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ब्रिटेन में 'मरने के अधिकार' पर सुनवाई को मंजूरी

 सोमवार, 12 मार्च, 2012 को 21:03 IST तक के समाचार
टोनी निकलिन्सन

निकलिन्सन लकवे के शिकार हैं लेकिन उनके दिमाग ने काम करना बंद नहीं किया है

ब्रितानी हाई कोर्ट के एक जज ने फैसला सुनाया है कि टोनी निकलिन्सन के मरने के अधिकार के मामले की सुनवाई होनी चाहिए. टोनी निकलिन्सन को लकवा मार गया है और उनको एक ऐसे डॉक्टर की तलाश है, जो कानूनन उनका जीवन समाप्त करने में उनकी मदद कर सके.

निकलिन्सन की आयु 58 वर्ष है. वह मेल्कशैम, विल्टशायर में रहते हैं. 2005 में लकवे के शिकार होने को बाद वह ‘लॉक्ड इन सिन्ड्रॉम ’ से पीड़ित हैं जिसकी वजह से वह आत्महत्या करने में सक्षम नहीं रहे हैं.

ब्रिटेन के कानून मंत्रालय का तर्क है कि इस तरह के आदेश हत्या से संबंधित कानूनों को बदल देंगे. इस बीमारी में शरीर लकवाग्रस्त जरूर हो जाता है लेकिन दिमाग पूरी तरह से काम करता रहता है.

न्यायाधीश के इस फैसले का अर्थ है कि अब इस मामले की विस्तृत सुनवाई होगी, जिसमें मेडिकल साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जा सकेंगे.

बीबीसी फाइव लाइव पर निकलिन्सन की पत्नी जेन ने एक वक्तव्य पढ़ कर सुनाया, "मुझे खुशी है कि मदद से मौत के मुद्दों पर अदालत में बहस हो रही है. अगर राजनीतिज्ञ समाज से जुड़े इस अहम मुद्दे की अनदेखी करते हैं तो यह लाजिमी है कि अदालत के मंच पर इस विषय पर बहस हो. अब इस बात को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता कि मृत्यु के प्रति 21वीं सदी का रुख 20वीं सदी के मानदंडों पर आधारित हो."

टोनी निकलिन्सन, जो अपनी बात कहने के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड या खास कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं, का मानना है कि इस फैसले से पहले वह एक 'नीरस, तकलीफदेह, अपमानजनक और असहनीय जीवन' जी रहे थे.

विकल्प

निकलिन्सन की पत्नी का कहना था, "वह सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि जब ऐसा करने का समय आए जो उनके पास इस बारे में कोई विकल्प हो."

"मुझे खुशी है कि मदद से मौत के मुद्दों पर अदालत में बहस हो रही है. अगर राजनीतिज्ञ समाज से जुड़े इस अहम मुद्दे की अनदेखी करते हैं तो यह लाजिमी है कि अदालत के मंच पर इस विषय पर बहस हो. अब इस बात को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता कि मृत्यु के प्रति 21वीं सदी का रुख 20वीं सदी के मानदंडों पर आधारित हो"

निकलिन्सन का बयान

उन्होंने कहा कि उन्हें पता नहीं कि उनके पति वास्तव में कब अपनी जान लेना चाहेंगे. उन्होंने आगे कहा, "मैं समझती हूँ, शायद तब जब उनके लिए और आगे जीना असहनीय हो जाए."

इस मुकदमे में न्याय मंत्रालय की ओर से पैरवी कर रहे वकील डेविड पेरी ने हाई कोर्ट को बताया कि निकलिन्सन कहना चाह रहे हैं कि अगर वह जानबूझ कर अपनी जान लेना चाहें तो अदालत उनके इस कृत्य को कानूनन सही करार दे.

उनका कहना था, "वर्तमान में यह न तो इंग्लेंड और न ही वेल्स का कानून है और न ही हो सकता है बशर्ते संसद इस बारे में अलग राय बनाए."

बीबीसी के विधि संवाददाता क्लाइव कोलमेन का कहना है कि यह मामला सहायता से की गई आत्महत्या से थोड़ा आगे बढ़ कर है क्योंकि निकलिन्सन का लकवा इतना भीषण है कि वह खुद अपने आप को मार नहीं सकते. वास्तव में उनको दूसरों की मदद से मरना होगा और इसका अर्थ होगा हत्या.

इस पूरे मुकदमें में निकलिन्सन की दलील है कि उनकी परिस्थतियों में उनके जीवित रहने के अधिकार को अपना जीवन समाप्त करने का अधिकार समझा जाए. उन्हे यह अधिकार मिले कि वह अपने जीवन को किसी भी मानवीय तरीके से समाप्त कर सकें जिसे वह उचित समझते हों.

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