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अमीरों पर टैक्स बढ़ाना चाहते हैं बराक ओबामा

 बुधवार, 11 अप्रैल, 2012 को 11:12 IST तक के समाचार
ओबामा

ओबामा नई टैक्स प्रणाली की वकालत कर रहे हैं

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमरीकी संसद से आग्रह किया है कि वह अमीरों पर टैक्स बढ़ाए.

राष्ट्रपति ओबामा ने अमरीकी टैक्स प्रणाली में बदलाव लाने के लिए अपने नए प्रस्ताव 'बफेट रूल' पर जोर दिया है.

फ्लोरिडा के बोका रटोन में अपने प्रस्तावित बफेट रूल की जमकर वकालत करते हुए ओबामा ने कहा कि अमीरों और गरीबों के बीच की दूरी कम होनी चाहिए.

क्या है बफेट रूल

इस नए प्रस्ताव का नाम अमरीकी अरबपति व्यावसायी वॉरेन बफेट के नाम पर रखा गया है. बफेट ने इस बात की शिकायत की थी कि वह अपने से कम पैसा कमाने वाले कर्मचारियों से भी कम दर पर टैक्स अदा करते हैं.

बफेट ने कहा था, "यह गलत है कि मैं अपनी सेक्रेटरी से भी कम की दर पर टैक्स अदा करता हूं."

उन्होंने राष्ट्र्पति ओबामा से आग्रह किया था कि टैक्स के नियमों में बदलाव लाने की जरूरत है. उसी को प्रेरणा बनाकर बराक ओबामा ने बफेट रूल के नाम से सभी को समान दर पर टैक्स की योजना बनाई है.

संसद से आग्रह

"यह न्यायसंगत नहीं है कि अमीरों को टैक्स की छुट्टी दी जाए. उन्हे भी मध्यम वर्ग के लोगों के बराबर की दर पर टैक्स देना चाहिए."

बराक ओबामा, अमरीकी राष्ट्रपति

फ़्लोरिडा एटलांटिक यूनिवर्सिटी में चुनावी सभा जैसे माहौल में अपने भाषण के दौरान बराक ओबामा ने पूछा, " क्या अमीरों को और टैक्स छूट दी जानी चाहिए."

भीड़े ने जोर से जवाब दिया- नहीं.

ओबामा ने कहा कि वह अमरीका में अमीरी को बढ़ावा देने के हक में हैं लेकिन सभी को समान नियमों के अनुसार उन्नति के मौके मिलने चाहिए.

इसलिए वह सीनेट से आग्रह कर रहे हैं कि सभी वर्गों के लोगों के लिए टैक्स की दर में समानता के मकसद से लाया जाने वाला -पेईंग द फेयर शेयर- नामक प्रस्ताव पारित कर दिया जाए.

बराबर टैक्स

फ्लोरिडा में अपने भाषण में बराक ओबामा ने कहा, "जो लोग अब तक के टैक्स नियमों से फायदा उठा रहे हैं वह पिछले 50 सालों में अब तक के सबसे कम दर पर टैक्स अदा कर रहे हैं. और यह सही नहीं है. यह न्यायसंगत नहीं है कि अमीरों को टैक्स की छुट्टी दी जाए. उन्हे भी मध्यम वर्ग के लोगों के बराबर की दर पर टैक्स देना चाहिए."

बराक ओबामा के इस प्रस्तावित बदलाव लाने वाले बफेट नियम के तहत अमरीका में 10 लाख डॉलर प्रति वर्ष कमाने वाले लोगों को, चाहे यह कमाई वेतन के जरिए हो या निवेश के जरिए, अपनी कमाई के 30 प्रतिशत की दर से टैक्स देना होगा.

मौजूदा नियमों के तहत जो लोग वेतन के जरिए 10 लाख डॉलर या उससे अधिक सालाना कमाते हैं उन्हे 35 प्रतिशत की दर से कर देना पड़ता है, जबकि जो लोग निवेश के जरिए 10 लाख से अधिक कमाते हैं उन्हे सिर्फ 15 प्रतिशत की दर से ही टैक्स देना पड़ता है.

टैक्स पर सियासत

ओबामा

ओबामा के विरोधी उनके प्रस्ताव को चुनावी हथकंडा कह रहे हैं

इस साल नवंबर में अमरीकी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव भी होने हैं. और इसीलिए अब टैक्स नियमों के इस मुद्दे पर जमकर सियासत भी हो रही है.

ओबामा प्रशासन बफेट नियम को अपनी चुनावी मुहिम का भी अहम मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन चुनाव में उनके संभावित प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन पार्टी के मिट रोमनी इसके सख्त खिलाफ हैं.

रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं का कहना है कि बफेट रूल एक चुनावी हथकंडा है न कि टैक्स प्रणाली को सुधारने की कोई कोशिश.

उनका कहना है कि इस टैक्स दर के बढ़ाए जाने से अमरीकी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा औऱ रोजगार बढ़ाने में भी मुश्किल होगी.

रोमनी की प्रवक्ता गेल गिचो कहती हैं, "अमरीका के इतिहास में बराक ओबामा पहले अमरीकी राष्ट्रपति हैं जो फिर से राष्ट्रपति चुने जाने के लिए अमरीकी लोगों पर और अधिक टैक्स लादने के मुद्दे पर खुलकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं. इस तरह के टैक्स बढ़ाने से छोटे व्यापारियों पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा."

चुनावी हथकंडा

मिट रोमनी निवेश के जरिए लाखों डॉलर प्रतिमाह कमाते हैं और सिर्फ 15 प्रतिशत की दर से टैक्स देते हैं.

इसीलिए ओबामा प्रचार मुहिम इस बात पर जोर दे रहा है कि चुनाव में उनके संभावित प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन पार्टी के मिट रोमनी इसलिए इन प्रस्तावित नियमों का विरोध कर रहे हैं क्योंकि वह तो इसमें अपना निजी फायदा देख रहे हैं.

ओबामा की चुनावी मुहिम के मैनेजर जिम मैसीना ने कहा, "रोमनी को तो इस मौजूदा टैक्स प्रणाली से फायदा ही होता है इसलिए वह नहीं चाहते कि इसमें कोई बदलाव लाया जाए. "

ओबामा अब इस नए प्रस्तावित टैक्स नियमों को अमरीकी सीनेट क सामने भेजेंगे औऱ अगले हफ्ते सीनेट इस पर चर्चा भी कर सकती है.

लेकिन पर्यवेक्षकों का मानना है कि अमरीकी कांग्रेस में बराक ओबामा के इस नए बफेट नियम के प्रस्ताव के पारित होने की संभावना कम ही है.

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