सोमालिया में मोटापा बना जान का दुश्मन

 रविवार, 22 अप्रैल, 2012 को 21:28 IST तक के समाचार

सोमालिया के हालात भले ही खराब हों, लेकिन अब महिलाएं जिम जाने लगी हैं

सोमालिया के बारे में कहा जाता है कि हिंसा, सूखाड़ और देश के ज्यादातर भूभाग पर नियत्रंण रखने वाले अल-शहाब इस्लामिक चरमपंथी संगठन के प्रतिबंध के कारण महिलाओं की जिंदगी दूभर हो गई है.

लेकिन बीबीसी की मैरी हार्पर ने वहां देखा कि कुछ महिलाएं बिल्कुल अलग-अलग तरह का काम कर रही हैं, जिसके चलते वहां की महिलाओं का भविष्य थोड़ा बेहतर हो सकता है.

सुबह-सुबह सोमालिया की राजधानी मोगादिशू के एक मकान में महिलाओं को वजन उठाते, दौड़नेवाली मशीन पर तेज गति से दौड़ लगाते हुए और विभिन्न तरह के कसरत और व्यायाम करते हुए देख सकते हैं. जहां की गलियों से लगातार गोली चलने की आवाज आती हो और जहां आत्मघाती दस्ते का खतरा हमेशा बना रहता हो, वहां ये महिलाएं खुद को नकाब में ढ़की नहीं रखती हैं, बल्कि वह ट्रैक सूट और टी शर्ट पहनकर जिम जाती हैं.

जिम में महिलाएं

मोगादिशू से सौ किलोमीटर दूर हरगिसिया है. जो सोमालिया की तुलना में काफी शांत है.

मोगादिशू में बीबीसी के मोहम्मद धोरे का कहना है कि महिलाओं का जिम में जाकर व्यायाम करना लगातार लोकप्रिय होता जा रहा है, यह इस बात का सूचक है कि शहर के हालात बदल रहे हैं. वहां के लोग अब थोड़ा राहत महसूस करते हैं. उन्हें लगता है कि मोगादिशू अब अल-शहाब और सरकार की मदद कर रही अफ्रीकी यूनियन की शांति सेना के बीच का सिर्फ युद्धस्थल नहीं रहा है.

हकीकत यह है कि जिस रफ्तार में महिलाएं वहां जिम में जाने लगी है, यह इस बात का प्रमाण है कि अल-शहाब का डर लोगों से कम होने लगा है. अब उनके उपर इसका दबाव नहीं है कि वह अपने व्यवहार पर नियत्रंण रखते हुए खुद को नकाब में छुपाकर रखें.

लेकिन जिमखाने में सारी चीजें इतना भी सामान्य नहीं हैं. भले ही जिमखाने के भीतर महिलाएं खुशी और राहत महसूस करे, उसकी खिड़कियां हमेशा बंद रहती हैं. बंद दरबाजे के बाहर हमेशा सुरक्षा गार्ड तैनात रहता है जिसे जिम के मालिक बाजार के भाव से ज्यादा तनख्वाह देते हैं.

आत्मघाती दस्ते का डर

जिम के मालिक का कहना है कि उसे बाजार के सबसे बेहतर गार्ड की जरूरत है क्योंकि वह चाहते हैं कि कोई बाहरी आदमी आकर महिलाओं के साथ बलात्कार न करे और वह आत्मघाती दस्ते के हमले से भी जिम को बचा सके.

सोमालिया के दूसरे जिम बिलक्सी बॉडीबिल्डिंग सेंटर के बाहर कोई गार्ड नहीं हैं.

इस जिम में हिष्ट-पुष्ट, बलिष्ट आदमी और व्यायाम करने वाली मशीन की तस्वीर लगी है जो डरावनी यातनादायी मशीन की तरह दिखती है.

इसका कारण यह है कि बिलक्सी बॉडीबिल्डिंग सेंटर मोगादिशू से सौ किलोमीटर दूर सोमालिया लैंड के स्वयंभू राजधानी हरगिसिया में स्थित है. हालांकि यह जगह सोमालिया प्रदेश की तुलना में काफी शांत है.

मोहम्मद धीरे का कहना है कि मोगादिशू जिम की तरह उसके दरवाजे और खिड़कियां भी पूरी तरह बंद थे. कई बार जोर से दरवाजा खटखटाने के बाद धातु से बने उस मजबूत दरवाजे को एक छरहरी महिला ने खोला और उन्हें अंदर जाने की इजाजत दी.

जिम के भीतर का दृश्य हरगिसिया के गलियों से पूरी तरह भिन्न था. वहां तेज आवाज में संगीत बज रहा था.

कम कपड़ों में महिलाएं व्यायाम करनेवाली मशीन पर पसीना बहा रही थी. छोटी बालों वाली एक लड़की ने छत से झूल रहे बैग पर एक जोरदार घुस्सा मारा.

पूरी तरह काला कपड़ा पहने इस लड़की ने तेजी और जोर-जोर से उस बैग पर पांव भी मारे. वह काफी मजबूत, स्वस्थ्य और थोड़ा सा डरावनी भी लग रही थी.

जिम आनेवाली एक महिला

"मैं हर दिन पांच घंटे के लिए जिम में आती हूं. मैं यहां 10 बजे शुबह पहुंचती हूं और तीन बजे शाम में निकलती हूं- ठीक पहले जब पुरुष यहां आना शुरु करते हैं"

थोड़ी सी उम्रदराज महिला दौड़नेवाली मशीन पर संयम गति से दौड़ रही थी.

जिम में मौजूद अन्य महिलाओं की तरह वह भी खुले विचारों की थी और बात करना चाहती थी. वहां मौजूद महिलाओं का व्यवहार बाहर के माहौल से बिल्कुल अलग था.

उसने अपने पेट की चर्बी को पकड़ा और कहा, “चर्बी ही असली दुश्मन है. ”, “मैं हर दिन पांच घंटे के लिए जिम में आती हूं. मैं यहां 10 बजे शुबह पहुंचती हूं और तीन बजे शाम में निकलती हूं- ठीक पहले जब पुरुष यहां आना शुरु करते हैं”

युवतियों का एक झुंड दरवाजे से जिम के भीतर घुसती हैं. सभी अपने उपरी लिबास को उतारकर रंग-बिरंगी चुस्त कपड़ों में दिखाई देने लगती है. वह जिम में लगे लंबे आइना में अपने को निहारती है और एक दूसरे के पेट पर पड़े चर्बी को पकड़कर खिचती हैं और ठठाकर आपस में हंसने लगती है.

दौड़ने वाली मशीन पर खड़ी निमो नामक एक किशोरी कहती है. “आज जिम में मेरा पहला दिन है.”, “मुझे यहां अच्छा लग रहा है, यहां सभी मशीनों पर जाकर मैं व्यायाम करूंगी.” अपने पेट पर हाथ फेरते हुए कहा, “ मुझे अपनी चर्बी कम करनी है.”

संघर्ष से जूझ रहे दक्षिण सोमालिया से अलग सोमालीलैंड ने गृहयुद्ध के मलबे से निकलकर अपने को फिर से खड़ा किया है. अब वे सिर्फ आर्थिक तबाही से ही उबरने पर खर्च नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे दूसरे मदों में भी खर्च करने लगे हैं.

वे महिलाएं हैं जो व्यापार और अन्य जरूरतमंद गतिविधियों को संचालित कर रही हैं.

जिम के बगल में टहलते हुए जाने की दूरी पर एक कला दीर्धा है. सोमालीलैंड में यह अपने तरह का अकेला कला दीर्धा है. इसे इसी वर्ष वहां की इबोनी इमाम दलास नामक एक युवती खोला है.

दीवार पर युद्ध नहीं होने के चिन्ह वाला चमकीला पेंटिग टंगा हुआ है. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण और खूबसूरत चीज यह है कि वहां महिलाएं अब झुंड के झुंड में रंग-बिरंगी कपड़ों में निकलकर ऊंट पर बैठकर चारों तरफ घूमते हुए दिख जाती हैं.

खुल रही हैं दुकानें

वहां महिलाओं ने अब ब्यूटी पार्लर खोलने शुरु किए हैं, दीवार पर मेंहदी से बने गहरी आंखें बनी हैं जो किसी को आकर्षित करती हैं. फैशननुमा कपड़ों के लिए हरगिसिया में एक बड़ी दुकान खुली है जिसका मालकिन होदान हसन इल्मी है.

महिलाओं के लिए दुकानों में रंग-बिरंगे कपड़े बिक रहे हैं जिसमें जींस, जूते, बैग, टोपी, घूप के चश्मे आदि मिलते हैं.

वहां अबयास- जो लंबा और ढ़ीला-ढ़ाला गॉन सा है- की बिक्री सबसे ज्यादा हो रही है. “आज के दिन अबयास सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, अबयास एक ऐसा वस्त्र है जिसमें नवयुवती न सिर्फ आराम महसूस करती हैं बल्कि इसमें अपना मोटापन और थुलथुलापन भी छुपा सकती हैं.”

"वैसे आप विश्वास नहीं करेगें, लेकिन हकीकत यह है कि यहां चुस्त जींस और टॉप्स भी काफी लोकप्रिय है, लड़कियां इसे अबयास के नीचे पहनती है. महिलाएं अब अधोवस्त्र भी पहनती हैं क्योंकि इसे पहनकर वह खुश और प्रसन्न रहती हैं"

हरगिसिया में फैशननुमा कपड़ों के दुकान की मालकिन होदान हसन इल्मी

होदान हसन इल्मी कहती है, “वैसे आपको इसपर विश्वास नहीं होगा, लेकिन हकीकत यह है कि यहां चुस्त जींस और टॉप्स भी काफी लोकप्रिय है, लड़कियां इसे अबयास के नीचे पहनती है. लड़कियां अब अधोवस्त्र भी पहनती हैं क्योंकि इसे पहनकर वह खुश और प्रसन्न रहती हैं.”

सोमालिया की महिलाएं बहुत सा ऐसा काम करती हैं जो वहां की अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण है. हालांकि महिलाओं का राजनीति में प्रतिनिधित्व बहुत कम है. उनकी आवाज सार्वजनिक क्षेत्रों में नहीं सुनी जाती है.

सत्ता में महिला नहीं

सोमालियालैंड की पूर्व राष्ट्रपति की पत्नी और वहां की विदेशमंत्री इदना अदान इस्माइल ने एक हरगीसिया में एक मातृत्व अस्पताल खोला है.

उनका कहना है, “सोमालिया की महिलाएं सबसे ज्यादा कमाती हैं.उनके पति गृह यु्द्ध में मारे गए इसलिए परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उन महिलाओं पर आ गयी है.”

वो कहती हैं, “ज्यादातर छोटे व्यापार, बाजार में हो रहे व्यापार या तो महिलाएं करती हैं या उनकी मालकिन महिलाएं हैं या फिर उनमें महिलाओं की हिस्सेदारी है.” इतना होने के बावजूद हमारे देश की महिलाएं हाशिए पर है. वह कहती हैं, “सोमालिया की महिलाओं को लगता है कि इस देश में महिलाओं को उतना नहीं मिलता है जितना कि उसे मिलना चाहिए.”

आर्थिक रूप से इतना कुछ करने के बावजूद महिलाओं को कई अधिकारों से वंचित करके रखा गया है. सत्ता का अधिकार, उत्तराधिकार का अधिकार, अपने मन से शादी करने का अधिकार, शारीरिक रूप से छेड़छाड़ न होने का अधिकार, परिवार में बराबरी का अधिकार और पुरुषों से बरावरी का अधिकार उन्हें नहीं है. संभव है कि आने वाले दिनों में सोमालिया में महिलाओं को और अधिकार मिले.

सोमालिया के राजनीतिक संक्रमण का दौर इस साल अगस्त में खत्म होना है और गैरो सिद्धान्त के अनुसार सोमालिया के संसद में 30 फीसदी महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिलना है. अगर सचमुच यह समझौता लागू हो जाता है तो वहां की महिलाओं को और अधिक अधिकार मिल सकते हैं.

हो सकता है कि आज जिम जाने वाली महिलाओं को खुले माहौल में भी दिखाई पड़े.

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