'डाओ ओलंपिक का प्रायोजक बना रहेगा'

 शुक्रवार, 27 जनवरी, 2012 को 20:48 IST तक के समाचार
डाओ केमिकल्स

मेरिडिथ एलेक्ज़ेंडर ने गुरुवार को इस्तीफ़ा दे दिया था

लंदन ओलंपिक 2012 के आयोजकों का कहना है कि सस्टेनबिलिटी कमीशन की एक सदस्य के इस्तीफ़े के बावजूद डाओ केमिकल्स इस आयोजन का प्रायोजक बना रहेगा.

'कमीशन फॉर सस्टेनेबल लंदन 2012' की एक सदस्य मेरिडिथ अलेक्ज़ेंडर ने गुरुवार को अपने पद से ये कहते हुए इस्तीफ़ा दे दिया था कि वे भोपाल गैस कांड के लिए ज़िम्मेदार कंपनी यूनियन कार्बाइड और डाओ केमिकल्स के संबंधों से चिंतित हैं.

मेरिडिथ अलेक्ज़ेंडर के इस्तीफ़े के बाद लेबर पार्टी से जुड़े कीथ़ वाज़ और टेस्सा जॉवल ने भी इस बारे में जांच करवाने की मांग की है आख़िर डाओ केमिकल को इस आयोजन का प्रायोजक कैसे बनाया गया?

हालांकि 2012 ओलंपिक्स के मुख्य अधिकारी पॉल डेहटोन ने ज़ोर देकर कहा है कि अलेक्ज़ेंडर के इस्तीफ़े के बावजूद वो डाओ के इस आयोजन से जुड़े रहने के फ़ैसले को नहीं बदलेंगे. डाओ केमिकल्स का अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ से दस करोड़ पाउंड का समझौता है.

मेरिडिथ के निर्णय पर डेहटोन ने कहा, "वो अपना फैसला लेने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं, और हम उनके इस फै़सले का सम्मान करते हैं, लेकिन डाओ को प्रायोजक के तौर पर चुनने की प्रक्रिया में वे भी शामिल थीं. वे इस बारह सदस्यीय टीम की सिर्फ एक सदस्य हैं इसलिए हम अपने फैसले पर क़ायम हैं."

हम इस बात से खुश हैं कि ये स्वतंत्र संस्था काम कर रही है ताकि सबकुछ पारदर्शी तरीक़े से साफ़-सुथरा नज़र आए. ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों का आयोजन करने वाली 'लंदन आयोजन समिति' ने लगातार डाओ को प्रायोजक बनाए जाने का बचाव किया है.

डाओ के खिलाफ़ आवाज़ तेज़

"डाओ केमिकल को इस विवाद की गंभीरता को समझना होगा क्योंकि भोपाल के लोग 1984 में हुए इस त्रासदी का असर आज भी झेल रहे हैं. मैं बिल्कुल नहीं चाहूंगी कि इसका असर ओलंपिक खेलों पर पड़े, हमारे पास अभी भी इसका हल निकालने का पर्याप्त समय है"

टेस्सा जॉवेल, शैडो मिनिस्टर

कीथ वाज़ ने मेरिडिथ के इस्तीफ़े को निडर और सैंद्धातिक फैसला कहा है. वो मानते हैं कि डाओ जैसी कंपनी जिसकी पृष्टभूमि इतनी ख़राब है उसका इस आयोजन से जुड़ना किसी को भी स्वीकार्य नहीं है.

कीथ वाज़ को उम्मीद है कि 2012 लंदन ओलंपिक्स की आयोजन समिति इस बात को समझे कि मेरिडिथ के इस्तीफ़े के बाद डाओ का ओलंपिक्स का प्रायोजक बने रहने सही नहीं है, क्योंकि मेरिडिथ के इस्तीफ़े ने आयोजन समिति की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

टेस्सा जॉवेल कहती हैं,''डाओ केमिकल को इस विवाद की गंभीरता को समझना होगा क्योंकि भोपाल के लोग 1984 में हुए इस त्रासदी का असर आज भी झेल रहे हैं. मैं बिल्कुल नहीं चाहूंगी कि इसका असर ओलंपिक खेलों पर पड़े, हमारे पास अभी भी इसका हल निकालने का पर्याप्त समय है.''

इससे पहले गुरुवार को लंदन में आयोजित होने वाले ओलंपिक खेलों से जुड़े 'कमीशन फॉर सस्टेनेबल लंदन 2012' की एक सदस्य मेरिडिथ अलेक्ज़ेंडर ने इस्तीफ़ा दे दिया था.

अलेक्ज़ेंडर ने आशंका जतायी थी कि कमीशन और लंदन खेलों के आयोजक दोनों ही डाओ केमिकल्स और उसके दावों को वैधानिकता प्रदान कर रहे हैं जिससे वो नाखुश थीं.

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