मुर्दाघर से जिंदा निकली 'मृत' बच्ची

 गुरुवार, 12 अप्रैल, 2012 को 19:12 IST तक के समाचार
टेले नोटिसियस से बात करते हुए बच्ची की मां

बारह घंटे बाद जिंदा निकली अनालिया की बच्ची

चमत्कार ऐसा शब्द है जिसका वास्ता ज्यादातर इंसानों की जिंदगी से नहीं पड़ता है.

इसलिए लोगों को लगता है कि यह किताब का लिखा हुआ एक शब्द मात्र है. लेकिन वास्तविक जिंदगी में जब कभी ऐसा हो जाता है तो इंसान को इस शब्द पर फिर से यकीन होने लगता है.

ऐसा ही चमत्कार अर्जेनटीना की उस मां के साथ हुआ, जिनकी नवजात बच्ची को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था, लेकिन 12 घंटे के बाद वह जिंदा मिली.

अर्जेनटीना के चाको प्रांत की अनालिया बॉटर ने जब तीन अप्रैल को बच्चे को जन्म दिया तो अस्पताल के कर्मचारियों ने अनालिया दंपत्ति को दुखद सूचना देते हुए बताया कि उनकी बच्ची जन्म लेते ही मर गई है.

लेकिन 12 घंटे के बाद जब अनालिया बॉटर अपने पति के साथ मुर्दा घर पहुंची तो उन्होंने देखा कि उनकी बिटिया जिंदा है और ठंड से कांप रही है.

नाम रखा है 'अलौकिक रौशनी'

"जब मैं मुर्दा घर पहुंची तो वहां अपनी बच्ची को उठाकर सबसे पहले मैंने उसके हाथ को छूआ और आहिस्ते से जब उसके चेहरे से कपड़े को हटाया तो वह सिसकने लगी. मैं खुशी के मारे घुटनों के बल जमीन पर बैठ गई. मेरे पति को तो पता ही नहीं चल रहा था कि किया क्या जाय. हम दोनों रो रहे थे, चिल्ला रहे थे, हंस रहे थे और यही बार-बार दोहरा रहे थे"

अनालिया बॉटर

अस्पताल प्रशासन ने पाँच कर्मचारियों को लापरवाही बरतने के लिए निलंबित कर दिया है.

चाको के उप स्वास्थ्य मंत्री राफेल सबातिनेली ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि अधिकारिक जांच के बाद कर्मचारियों की ओर से लापरवाही की पुष्टि हुई है, इसलिए उन्हें निलंबित कर दिया गया है.

उस चमत्कारिक बच्ची का नाम उसके माता-पिता ने लुज़ मिलाग्रोस रखा है जिसका मतलब 'अलौकिक रोशनी' होता है.

अर्जेटीना के मीडिया टेले नोटिसियस को दिए गए एक इंटरव्यू में अनालिया बॉटर ने बताया, "जब मैं मुर्दा घर पहुंची तो वहां अपनी बच्ची को उठाकर सबसे पहले मैंने उसके हाथ को छूआ और आहिस्ते से जब उसके चेहरे से कपड़े को हटाया तो वह सिसकने लगी. मैं खुशी के मारे घुटनों के बल जमीन पर बैठ गई. मेरे पति को तो पता ही नहीं चल रहा था कि किया क्या जाय. हम दोनों रो रहे थे, चिल्ला रहे थे, हंस रहे थे और यही बार-बार दोहरा रहे थे."

खुशी

उन्होंने बताया कि जब मुर्दा घर के एक कर्मचारी ने बच्ची को छूकर उसके जिंदा होने की पुष्टि की.

बच्ची की जिंदा होने की पुष्टि के बाद अनालिया का भाई बच्ची को गोद में उठाकर भागा और उसे नवजात शिशु वार्ड के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती कराया.

अनालिया ने बताया कि जब उन्होंने बच्ची को छुआ था तो वह बिल्कुल बर्फ सी लग रही थी, जैसे कि वह कोई जीव नहीं, बल्कि किसी बोतल में बर्फ को ले जा रही हो.

एसोसिएट प्रेस न्यूज एंजेसी के हवाले से खबर आई है कि अनालिया बॉटर और उसके पति फैबिओन वेरॉन रेसिसटेंसिया शहर के अस्पताल पेरांडों के खिलाफ दुर्व्यवहार का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराने की योजना बना रहे हैं.

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