इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो चार फ़रवरी 2010 के रोज़ ही दुनिया की सबसे ऊँची इमारत बुर्ज़ खलीफ़ा का उद्घाटन हुआ था. इसी दिन साल 1998 में उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में आये एक भूकंप में हजारों जानें चली गईं थीं.
2010 : दुनिया की सबसे ऊँची इमारत का उद्घाटन

इस इमारत में इस्तेमाल में लाने योग्य 163 मंजिलें हैं
आज ही के दिन संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में दुनिया की सबसे ऊँची 829.84 मीटर की इमारतका उद्घाटन किया गया था.
इस इमारत का निर्माण 21 सितम्बर 2004 को आरंभ हुआ था. यूं तो इमारत का बाहरी ढांचा अक्टूबर 2009 में बन कर तैयार हो गया था पर इसके अन्दर बाहर का काम पूरा होते होते फ़रवरी 2010 आ गई.
इस इमारत को बनाने में डेढ़ अरब डॉलर का खर्च आया था. इमारत को बनाने वाली कंपनी के प्रमुख का कहना था कि इस इमारत में कार्यालयों के लिए जगह 4000 डॉलर की दर से खरीदी गयी.
इत्तेफ़ाक़न इस इमारत को बनाने की परियोजना के शुरू होते ही दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में आ गई. दुबई की अर्थव्यवस्था क़र्ज़ के भंवर में फंस गई और ऐसे हालात आ गए दुबई को अपने अमीर पड़ोसी अबू धाबी से के अरब डॉलर की आर्थिक सहायता लेनी पड़ी.
अबू धाबी की इसी मदद के चलते इस इमारत का जब उद्घाटन हुआ तो इसका नाम अबू धाबी के शासक खलीफ़ा बिन ज़ायेद अल नाहयान के नाम पर बुर्ज खलीफ़ा कर दिया गया. उद्घाटन के पहले तक इस इमारत को बुर्ज़ दुबई के नाम से संबोधित किया जाता था.
उद्घाटन के बाद दुनिया में आई आर्थिक मंदी के चलते इस इमारत में किराए 40 फ़ीसदी तक कम हो गए इसके अन्दर बने 900 घरों में से करीब 825 उद्घाटन के समय तक खाली थे.
1998 : अफ़ग़ानिस्तान के भूकंप में 4000 मौतें

अफ़गानिस्तान में भूकंप से पीड़ित लोगों को अत्यधिक ठण्ड से दोहरी मार से झेलनी पड़ी
आज ही के दिन उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के ताखर प्रांत में आये एक भूकंप में हजारों लोगों की जानें चली गईं और काफ़ी और बेघरबार हो गए. यह इलाका मध्य एशिया के ताज़िकिस्तान के नज़दीक है.
उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान पर काबिज़ नॉर्दन अलायंस के प्रवक्ता ने बताया कि भूकंप के बाद शुरू किए गए प्रयासों में 3500 शव बरामद किए गए.
काबुल पर काबिज़ तालिबान के मुताबिक इस घटना में 3230 लोग मारे गए. बाद में अंतर्राष्ट्रीय सहायता संस्था मेदसे सॉं फ़ौन्तिये ने पुष्टि की कि भूकंप प्रभावित इलाके में कम से कम 4000 लोग मारे गए और कई गावं तबाह हो गए.
यूरोपीय संघ ने लाखों डॉलर के कम्बल दवाएं और पीने का पानी लोगों को राहत सामग्री के रूप में भेजा.
भूकंप के वक़्त नॉर्दन अलायंस और तालिबान के बीच युद्ध चला रहा था. हालाँकि दोनों पक्षों ने युद्ध विराम की घोषणा की थी लेकिन लड़ाई नहीं रुकी और प्रभावितों को मदद पहुंचाना बहुत ही मुश्किल काम हो गया.

















