भारत ने दिया श्रीलंका के खिलाफ मत

 गुरुवार, 22 मार्च, 2012 को 19:03 IST तक के समाचार
एलटीटीई (फाइल फोटो)

श्रीलंकाई सेना पर आरोप है कि युद्ध के दौरान उसने हजारों तमिल नागरिकों को मार दिया था

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में श्रीलंका पर आए प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है.

गुरूवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने एक प्रस्ताव पारित पर श्रीलंका से आग्रह किया है कि वो तीन साल पहले तमिल छापामार एलटीटीई के साथ हुई लड़ाई में सरकारी सेना के जरिए किए गए कथित युद्ध अपराध की जांच करे.

श्रीलंका ने आरोप लगाया था कि अमरीका के ज़रिए लाए गए इस प्रस्ताव में श्रीलंका को जानबूझकर निशाना बनाया गया है. श्रीलंका ने सदस्य देशों को इस प्रस्ताव के विरोध में मतदान करने के लिए कई सप्ताह तक अभियान चलाया था.

लेकिन आखिरकार गुरूवार को जब प्रस्ताव पर मतदान हुआ तो भारत समेत 24 देशों ने इसके पक्ष में वोट डाले जबकि चीन समेत 15 देशों ने इसका विरोध किया. आठ देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट डालने पर सफाई पेश की है.

विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, ''भारत का मानना है कि मानवाधिकार की रक्षा करने की प्राथमिक जिम्मेदारी खुद देश विशेष की होती है. इसलिए इस तरह के किसी भी प्रस्ताव में श्रीलंका की संप्रभुता का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए.''

"भारत का मानना है कि मानवाधिकार की रक्षा करने की प्राथमिक जिम्मेदारी खुद देश विशेष की होती है. इसलिए इस तरह के किसी भी प्रस्ताव में श्रीलंका की संप्रभुता का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए"

भारतीय विदेश मंत्रालय

प्रस्ताव के समर्थन में मत डालते हुए भारत ने कहा, ''इस प्रस्ताव के जरिए जो संदेश देने की कोशिश की जा रही है हम उससे सहमत हैं लेकिन हम ये भी कहना चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त के दफ्तर से की जा रही मदद या फिर संयुक्त राष्ट्र के किसी अधिकारी के श्रीलंका दौरे को श्रीलंकाई सरकार से संपर्क और उनकी सहमति के बाद ही किया जाना चाहिए.''

तमिल राजनीति

दरअसल इस मामले में भारत का रूख क्या होगा इसको लेकर काफी राजनीतिक गहमा गहमी चल रही थी.

पिछले कुछ वर्षो में भारत और श्रीलंका के संबंध बेहतर हुए हैं और श्रीलंका इस प्रस्ताव के विरोध में मतदान करने के लिए भारत पर दबाव बना रहा था.

लेकिन श्रीलंका में तमिलों का मुद्दा एक ऐसा मुद्दा है जिसपर बहुत हद तक भारत के राज्य तमिलनाडु की राजनीति निर्भर करती है.

तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दल इस बात के लिए दबाव डाल रहे थे कि भारत प्रस्ताव के पक्ष में वोट डाले.

केंद्र की यूपीए सरकार के एक प्रमुख घटक दल तमिलनाडु की डीएमके ने तो साफ कह दिया था कि भारत को प्रस्ताव के पक्ष में वोट डालना होगा.

ख़बरें तो यहां तक आ रहीं थीं कि अगर भारत ने प्रस्ताव का विरोध किया तो डीएमके सरकार से समर्थन वापस ले लेगी.

हालांकि कुछ विशेषज्ञों की राय थी कि भारत को इस मामले में तटस्थ भूमिका निभानी थी.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.