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शराब और सड़क हादसे का संबंध

 बुधवार, 28 मार्च, 2012 को 21:30 IST तक के समाचार
सड़क हादसे

पुलिस द्वारा शराब पीकर गाड़ी चलाने को लेकर चलाए जा रहे अभियान से वहां महिलाएं काफी खुश हैं.

भारत में सड़क दुर्घटनाएँ इतनी बड़ी और खतरनाक समस्या बन गई हैं कि हर वर्ष लगभग एक छोटे शहर के बराबर की जनसंख्या मौत का शिकार हो जाती हैं.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष देश में सड़क दुर्घटनाओं में एक लाख चालीस हज़ार लोग मरते हैं और उनसे कई गुना ज्यादा लोग घायल और अपंग हो जाते हैं. इस तरह देश को हर वर्ष केवल सड़क दुर्घटनाओं के करण एक भारी आर्थिक और सामाजिक कीमत चुकानी पड़ती है.

आंध्र प्रदेश उन राज्यों में से एक है जहाँ सड़क दुर्घटनाओं और उनमें मरने वालों की संख्या ख़तरनाक हद तक बढ़ गई है और अब सरकार और पुलिस प्रशासन ने इसके नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने का फैसला किया है.

सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार द्वारा एक विशेष कार्य योजना तैयार की गई है जिसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन भी सरकार को सहायता दे रही है.

आंध्र प्रदेश पुलिस महानिदेशक दिनेश रेड्डी का कहना है की साल 2011 में राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में 15 हज़ार लोगों की मृत्यु हुई और 52 हज़ार से ज्यादा लोग घायल और अपंग हुए.

विशेष कार्य योजना

महानिदेशक रेड्डी का कहना है कि आकलन में ये पाया गया है कि नशे की हालत में गाड़ी चलाना इन दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण है इसलिए इस विशेष कार्य योजना के तहत नशे में धुत ड्राइवरों को काबू में लाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है.

आंध्र प्रदेश पुलिस ने राज्य के चार सबसे ज्यादा व्यस्त राजमार्गों का चयन किया है जहां पर पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है और उन राजमार्गों पर स्थित शराब खानों और उन ढाबों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है जहां ड्राइवर शराब पीने के लिए रुकते हैं.

दिनेश रेड्डी का कहना था, "हमने इस अभियान में पूरा जोर इसी बात पर केंद्रित किया है की इन राजमार्गों पर शराब की खुले आम बिक्री को नियंत्रित किया जाए. हालांकि यह अभियान हम ने हाल ही में शुरू किया है लेकिन इस के अच्छे परिणाम निकले हैं और सड़क दुर्घटनाओं में दो प्रतिशत की कमी आ गई है."

जिन राजमार्गों को इस अभियान के लिए चुना गया है उन में मुंबई-विजयवाड़ा, नेल्लोर-विशाखापटनम, आदिलाबाद-अनंतपुर और कर्नूल राजमार्ग शामिल हैं, जहां अब तक सबसे ज्यादा हादसे होते रहे हैं.

साथ ही इन राजमार्गों पर स्थित पुलिस स्टेशनों के कर्मियों से भी कहा गया है की वो अपना ज्यादा समय सड़क पर गुजारें और जो ड्राइवर नशे की हालत में मिलें उनके विरुद्ध कड़े मामले दर्ज करें.

साथ ही आंध्र प्रदेश पुलिस ने बड़े नगरों में भी नशा विरोधी अभियान जोर-शोर से शुरू किया है.

महिला पुलिस भी तैनात

हैदराबाद में पुलिस रोजाना रात में गाड़ियाँ रोककर ड्राइवरों का टेस्ट ले रही है जिसके लिए विशेष उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा है. हद तो यह है की महिला ड्राइवरों के टेस्ट के लिए महिला पुलिसकर्मियों को भी रातों में सड़कों पर तैनात किया जा रहा है.

इस अभियान की अगुवाई करने वाले अतिरिक्त पुलिस आयुक्त सीवी आनंद का कहना है की इस अभियान के इतने अच्छे परिणाम निकले हैं कि इससे पहले किसी और कार्यक्रम का इतना फायदा नहीं हुआ था.

आनंद का कहना है, "इसका करण यह है की हम नशे में गाड़ी चलाने वालों के विरुद्ध कड़े मामले दर्ज कर रहे हैं. उनकी गाड़ियां ज़ब्त की जा रही हैं और उन्हें बिना गाड़ी घर जाना पड़ रहा है. फिर दूसरे दिन उन्हें अदालत में हाजिर होकर जुर्माना अदा करने के बाद ही गाड़ी वापस मिल रही है. साथ ही उन पर केस भी चलेगा और सजा भी हो सकती है".

इस अभियान के दौरान दो महीने में ही पुलिस ने 1700 लोगों के विरुद्ध मामले दर्ज किए हैं. इसके तहत आधुनिक उपकरण का इस्तेमाल हो रहा है जिसमें ड्राइवर का टेस्ट लिया जाता है उसका परिणाम इंटरनेट द्वारा पुलिस सर्वर में सुरक्षित हो जाता है और किसी पुलिस वाले के रिश्वत लेकर किसी को छोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता.

आनंद का कहना था, "इस अभियान से हैदराबाद में एक खुशी की लहर दौड़ गई है और सबसे ज्यादा महिलाएं खुश हैं कि उनके पति या तो घरों में ही पीते हैं या फिर खुद गाड़ी चलाकर नहीं आते".

लेकिन आनंद के अनुसार यह समस्या इतनी बड़ी है कि केवल पुलिस उससे नहीं निबट सकती. उनका कहना था कि कुछ शराबखाने और क्लब वाले शिकायत कर रहे हैं कि पुलिस के अभियान से उनका धंधा ख़राब हो रहा है हालांकि उन्हें इससे खुश होना चाहिए की पुलिस के इस अभियान से लोगों की जान बच रही है.

शराबखाने और बार वालों का काम केवल लोगों को शराब पिलाकर सड़कों के हवाले करना नहीं है बल्कि यह उनकी जिम्मेवारी है कि इन लोगों को अपने घरों को सुरक्षित पहुंचाने में मदद करें और उसके लिए वाहनों का प्रबंध करें.

एक अजीब बात यह है कि यह सब कुछ एक ऐसे राज्य में हो रहा है जहां देश में सबसे ज्यादा शराब पी जाती है और जहां सरकार को शराब की बिक्री से हर साल लगभग 15 हज़ार करोड़ रुपए की आय होती है और अब उसी राज्य की सरकार के लिए लोगों में शराब पीने की यही आदत और उससे होने वाली सड़क दुर्घटनाएं एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है.

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