
रूस के प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन के विरोध में 50 हज़ार से भी ज़्यादा लोगों ने राजधानी मॉस्को की सड़कों पर रैली निकाली.
दिसंबर में हुए संसदीय चुनाव में घोटाले के आरोपों के बाद रूस में ये तीसरी बड़ी रैली है.
उधर अगले महीने रूस में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में खड़े हो रहे पुतिन के भी समर्थक अलग जगहों पर रैलियां निकाल रहे हैं.
रैली निकालने वाले लोगों को शून्य से 19 डिग्री कम तापमान वाली कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि जमा देने वाली ठंड का प्रदर्शनकारियों के इरादों पर कोई प्रभाव नहीं दिखा.
मॉस्को में मौजूद बीबीसी संवाददाता डेनियल सैंडफ़ोर्ड का कहना है कि इस बार की रैला पिछले बार से छोटी है. आयोजकों का दावा है कि प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या लगभग एक लाख 20 हज़ार रही.
पुतिन को समर्थन की धमकी
"यहां हर कोई अपनी इच्छा से आया है. लेकिन मेरे कुछ दोस्तों को उनके मालिकों की तरफ से धमकी दी गई थी कि वो पुतिन के समर्थन में हो रही रैली में वो भाग ले वर्ना उन्हे निकाल दिया जाएगा."
पुतिन विरोधी प्रदर्शनकारी
पुतिन के खिलाफ़ रैली में शामिल एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ''यहां हर कोई अपनी इच्छा से आया है. हालांकि मेरे कुछ दोस्तों को उनके मालिकों की तरफ से धमकी दी गई थी कि वो पुतिन के समर्थन में हो रही रैलीयों में भाग ले वर्ना उन्हें निकाल दिया जाएगा.''
जानकारों के अनुसार लोगों का सड़कों पर आना ये दिखाता है कि पुतिन के खिलाफ़ अभियान अभी भी जारी है.
शनिवार को रैली निकालने वाले प्रदर्शनकारियों की मांग है कि रूस में फिर से संसदीय चुनाव कराए जाए. प्रदर्शनकारी मार्च में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में भी पुतिन के खिलाफ़ वोट देने के लिए प्रचार कर रहे है.
बीबीसी संवाददाता स्टीव रोसेनबर्ग का कहना है कि पुतिन के खिलाफ़ अभियान के आयोजक पुतिन को राष्ट्रपति चुनाव में जीतने से रोक पाने की तो उम्मीद नहीं कर रहे हैं लेकिन मानते हैं कि दबाव बनाने से रूस में राजनीतिक सुधार लाया जा सकता है.

















