प्रस्तावित तरीक़े भी शामिल होंगे.

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