
सीरिया में प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की निंदा करने वाला प्रस्ताव रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो कर दिया है.
इस प्रस्ताव को अरब और पश्चिमी देशों का समर्थन हासिल था.
रूस और चीन परिषद के स्थाई सदस्य हैं. बराक ओबामा द्वारा सीरिया में हिंसा की कड़ी आलोचना के बावजूद रूस-चीन ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया.
रूस के विदेश मंत्री सरगई लैवरॉफ़ ने प्रस्ताव की निंदा करते हुए कहा है कि इसमें केवल सीरियाई राष्ट्रपति असद को निशाना बनाया गया है और हथियाबंद विपक्षी गुटों के ख़िलाफ़ कोई क़दम नहीं उठाया गया है.
रूसी ने मसौदे में जो बदलाव प्रस्तावित किए थे उसे संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत ने अस्वीकार्य करार दिया.
आलोचना
पश्चिमी देशों ने सीरीया सरकार का साथ देने के लिए रूस और चीन की आलोचना की है. अमरीका ने कहा है कि दोनों देशों ने सीरियाई लोगों का सौदा किया है जबकि ब्रिटेन का कहना है कि रूस-चीन ने अरब लोगों को पीठ दिखाई है.
रूस के विदेश मंत्री और ख़ुफ़िया विभाग के प्रमुख मंगलवार को सीरिया के राष्ट्रपति से मिलेंगे.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आए प्रस्ताव के कुछ घंटे पहले ही सीरिया में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि सुरक्षाकर्मियों ने होम्स में कम से कम 55 लोगों को मार दिया है. पहले ये संख्या 200 बताई जा रही थी.
असद विरोधी प्रदर्शनों में शामिल होने वाले शहरों में होम्स ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया है. ये प्रदर्शनकारियों का गढ़ रहा है.
इस बीच ट्यूनीशिया ने असद सरकार के साथ अपने रिश्ते ख़त्म कर दिए हैं.























