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ताइवान में जानलेवा हो रहा है ओवरटाइम

 मंगलवार, 20 मार्च, 2012 को 15:55 IST तक के समाचार
श्रमिकों का प्रदर्शन

पिछले साल श्रमिकों ने श्रम विभाग के बाहर प्रदर्शन किया था

ताइवान के समाज में कड़ी मेहनत करने का जज़्बा कूट-कूट कर भरा हुआ है. लेकिन हाल में हुई कुछ मौतों ने अधिक काम करने की इस संस्कृति पर सवाल उठा दिए हैं.

पिछले साल हुई 50 मौतों के लिए कानूनी सीमा से अधिक ओवरटाइम काम करने को माना जा रहा है. ताइवान की ‘काउंसिल ऑफ़ लेबर अफैयर्स’ के अनुसार ये आंकड़ा वर्ष 2010 की तुलना में चार गुना अधिक है.

बीते दो वर्षों में कुछ मामलों ने काफी तूल पकड़ा है.

इन्हीं में से एक है मामला है 29 वर्षीय नानया टेक्नोलॉजी नामक कंपनी में इंजीनियर हू शाओ-पिन का. इस व्यक्ति ने मरने से छह माह पहले प्रतिमाह 99 घंटे का ओवरटाइम किया था. उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई थी.

एक अन्य मामला चियांग डिंग-कू का है जो एक सिक्यूरिटी गार्ड थे. उनकी मौत भी साल 2010 में हार्ट अटैक से हुई थी. मरने से पहले उन्होंने नौ वर्ष तक हर माह 288 से 300 घंटे तक काम किया था.

'कानूनी सीमा से अधिक ओवरटाइम'

"कानून तो हैं लेकिन उनके पालन में दिक्कते हैं. ये मामला काम के प्रति स्थानीय नजरिए का है. तैवान में कंपनियां कानून का पालन नहीं करतीं. उन्हें लगता है कि कोई उनपर नज़र नहीं रख रहा."

पेंग फेंग-मी, श्रम विभाग

सरकारी जांचकर्ताओं के अनुसार ऐसे लोगों को दिल की बीमारी थी. साथ ही उनका वजन अधिक था और ये लोग धूम्रपान करते थे. और ऊपर से बहुत अधिक काम ने हालात और बिगाड़ दिए थे.

ताइवान लेबर फ़्रंट के सन यू-लियान कहते हैं, “ऐसे मामले पहले भी आते रहे हैं जिनमें बाहर से आए श्रमिकों की ओवरटाइम की वजह से मौत के केस भी हैं. लेकिन पहले लोग सोचते थे कि ये महज़ हार्ट अटैक का मामले है. एक और फर्क ये है कि अब मृतकों के परिवार खुलकर बोलने का साहस कर रहे हैं.”

ताइवान में प्रतिमाह 46 घंटे ओवरटाइम की अनुमति है लेकिन सहमति के बाद कुछ लोगों को इससे अधिक काम करने दिया जाता है.

श्रम विभाग से जुड़े पेंग फेंग-मी नाम के एक अधिकारी कहते हैं, “कानून तो हैं लेकिन उनके पालन में दिक्कते हैं. ये मामला काम के प्रति स्थानीय नजरिए का है. ताइवान में कंपनियां कानून का पालन नहीं करतीं. उन्हें लगता है कि कोई उन पर नज़र नहीं रख रहा.”

कंपनियां उठा रही हैं क़दम

ताइवान में एक दफ़्तर

ताइवान में 12 घंटे प्रतिदिन काम करना आम बात है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार ताइवान में कर्मचारी हर वर्ष करीब 2,200 घंटे काम करते हैं जो कि जापान, अमरीका और ब्रिटेन से कहीं अधिक है.

साल 2010 में एक सरकारी अध्ययन में पाया गया कि टेक्नोलॉजी क्षेत्र से जुड़ीं 80 फ़ीसदी कंपनियों की ओवरटाइम नियम का उल्लंघन करने का मुकदमा चल रहा था.

ताइवान में 12 घंटे काम करना तो आम बात है. कुछ लोगों का तर्क है प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए ताइवान के कर्मचारियों को इतना काम करना लाजिमी है.

लिन बिंग-बिन नाम के एक व्यवसायी कहते हैं, “हमें कर्मचारियों के भत्ते बढ़ाने चाहिए लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि कठोर मेहनत का जज़्बा बहुत ज़रुरी है क्योंकि ये देश के आर्थिक विकास का मूल कारण है. कानून अगर सख़्त किए गए तो देश के विकास को नुकसान होगा. ”

समस्या और गंभीर इसलिए भी बन जाती है क्योंकि ताइवान में या तो ट्रेड यूनियनें हैं ही नहीं और अगर हैं भी तो वे बहुत कमज़ोर हैं.

कुछ कंपनियां खुद इस समस्या से निपटने के लिए कदम उठा रही हैं. मसलन एचटीसी नाम की कंपनी ने कर्मचारियों के आधी रात के बाद काम करने पर रोक लगा दी है.

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