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ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय मात्र 25 साल की उम्र में जब ब्रिटेन की महारानी बनाई गईं तो इंग्लैंड में नहीं बल्कि अफ्रीका के केन्या में छुट्टियां बिता रही थीं.
25 साल की उम्र महारानी बनने के लिए चुनौतीपूर्ण तो होती ही है. उस समय एलिज़ाबेथ की शादी को मात्र पांच साल हुए थे और वो महाराजा जार्ज पंचम के स्थान पर अफ्रीका के दौरे पर थे जहां से उन्हें ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जाना था.
56 वर्षीय जॉर्ज पंचम अत्यंत बीमार होने के कारण इस दौरे पर नहीं आए थे. छह फरवरी की सुबह जॉर्ज पंचम का निधन हुआ तो उस समय एलिज़ाबेथ नैरोबी से 100 मील दूर ट्रीटॉप्स होटल में आराम फरमा रही थीं.
जिम कार्बेट
"दुनिया के इतिहास में पहली बार एक लड़की एक पेड़ पर एक दिन के लिए चढ़ी तो वो राजकुमारी थी और ऐसे अनुभव के बाद जिसे उन्होंने सबसे रोमांचक अनुभव बताया था. इस रोमांचक अनुभव के बाद जब वो पेड़ से उतरी तो महारानी थी"
एक दिन पहले ही एलिज़ाबेथ ने हाथियों को देखा था और उसके बाद पेड़ पर बने अपने केबिन में आराम कर रही थीं.
जाने माने ब्रितानी शिकारी और भारत में भी लोकप्रिय जिम कार्बेट भी इस दौरान महारानी के दल के साथ थे. कार्बेट ने ट्रीटॉप्स होटल के विजीटर बुक में लिखा था, '' दुनिया के इतिहास में पहली बार एक लड़की एक पेड़ पर एक दिन के लिए चढ़ी तो वो राजकुमारी थी और ऐसे अनुभव के बाद जिसे उन्होंने सबसे रोमांचक अनुभव बताया था. इस रोमांचक अनुभव के बाद जब वो पेड़ से उतरी तो महारानी थी.''
जॉर्ज पंचम की मृत्यु का समाचार एलिजा़बेथ को जल्दी नहीं मिला था.
एलिज़ाबेथ जब अपने पेड़ पर बने कॉटेज से उतर कर 32 किलोमीटर दूर सगना लॉज के उस कॉटेज में पहुंची जो उन्हें केन्या सरकार ने शादी के तोहफे में दिया था तब जाकर उनके पति फिलिप ने उन्हें राजा की मौत के बारे में बताया.
राजा की मौत के साथ ही एलिज़ाबेथ महारानी हो गई थीं और इसके बाद वो अपने पति के साथ थोड़ी देर टहलीं और फिर उन्होंने पत्र लिखकर दौरा रद्द करने के लिए माफी मांगी.
उस दिन नैरोबी में तत्कालीन बीबीसी संवाददाता फ्रैंक गिलार्ड ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था, '' यह सोचना कितना दुखद है कि वो लड़की पीली शर्ट और कत्थई मोजे में सुबह नाश्ते के समय बैठकर अपने पिताजी के बारे में बात कर रही थी और ये बता रही थी कि राजा कितनी बहादुरी से अपनी बीमारी से लड़ रहे हैं और ठीक इसी समय वो महारानी बन चुकी थी और उसे इसका पता भी नहीं था.''
ऐसा कहा जाता है कि एलिज़ाबेथ को जब यह खबर पता चली तो उन्होंने बेहद संजीदा रुख अपनाया और किसी ने उनकी आंखों में आंसू नहीं देखे.
हालांकी शाही खानदान का इतिहास लिखने वाले सारा ब्रैडफोर्ड का कहना है कि एलिज़ाबेथ बंद कमरे में रोई ज़रुर होंगी.
साठ साल पहले छह फरवरी के दिन महारानी बनी एलिज़ाबेथ ने कहा है कि इस अवसर पर वो 'एक बार फिर ख़ुद को लोगों की सेवा के लिए समर्पित' कर रही हैं.
इस मौक़े पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा और मुख्य समारोह जून में होगा.
ब्रिटेन की महारानी 85 वर्ष की हो चुकी हैं. आमतौर पर वे इस ख़ास दिन को अपने पिता जॉर्ज पंचम के साथ मनाती थी जिनका वर्ष 1952 में निधन हो गया था.

















