
श्रीप्रकाश जायसवाल के बयान ने राज्य में कॉंग्रेस विरोधियों कॉंग्रेस के खिलाफ को एक और मौक़ा मिल गया है
उत्तर प्रदेश में बहुमत न मिलने की स्थिति में गुरूवार को राष्ट्रपति शासन की वकालत करने वाले केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने दिल्ली में कहा है कि उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है.
दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा,"जिस पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत से बनने जा रही है वो क्यों राष्ट्रपति शासन लगाने की बात करेगी."
इससे पहले श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा था कि यदि उत्तर प्रदेश चुनावों में कॉंग्रेस को बहुमत नहीं मिलता है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाएगा.
श्रीप्रकाश के बयान से पांचवें चरण के मतदान के दिन नया राजनितिक तूफ़ान खड़ा हो गया है.
अपने गृह नगर कानपुर में पत्रकारों से बात करते हुए केन्द्रीय कोयला मंत्री ने कहा था, "अगर हमें स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तो हम विपक्ष में बैठें और राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो सिवाय इसके हमें कोई सूरत नहीं दिखती."
तीखी प्रतिक्रया
समाजवादी पार्टी महासचिव राम गोपाल यादव ने कहा कि यह बयान कॉंग्रेस की घबराहट दिखाता है.
यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को इसपर कड़े कदम उठाने चाहिए और जायसवाल से सवाल करना चाहिए.
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल की चरखारी सीट से चुनाव लड़ रही मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी जायसवाल के इस तरह के बयान की निंदा की है.
उमा भारती ने कहा है कि जायसवाल का बयान कॉंग्रेस की सामंतवादी सोच का प्रतीक है और यह यहाँ के लोगों को धमकी है.
उमा ने कहा "मेरी उत्तर प्रदेश के लोगों से अपील है कि वो कॉंग्रेस को वोट ना दें क्योंकि कॉंग्रेस उनके वोटों का महत्त्व नहीं जानती."
उमा ने कॉंग्रेस में परिवारवाद पर प्रहार करते हुए कहा "सोनिया गाँधी को बच्चों, नाती-पोतों सहित वोट मांगने के लिए उतरना पड़ा पर जनता ने उन्हें नकार दिया. कॉंग्रेस अब राष्ट्रपति शासन के ज़रिये राज्य पर शासन करना चाहती है."

















