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इतिहास के पन्नों में 22 मार्च

 गुरुवार, 22 मार्च, 2012 को 04:55 IST तक के समाचार

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो पाएगें कि 22 मार्च को ही 2002 में एक ब्रितानी महिला ने अपनी इच्छा से मृत्यु को गले लगाने का अधिकार हासिल किया था. इसी दिन मार्टिन लूथर किंग के नेतृत्व में अमरीका के अलबामा राज्य में कालों ने एक नस्ली कानून के चलते सार्वजानिक बसों का बहिष्कार शुरू कर दिया.

2002 : ब्रितानी महिला को इच्छा मृत्यु का अधिकार

जज एलिज़ाबेथ बटलर स्लौस ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाने के बाद महिला से यह आग्रह किया था कि वो अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे

2002 में ब्रिटेन में गले के नीच पूरे शरीर में लकवे से ग्रस्त एक महिला ने जारी इलाज को ठुकराने का अधिकार पाया था. इस मुक़दमे को सुन रही जज एलिज़ाबेथ बटलर स्लौस ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाने के बाद महिला से आग्रह किया कि वो अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करे.

इस महिला की उम्र 43 साल थी और पूरे मुक़दमे के दौरान उसकी निजता की रक्षा करने के लिए उसे श्रीमती बी के नाम से पुकारा गया.

श्रीमती बी नाम की इस महिला जन्म जमैका में हुआ था और वो आठ वर्ष की उम्र में ही ब्रिटेन आ गईं थीं.

इस फैसले के बाद अस्पताल में उनका इलाज कर रहे डाक्टरों को उनके जीवन को चला रहे वेंटीलेटरों को बंद कर देना पडा क्योंकि उनकी ऐसी ही इच्छा थी.

फैसला देने के बाद जज ने समझाते हुए कहा कि श्रीमती बी का दिमाग पूरी तरह से सही है और उनके पास निर्णय लेने की पूरी क्षमता मौजूद है इसलिए अगर वो इलाज को जारी नहीं रखना चाहती तो ऐसा ही होगा.

इस फैसले के बाद श्रीमती बी को एक दूसरे अस्पताल में ले जाया गया,जहाँ उनकी इच्छा के अनुसार उनका इलाज करना था. फैसले के एक महीने बाद श्रीमती बी की मौत नींद में हुई. इस मुक़दमे और इसके फैसले पर पूरी दुनिया में खूब चर्चा हुई.

1956 : मार्टिन लूथर किंग को रंगभेद का विरोध करने पर जेल

मार्टिन लूथर किंग

अमरीका के अलाबामा में रंगभेद विरोधी नेता मार्टिन लूथर किंग को एक नस्ली कानून का विरोध करने के कारण जेल हुई थी.

आज ही के दिन अमरीका में रंगभेद विरोधी नेता मार्टिन लूथर किंग को एक नस्लवादी कानून का विरोध करने के कारण जेल हुई थी. किंग के नेतृत्व में अलबामा राज्य में मौजूद तमाम काले लोगों ने राज्य में चलने वाली बसों का बहिष्कार कर दिया.

यह बहिष्कार उस वक़्त शुरू हुआ था जब मोंटगोमरी शहर में एक काली महिला को इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया था क्योंकि उसने भरी बस में अपनी सीट एक गोरी महिला के बैठने के लिए खाली नहीं की थी.

कानून के अनुसार बस में गोरों और कालों के बैठने के लिए अलग अलग सीटें निर्धारित थीं और उसके बावजूद अगर किसी गोरे को बैठने के लिए जगह ना मिले तो किसी काले को उसके लिए अपनी सीट छोड़ने पड़ती थी.

इस महिला ने अपनी सीट छोड़ने से इनकार कर दिया जिसके बाद इसे गिरफ्तार कर लिया. इस घटना के बाद मार्टिन लूथर किंग ने पूरे राज्य में काले लोगों के साथ बसों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया.

इस बहिष्कार के कारण बस कंपनियों को भारी घाटा होने लगा. कुल मिला कर यह बहिष्कार 382 दिन जारी रहा जिसके बाद देश के सुप्रीम कोर्ट ने इस नस्लवादी कानून को अवैध करार दे दिया दिया.

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