फेसबुक, यूट्यूब के रास्ते ड्रग्स की बिक्री

 बुधवार, 29 फ़रवरी, 2012 को 00:11 IST तक के समाचार

ड्रग्स की खरीद में गैरकानूनी इंटरनेट फार्मेसियों द्वारा सोशेल नेटवर्किंग वेबसाइट्स का इस्तेमाल किए जाने पर संयुक्त राष्ट्र चिंतित है.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इंटरनेट पर दवा बेचनेवाली गैरकानूनी फार्मेसियां, फेसबुक और यू-ट्यूब जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स की मदद से युवाओं को निशाना बना रही हैं.

संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय नार्कोटिक कंट्रोल बोर्ड (आईएनसीबी) की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2010 में इंटरनेट के जरिए भेजे जा रहे नियंत्रित ड्रग्स के 12,000 मामलों में से 58 प्रतिशत भारत से थे. बाकि अमरीका, चीन और पोलैंड से भेजे गए थे.

वियना में स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ये रिपोर्ट जारी करते हुए आईएनसीबी के अध्यक्ष प्रोफेसर हामिद घोडसे ने बताया कि ऐसी फार्मेसियां अत्याधुनिक तरीके इस्तेमाल कर युवाओं को लुभाने की कोशिश करती हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक पहले नियंत्रित ड्रग सीधे तरीके से इंटरनेट के जरिए बेचे जाते थे, लेकिन कई सर्च इंजनों के इस जानकारी को अपनी वेबसाइट पर देने से रोकने के बाद ये नया तरीका अपनाया गया.

प्रोफेसर घोडसे ने कहा, “यू-ट्यूब और फेसबुक पर सीधे तौर पर जानकारी नहीं होती, पहले कुछ सवाल-जवाब, चैट और विज्ञापनों के अन्य तरीकों से लुभाया जाता है ताकि वेबसाइट पढ़ रहा व्यक्ति फार्मेसी की वेबसाइट तक पहुंच जाए और वहां उन्हें गैरकानूनी ड्रग्स खरीदने का मौका मिलता है.”

"यू-ट्यूब और फेसबुक पर सीधे तौर पर जानकारी नहीं होती, पहले कुछ सवाल-जवाब, चैट और विज्ञापनों के अन्य तरीकों से उपभोक्ता लुभाया जाता है."

प्रो. हामिद घोडसे, अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय नार्कोटिक कंट्रोल बोर्ट

रिपोर्ट में बताया गया कि विश्व संवास्थ्य संगठन के मुताबिक इंटरनेट पर दवाएं बेचने वाली फार्मेसियों का आधा माल नकली होता है.

आईएनसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक ये गैरकानूनी फार्मेसियां, फोटो और डॉक्टरों के बयानों की जानकारी दिखाकर, अपनी वेबसाइट को सच्ची और भरोसेमंद होने का यकीन दिलाने की कोशिश करती है.

भारत में अब तक पकड़े गए नौ लोग

भारत में संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर में इसी रिपोर्ट की प्रति जारी करते हुए नार्कोटिक कंट्रेल ब्यूरो के महानिदेशक ओपीएस मलिक ने कहा कि इंटरनेट पर काम कर रही गैरकानूनी फार्मेसियां एक बड़ी चुनौती बन गई हैं.

इंटरनेट के जरिए दवाएं मंगाना वैध है, लेकिन इसकी आड़ में ड्रग्स बेचना गैर-कानूनी है. मलिक के मुताबिक ड्रग्स बेचने के इस चलन पर सरकार करीब नौ वर्षों से काम कर रही है.

गैरकानूनी फार्मेसियों के काम करने के तरीके के बारे में मलिक ने बताया, "ये इंटरनेट के जरिए ड्रग्स का ऑर्डर लेती हैं और फिर उसे निजी कोरियर के रास्ते पार्सल में उपभोक्ता तक पहुंचाया जाता है".

"ये इंटरनेट के जरिए ड्रग्स का ऑर्डर लेती हैं और फिर उसे निजी कोरियर के रास्ते पार्सल में उपभोक्ता तक पहुंचाया जाता है."

ओपीएस मलिक, महानिदेशक, नार्कोटिक कंट्रेल ब्यूरो

हालांकि अबतक इंटरनेट पर ऑर्डर लेकर पार्सल भेजनेवाले केवल नौ लोगों को ही पकड़ा जा सका है. फरीदाबाद, आगरा, चेन्नई, वडोदरा, कोलकाता, कोएम्बटूर, दिल्ली, नोएडा, और हैदराबाद से पकड़े गए ये लोग इंटरनेट पर ड्रग्स बेचते थे. इनमें से कई डॉक्टर हैं.

वर्ष 2011 के बारे में ताज़ा जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि विभाग ने नियंत्रित ड्रग्स के 152 पार्सल भारत में पकड़े. जबकि अन्य देशों की सरकारों के मुताबिक इसी अवधि में विदेश में 29 ऐसे पार्सल पकड़े गए जो भारत से भेजे गए थे.

मलिक के मुताबिक इन 152 में से ज्यादातर पार्सल इंटरनेट के जरिए मंगाए गए थे और कुछ फोन या किसी और जरिए से. इन 152 पार्सलों में 38 किलो हिरोईन, 71 किलो हशीश, एक किलो कोकेन और 41 किलो अन्य ड्रग्स बरामद किए गए.

पार्सल के जरिए थोड़ी मात्रा में ड्रग्स पहुंचाने के इस नए तरीके की धरपकड़ करने के लिए सरकार ने कोरियर कंपनियों को चेताया है और उनपर नजर भी रखनी शुरू कर दी है.

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