सलमान रुश्दी पर शोध- उखड़ा देवबंद

 मंगलवार, 24 अप्रैल, 2012 को 11:59 IST तक के समाचार
देवबंद

सलमान रुश्दी की रचनाओं पर मेरठ विश्वविद्यालय में शोध हो रहा है

विवादित लेखक सलमान रुश्दी की रचनाओं पर शोध के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप को मंजूरी दी है जिसका दारुल उलूम देवबंद ने पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है.

देवबंद ने मांग की है कि इसे तत्काल रद्द किया जाए और इस तरह की अनुचित प्रक्रिया में सुधार किया जाए.

दारुल उलूम देवबन्द का कहना है कि विवादित लेखक सलमान रुश्दी पर शोध को मंजूरी देना अल्पसंख्यकों की भावनाओं से खुला खिलवाड़ है जिसका विरोध दारुल उलूम करता है.

दारुल उलूम देवबंद के प्रवक्ता अशरफ उस्मानी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ‘इस तरह के फैसले से मुसलमानों को ठेस पहुंचेगी. सलमान रुश्दी की किताब हमेशा के लिए है और हम हमेशा ही इसका विरोध करेंगे.’

उनका कहना था, ‘जिस लेखक की किताब पर पाबंदी है उसके लेखन पर शोध परियोजना को मंजूरी देना यूजीसी जैसी संस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है.’

अशरफ उस्मानी, प्रवक्ता देवबंद

"जिस लेखक की किताब पर पाबंदी है उसके लेखन पर शोध परियोजना को मंजूरी देना यूजीसी जैसी संस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है."

देवबंद के अलावा कई और संगठनों ने भी यूजीसी द्वारा इस शोध परियोजना को मंजूरी देने के फैसले पर नाराजगी जताई है और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और मेरठ विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है.

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अर्थात् यूजीसी ने हाल ही में मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप के तहत विवादित उपन्यास 'दि सैटेनिक वर्सेज' के लेखक सलमान रुश्दी पर शोध करने को मंजूरी दे दी है.

इसके तहत अमिताभ घोष, विक्रम सेठ और सलमान रुश्दी की कहानियों में जादुई यथार्थ के भव पर शोध किया जाना है.

मेरठ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में डा. प्रभा परमार को इस विषय पर शोध करने के लिए ये फेलोशिप मंजूर की गई है.

गौरतलब है कि 1988 के अन्त में सलमान रुश्दी लिखित उपन्यास 'द सेटेनिक वर्सेस' ने दुनिया भर में कोहराम मचा दिया था.

दुनिया के मुस्लिम बहुल देशों में इस उपन्यास का भारी विरोध हुआ था और इस उपन्यास की प्रतियां जलाई गई थीं.

उस समय 'दि सैटेनिक वर्सेज' को भारत, बांग्लादेश, सूडान, दक्षिणी अफ्रीका, श्रीलंका, केन्या, थाईलैंन्ड, तन्जानिया, वेनेजुएला, पाकिस्तान, इंडोनेशिया तथा सिंगापुर जैसे देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया था.

इसके अलावा ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च आध्यात्मिक नेता अयातुल्ला खुमैनी ने 14 फरवरी 1989 को सलमान रुश्दी के विरुद्ध तौहीने इस्लाम किए जाने के आरोप में मौत का फतवा जारी किया था.

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