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कैसी है ज़िंदगी?

 रविवार, 11 मार्च, 2012 को 12:56 IST तक के समाचार
ईरोहा

ईरोहा का जन्म जापान में आए सुनामी और भूकंप के आठ महीने बाद हुआ था

जापान में पिछले साल आज ही के दिन रिक्टर पैमाने पर नौ की तीव्रता वाले आए विनाशकारी भूकंप ने पूरे देश में तबाही मचा दी थी. इस भूकंप का असर फूकुशिमा के परमाणु संयंत्र केंद्र पर होने की वजह से वहां से विकिरण लीक होने की आशंका पैदा हो गई थी.

इस कारण प्लांट के आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को वहां से हटा कर दूसरी जगह बसाया गया था. इन्हीं परिवारों में से एक है साईतो परिवार जो फूकुशिमा प्लांट से पंद्रह से बीस मील की दूरी पर बसे इलाके मिनामिसोउमा के हारामाची-कू में रहता था.

इस परिवार ने अपनी नई ज़िंदगी की शुरुआत राजधानी टोक्यो से की है.

पिछले एक साल के उतार-चढ़ाव को याद करते हुए डाई-साईतो कहते हैं,''हमारे परिवार में एक नए सदस्य का आगमन हुआ है और इसने हमें नए साल 2012 का स्वागत नए जोश के साथ करने वजह दी है. लेकिन साथ-साथ उस हादसे को एक साल गुज़रने के बाद भी फूकुशिमा परमाणु संयंत्र से जुड़ी समस्यायें खत्म नहीं हुई है जिससे मैं परेशान हूं.''

साईतो आगे कहते हैं,''हम अभी भी टोक्यो प्रशासन द्वारा 'कोटो' में दिए गए फ्लैट में रह रहे हैं. शुरु-शुरु में मैं यहां की ऊंची इमारतों से काफी प्रभावित हुआ लेकिन अब मुझे इनकी आदत सी हो गई है.''

मुझे शुरु में एक पार्ट-टाईम नौकरी मिली थी लेकिन अब मैं बच्चों के एक प्रशिक्षण केंद्र में मैनेजर और मुख्य प्रशिक्षक के तौर पर काम कर रहा हूं. ये मेरी पहले की नौकरी जैसी नहीं है लेकिन मैं खुश हूं क्योंकि मेरा काम बच्चों और फुटबॉल से जुड़ा है.

परिवार की नई सदस्य

"मैं और मेरी पत्नी ईरोहा खाने-पीने का पूरा ख्याल रख रहे हैं और जितना भी मुमकिन है उसे स्वस्थ खाना दे रहे हैं. ईरोहा के जन्म के बाद हमारा परिवार उसकी देखभाल में काफी व्यस्त रहा है"

डाई साईतो, ईरोहा के पिता

डाई-साईतो कहते हैं, ''ईरोहा का जन्म 10 नवंबर 2011 को हुआ था और मुझे इस बात की बेहद तसल्ली है कि वो पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे किसी तरह की शारीरिक समस्या नहीं है. ईरोहा फूकुशिमा हादसे के बाद आठ महीने तक मेरी पत्नी के गर्भ में थी और हम काफी डरे हुए थे कि कहीं परमाणु विकिरण का असर उस पर ना पड़े.''

''अब मैं और मेरी पत्नी उसके खाने-पीने का पूरा ख्याल रख रहे हैं और जितना भी मुमकिन है उसे स्वस्थ खाना दे रहे हैं. ईरोहा के जन्म के बाद हमारा परिवार उसकी देखभाल में काफी व्यस्त रहा है, ईरोहा के दोनों बड़े भाई-बहन उसका काफी ख्याल रखते हैं और हम एक-दूसरे के काफी करीब हुए हैं.''

''मेरे दोनों बड़े बच्चे यहां के बदले हुए माहौल में काफी अच्छे से घुलमिल गए हैं. मेरे ख्याल से वे हमसे आगे हैं.''

सीमित सुविधाएं

डाई साईतो का कहना है, ''हालांकि टोक्यो प्रशासन ने पिछले साल नवंबर महीने में ही हमें घर देने की बात कही थी लेकिन अब हमें इसी फ्लैट में 2013 की मई तक रहना है. ऐसा क्यों हुआ इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता.''

डाई-साईतो कहते हैं, ''मेरे पास काम है इसलिए मैं अपना परिवार चला पा रहा हुं लेकिन हमारे पास काफी सीमित संसाधन है. हम अभी मिनामिसोउमा वापस जाने का नहीं सोच रहे हैं लेकिन मैं चाहता हुं कि वहां का वातारण इतना स्वस्थ हो जाए कि मेरे बच्चे वहां रह सके लेकिन ये कब होगा, पता नहीं.''

"मिनामिसाउमा छोड़ने वाले मेरे सभी दोस्तों ने अपना नया काम शुरु कर दिया है इसलिए वे वहां वापस नहीं जाएंगे, खासकर वे लोग जिनके बच्चे हैं. मिनासाउमा में वही लोग रुके हैं जिनके पास वहां काम है"

डाई साईतो, ईरोहा के पिता

डाई-साईतो ने बताया,''नए साल के बाद मैं एक बार मिनामिसाउमा अपनी मां से मिलने गया था, वो काफी कमज़ोर हो गई थी. मैं वहां ज्य़ादा समय नहीं रुका लेकिन मैंने उन्हें ईरोहा के जन्म के बारे में बताया था. मेरी मां का कहना था कि चूंकि उन्होंने ईरोहा को देखा नहीं है इसलिए उन्हें महसूस नहीं होता कि वे उसकी दादी हैं.''

''मुझे उम्मीद है कि एक दिन मैं उन्हें ईरोहा से मिला पाउंगा लेकिन इस समय मैं ईरोहा को वहां लेकर जाना नहीं चाहता.''

कोई जानकारी नहीं

डाई साईतो के मुताबिक, ''मिनामिसाउमा छोड़ने वाले मेरे सभी दोस्तों ने अपना नया काम शुरु कर दिया है इसलिए वे वहां वापस नहीं जाएंगे, खासकर वे लोग जिनके बच्चे हैं. मिनासाउमा में वही लोग रुके हैं जिनके पास वहां काम है.''

''कुछ दिन पहले मैं अपने एक दोस्त से मिला जो मिनासाउमा में रहता है. वो काफी गुस्से में था क्योंकि किसी आदमी ने अपने ब्लॉग में दावा किया था कि मिनामिसाउमा में हो रहे आंतरिक विकिरण से उसपर असर हुआ है.''

डाई साईतो का कहना है ''वहां रह रहे लोग पहले से काफी डरे हुए हैं, उन्हें नहीं पता कि ये मीडिया रिपोर्ट कितनी सही है और कितनी गलत. ऐसे में कुछ लोगों को सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर पेश नहीं करना चाहिए. मैं अब वहां नहीं रहता लेकिन मैं भी इसके खिलाफ हुं.''

ईरोहा

भूकंप के बाद फुकूशिमा परमाणु संयंत्र से परमाणु विकिरण होने के कारण आसपास के गांव खाली करा लिए गए थे

साईतो को लगता है, ''इन दिनों मीडिया भी विकिरण संबंधी जानकारी नहीं देती ना ही परमाणु संयंत्र के बारे में कुछ बताती है, क्या वहां से अब भी दूषित पानी का उत्सर्जन हो रहा है, हम कुछ नहीं जानते और सरकार भी खुलकर सारी जानकारी नहीं देती. वहां कुछ भी नहीं बदला है.''

''अगर मुझसे कोई पूछे कि मैं इस त्रासदी के बारे में क्या सोचता हुं तो मैं ये कहुंगा कि इसका सबसे ज़्यादा नुकसान पर्यावरण और आसपास रह रहे लोगों को हुआ है.मेरे घर में एक नन्हा मेहमान आया है, मेरे पास एक नौकरी है, मैं आगे बढ़ गया हुं.''

''लेकिन इस तबाही ने और लोगों की तरह मेरी भी ज़िंदगी पूरी तरह से बदल दी है. ये इस हादसे के सभी पीड़ितों के साथ हुआ है.''

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