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'ऐसी अर्थव्यवस्था बने जिसमें सबकी भागीदारी हो'

 बुधवार, 25 जनवरी, 2012 को 08:24 IST तक के समाचार

ओबामा ने अपने भाषण के ज़रिए चुनाव के दौरान अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने राष्ट्र के नाम संदेश में सरकार की उपलब्धियां गिनाई और साफ कर दिया कि वो घरेलू मुद्दों अर्थव्यवस्था, शिक्षा और रोज़गार के मुद्दों पर चुनाव लड़ेंगे.

संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए ओबामा ने इराक, अफ़गानिस्तान और ओसामा बिन लादेन का ज़िक्र किया लेकिन उनका पूरा ध्यान अमरीकी अर्थव्यवस्था पर रहा.

ओबामा का कहना था कि वो ऐसी अर्थव्यवस्था चाहते हैं जिसमें सभी की भागेदारी हो, मेहनत करने वालों को फायदा हो और ज़िम्मेदारी निभाने वालों को मौका मिले.

ओबामा का कहना था, ''हम एक ऐसा देश बना सकते हैं जहां कुछ लोगों के पास बहुत पैसा हो जबकि अधिकतर अमरीकियों के पास कुछ भी नहीं हो.या फिर हम एक ऐसी अर्थव्यवस्था बनाएं जहां सभी को उसका हिस्सा मिले. सब लोग अपने हिस्से का काम करें और सभी लोगों के लिए एक ही नियम हों.''

उन्होंने कहा, ‘‘ यहां बात डेमोक्रेट या रिपब्लिकन मूल्यों की बात नहीं है. बात है अमरीकी मूल्यों की और हमें इन मूल्यों पर आना ही होगा.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ हम जब सत्ता में आए तो हालात बहुत ख़राब थे. मंदी के दौरान नौकरियां गई थीं. हम जब तक नीतियां बनाते और नौकरियां गईं. मैनुफैक्चरिंग सेक्टर की हालत ख़राब थी. आउटसोर्सिंग हो रही थी. हमने इन्हें रोका. नीतियां बनाई. आज जनरल मोटर्स जैसी कंपनियां फिर एक बार दुनिया की नंबर वन ऑटो कंपनी है.’’

समान नियम हों

ओबामा ने साफ किया कि अब किसी भी कंपनी को कोई बेलआउट नहीं दिया जाएगा और हर कंपनी को ये स्पष्ट करना होगा कि वो निवेशकों के पैसे के साथ क्या कर रही है.

राष्ट्रपति का कहना था, '' शेयर मार्केट में कंपनियों के लिए नियम बने हैं. नियम भंग करने वालों के साथ सख्ती से निपटा जा रहा है. मैं ये साफ कर दूं कि अब किसी को कोई बेलआउट नहीं मिलेगा बल्कि ज़िम्मेदारी तय होगी सबकी.''

उन्होंने कहा कि अमरीका की कोई कंपनी अपनी नौकरियां दूसरे देशों में भेजेगी तो भी उसे निर्धारित टैक्स देना पड़ेगा क्योंकि यह अमरीकी अर्थव्यवस्था के लिए ज़रुरी है.

उन्होंने कहा कि मैनुफैक्चरिंग सेक्टर को हरसंभव मदद दी जाएगी लेकिन उन्हें अपनी ज़िम्मेदारी निभानी पड़ेगी.

बराक ओबामा

"हम जब सत्ता में आए तो हालात बहुत ख़राब थे. मंदी के दौरान नौकरियां गई थीं. हम जब तक नीतियां बनाते और नौकरियां गईं. मैनुफैक्चरिंग सेक्टर की हालत ख़राब थी. आउटसोर्सिंग हो रही थी. हमने इन्हें रोका. नीतियां बनाई. आज जनरल मोटर्स जैसी कंपनियां फिर एक बार दुनिया की नंबर वन ऑटो कंपनी है"

उनका कहना था, ‘‘ हम उन कंपनियों को अधिक मदद करेंगे जो अपनी नौकरियां बाहर न भेजता हो आउटसोर्स न करता हो बल्कि उन कंपनियों की मदद करेंगे जो अमरीका में नौकरियां बढ़ाएगा.’’

राष्ट्रपति का कहना था, ‘‘ पुरानी नीतियों का नुकसान हमने देखा है. मंदी देखी है. मैं किसी भी ऐसे प्रयास का जमकर विरोध करुंगा जिससे पुरानी नीतियां फिर से लागू हो जाएं.’’

माना जाता है कि राष्ट्रपति का इशारा रिपब्लिकन पार्टी की तरफ था क्योंकि इस वर्ष राष्ट्रपति पद के लिए फिर से चुनाव होने हैं.

ओबामा का कहना था कि वो अमरीकी उत्पादों के लिए दुनिया भर में बाज़ार खोजेंगे और वो इसके लिए दुनिया के किसी भी कोने में जाने को तैयार हैं.

उन्होंने कहा कि जो कोई भी देश अमरीका के साथ ग़लत तरीके से व्यापार करेगा उस पर नज़र रखी जाएगी. उन्होंने इस संदर्भ में चीन का नाम भी लिया और कहा कि एक व्यवस्था बनाई जाएगी ताकि चीन से आने वाले सामान पर नज़र रखी जाए.

ओबामा के भाषण के दौरान बार बार लोग खड़े हुए और तालियां बजाईं.

ओबामा ने व्यक्ति विशेष के उदाहरण देते हुए कहा कि अमरीका में हर व्यक्ति को नए मौके तलाशने का हक है और इसके लिए उन्हें मदद मिलनी चाहिए. उनका कहना था कि जिन लोगों के पास विशेष किस्म की योग्यता है उन्हें तरह तरह के ट्रेनिंग कार्यक्रमों के जाल से बचाने की भी सख्त ज़रुरत है.

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा का क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस क्षेत्र में पैसा लगाने की आवश्यकता है. उन्होंने हर राज्य में ऐसी व्यवस्था लाने की बात कही ताकि कोई भी छात्र बीच में अपनी स्कूली शिक्षा न छोड़ सके.

उनका कहना था, '' इस कमरे में बैठा हर व्यक्ति किसी न किसी टीचर को ज़रुर याद रखे है क्योंकि शिक्षकों ने हम लोगों का जीवन बदला है. शिक्षकों का बड़ा योगदान है इसलिए हमें शिक्षकों को मदद करनी होगी लेकिन उनको जो सही मायने में बच्चों की मदद कर रहे हैं. ''

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