न्यूयार्क: मंदिर-मस्जिद हमलों में एक गिरफ़्तार

 गुरुवार, 5 जनवरी, 2012 को 08:16 IST तक के समाचार

क्वींस के रहने वाले गायाना मूल के रे लाज़िएर लेंजेंड ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है.

न्यूयार्क में एक मस्जिद और मंदिरों समेत 5 स्थानों पर पेट्रोल बमों से हमले करने के जुर्म में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है.

पुलिस के मुताबिक क्वींस के रहने वाले गायाना मूल के रे लाज़िएर लेंजेंड ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है कि ये हमले उन्होंने ही किए थे.

पहली जनवरी के दिन हमलावर रे लाज़िएर लेंजेंड ने बोतलों में पेट्रोल भरकर उसमें आग लगाने के बाद क्वींस के जमेका इलाके में स्थित अल खुई इसलामिक केंद्र और दो मंदिरों के अलावा एक किराने की दुकान और एक घर पर भी हमला किया था.

पुलिस का कहना है कि मंगलवार को ही इस व्यक्ति को हिरासत में ले लिया गया था. और इसने पूछताछ के दौरान जुर्म कबूल कर लिया था.

अब रे लाज़िएर लेंजेंड पर कुल 5 आरोप लगाए गए हैं जिसमें हेट क्राईम या नस्ल और धर्म के आधार पर हमले का निशाना बनाना भी शामिल है. इसके अलावा हथियार रखना, और आगज़नी के आरोप भी लगाए गए हैं.

पुलिस का कहना है कि उसने दुकान पर इसलिए हमला किया था क्यूंकि कुछ दिन पहले उसे वहां से कुछ चीज़ें चुराते हुए पकड़ा गया और बाहर निकाल दिया गया था.

'आपसी रंजिश'

"हम खुश हैं कि पुलिस ने इतनी जल्दी हमलावर को गिरफ़्तार कर लिया है और अब उसे कानून के मुताबिक सज़ा मिलनी चाहिए. इससे दूसरे लोगों को भी सबक मिलेगा कि इस प्रकार के हमले करके कोई बच नहीं सकता. "

हमलों का निशाना बने इसलामिक केंद्र के इमाम, शेख़ मान अल सहलानी

इसके अलावा उसने हिंदू परिवार के घर पर हमला करने की भी बात मानी और कहा कि वह आपसी रंजिश थी.

और जब उसे गिरफ़तार किया गया तो पुलिस को उसके पास से चोरी की हुई कार और उसमें 5 और वैसी ही बोतलें मिलीं जैसी हमले में प्रयोग की गई थीं.

चार स्थानों पर किए गए इन हमलों में सिर्फ संपत्ति का ही नुक़सान हुआ है औऱ किसी व्यक्ति को चोट नहीं आई थी.

जमेका इलाके में ही स्थित एक घर पर हमला किया गया था जिसमें एक हिंदू परिवार रहता है जो अपने घर में पूजा अर्चना का भी आयोजन करते रहते हैं. लेकिन इस घर की खिड़की से बोतल बम टकराकर बाहर लॉन की घास पर गिर गया था. जिसके कारण कोई क्षति नहीं हुई.

इसके अलावा पास ही में एक अश्वेत इसाई महिला का घर हमले के कारण जल गया. कहा जा रहा है कि इस घर से मिला हुआ एक और घर है जिसमें हिंदू लोग धार्मिक कार्यक्रम किया करते हैं. और गलती से हमलावर ने इसाई महिला के घर पर हमला कर दिया.

शहर के जमेका इलाक़े में एशिया, अफ्रीका और लातिन अमरीका के मूल के लोग रहते हैं. और इलाके के लोगों में इन हमलों से खौफ़ भी पाया जाता है.

हिलसाईड एवेन्यू के पास जिस हिंदू परिवार के घर पर हमला हुआ वह त्रिनिदाद से आकर बसने वाले भारतीय मूल के रमेश महाराज का घर है, वह एक पुजारी हैं. और उन्होंने अपने घर के पिछवाड़े में ही एक छोटा सा मंदिर बना रखा है जिसमें लोग पूजा करने आते हैं.

महाराज कहते हैं, “मैं तो समझता हूं कि हम बहुत भाग्यशाली रहे कि बम फटा नहीं वर्ना बहुत बड़ी त्रासदी हो सकती थी. लेकिन मेरे परिवार वाले अब डर रहे हैं.” उनके पड़ोसी भी इन हमलों से नाराज़ हैं.

"यह केंद्र सभी केलिए खुला रहता है और सबको सेवाएं मुहैय्या की जाती हैं. लेकिन फिर भी यह अजीब बात है कि अगर किसी ने आपको अपने घर में आने नहीं दिया तो क्या आप उसके घर पर बमों से हमला कर देंगे. "

इमाम शेख़ मान अल सहलानी

अफ़्रीकी मूल की जेनी कहती हैं,“मैं तो बहुत खुश हूं कि हमलावर पकड़ा गया. उसे सख्त सज़ा मिलनी चाहिए. हमारा इलाका बड़ा शांतिपूर्ण है और इस प्रकार की हरकत कतई बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए.”

साथ वाले मकान में रहने वाली हेती मूल की मारगरीटा भी अपने हिंदू पड़ोसियों की तारीफ़ करते हुए कहती हैं कि वह लोग अपने काम से काम रखते हैं.

जांच पड़ताल

मारगरीटा कहती हैं,“ हमारे पड़ोसी बड़े शांत और अपने काम से मतलब रखतेहैं और अकसर उनके घर में धार्मिक कार्यक्रम भी होते रहते हैं जिसमें लोग आते जाते रहते हैं. लेकिन कभी किसी पड़ोसी को कोई परेशानी नहीं हुई.”

रमेश महाराज का घर बाहर से बिलकुल मंदिर जैसा नहीं लगता है, लेकिन अब भी पुलिस उसकी निगरानी कर रही है और जांच पड़ताल जारी है.

इन हमलों का निशाना बनने वाले अल खुई इसलामिक केंद्र के इमाम शेख़ मान अल सहलानी ने हमलावर के पकड़े जाने पर इतमिनान का इज़्हार किया. वह कहते हैं,“हम खुश हैं कि पुलिस ने इतनी जल्दी हमलावर को गिरफ़्तार कर लिया है और अब उसे कानून के मुताबिक सज़ा मिलनी चाहिए. इससे दूसरे लोगों को भी सबक मिलेगा कि इस प्रकार के हमले करके कोई बच नहीं सकता.”

शेख़ सहलानी कहते हैं कि उनके केंद्र में बच्चों का एक स्कूल भी चलाया जाता है और उसमें करीब 200 बच्चे पढ़ते हैं. उनका कहना है कि यह हमला एक बहुत बड़ी त्रासदी भी बन सकता था क्यूंकि हमले के समय इमारत में करीब 100 लोग एक शिया धार्मिक कार्यक्रम में भाग ले रहे थे.

'हेट क्राइम'

सन 1989 से अल खुई सेंटर न्यू यॉर्क और उसके आस पास के इलाकों के पाकिस्तानी, भारतीय और अरब मूल के देशों के लोगों के लिए धार्मिक सेवाएं प्रदान करता आ रहा है. और यह पहला मौका है कि इस प्रकार का कोई हमला किया गया है.

पुलिस के मुताबिक हमलावर ने बताया कि उसने इसलामिक केंद्र पर इसलिए हमला किया था क्यूंकि उसे वहां शौचालय का प्रयोग नहीं करने दिया गया था.

लेकिन शेख़ सहलानी कहते हैं कि जो कारण हमलावर ने बयान किया है वह बेतुका और हास्यासपद है. वह कहते हैं कि असल कारण कोई और ही होगा.

रे लाज़िएर लेंजेंड के मुताबिक हिंदू परिवार के घर पर हमला करने की वजह आपसी रंजिश थी.

शेख सहलानी कहते हैं, “यह केंद्र सभी केलिए खुला रहता है और सबको सेवाएं मुहैय्या की जाती हैं. लेकिन फिर भी यह अजीब बात है कि अगर किसी ने आपको अपने घर में आने नहीं दिया तो क्या आप उसके घर पर बमों से हमला कर देंगे.”

अल ख़ुई सेंटर के मुख्य द्वार पर हमले के कारण दरवाज़े में आग लग गई थी और सेंटर को नुक़सान पहुंचा था.

पुलिस अब भी हमलावर रे लेंजेंड पर नस्ली बुनियाद पर हमले करने या 'हेट क्राइम' के कई और भी आरोप लगा सकती है.

मंगलवार को मेयर माइकल ब्लूमबर्ग, पुलिस कमिशनर रेमंड कैली और कई संसद औऱ राज्य की असेंबली के सदस्यों और अन्य नेताओं ने अल खुई सेंटर में एक प्रेस कॉंफ़्रेंस करके इन हमलों की घोर निंदा भी की थी. इसमें इसाई, मुसलिम, यहूदी और हिंदू समेत कई धार्मिक नेताओं ने भी शिरकत की थी.

अब शहर के कई इलाकों में मसजिदों, मंदिरों और गिरजाघर और यहूदी सिनेगॉग पर भी पुलिस का पहरा लगा दिया गया है.

अल खुई सेंटर पर पुलिस की निगरानी के लिए एक बड़ा सा कैमरा भी लगाया गया है और हर समय दो पुलिस के जवान वहां पर पहर दे रहे हैं.

अल सहलानी कहते हैं कि पुलिस की मौजूदगी से केंद्र में आने जाने वाले लोग सुरक्षित महसूस करते हैं.

और उल खुई सेंटर के अल इमान स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की भी सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है.

'मुसलमानों की जासूसी'

एक महिला फरहा हसन जिनके बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते हैं पहले तो चिंतित थीं लेकिन पुलिस की 24 घंटा तैनाती के कारण अब उन्हे भी इत्मिनान है कि उनके बच्चे स्कूल में सुरक्षित रहेंगे.

फ़रहा हसन कहती हैं ,“इस हमले के बाद मैं तो बच्चों की सुरक्षा को लेकर बहुत घबरा गई थी और मैंने तय किया था कि अब मैं बच्चों को खुद ही स्कूल छोड़ने और ले जाने जाया करूंगी. लेकिन अब यहां पुलिस लगातार रहती है तो काफ़ी सुकून हुआ है.”

लेकिन शहर के मुसलमानों को पुलिस विभाग से शिकायतें भी हैं कि शहर में रहने वाले मुसलमानों पर पुलिस खुफ़िया तौर पर निगरानी रखती है. कुछ महीने पहले ही एक अमरीकी समाचार एजेंसी असोसिएटेड प्रेस ने इस बात का खुलासा अपनी रिपोर्टों में किया था कि न्यूयॉर्क के मुसलमानों पर पुलिस खुफ़िया तौर पर निगरानी रखती है और समुदाए के बीच उसने जासूस भी छोड़े हुए हैं जो मस्जिदों और अन्य सार्वजनिक जगहों पर मुसलमानों की जासूसी करते हैं.

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