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ओबामा ने इराक़ युद्ध के अंत का स्वागत किया

 गुरुवार, 15 दिसंबर, 2011 को 09:14 IST तक के समाचार

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इराक़ युद्ध की समाप्ति पर अमरीकी सैनिकों की उपलब्धियों को सराहा है. ओबामा नौ साल पहले शुरु हुए इस युद्ध के ख़िलाफ़ रहे हैं.

नॉर्थ कैरोलिना में फ़ोर्ट ब्रैग में एक भाषण में ओबामा ने उन सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जो इराक़ में तैनात थे और मारे गए और साथ ही उनके परिवारवालों को भी.

अगले कुछ दिनों के अंदर इराक़ से अमरीकी सैनिकों की अंतिम टुकड़ियों को भी वापस बुला लिया जाएगा.

वहीं रिपब्लिकन पार्टी ने इराक़ से सैनिक हटाने के फ़ैसले की आलोचना की है. हालांकि ज़्यादातर लोग इसके पक्ष में हैं.

हज़ारों लोगों की तालियों की बीच ओबामा ने कहा, “आप लोगों के कमांडर इन चीफ़ के तौर पर और एक कृतज्ञ देश की ओर से मैं ये कहते हुए गर्व महसूस कर रहा हूँ- स्वदेश में आपका स्वागत है.”

उन्होंने कहा, “क़रीब 15 लाख अमरीकियों ने इराक़ में अपनी सेवा दी. लगभग 4500 लोग मारे गए और तीस हज़ार घायल हुए. लेकिन ये आँकड़े इराक़ की पूरी कहानी नहीं बयां करते. अमरीकी सैनिकों ने इराक़ में जो कुछ भी किया- लड़ाई, अपनी जान दाँव पर लगाना, ख़ून बहाना, ट्रेनिंग, सहयोग...उस सब के कारण ही सफलता की ये घड़ी आई है.”

इराक़ पर चिंता

ओबामा ने अक्तूबर में घोषणा की थी कि 2011 के अंत तक इराक़ से सारे अमरीकी सैनिक वापस आ जाएँगे. इस तारीख़ पर पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने 2008 में सहमति दी थी.

वर्ष 2007 में अतिरिक्त सैनिक भेजने की नीति के तहत एक समय इराक़ में एक लाख 70 हज़ार सैनिक तैनात थे. पर इस हफ़्ते सैनिकों की संख्या 5500 है.

सैनिकों की इस वापसी को ओबामा अपने चुनावी वादे को पूरा करने के तौर पर पेश कर रहे हैं. उनके राष्ट्रपति बनने के अभियान में इराक़ युद्ध का विरोध एक अहम मुद्दा था जिसे काफ़ी जनसमर्थन मिला था.

इराक़ युद्ध की शुरुआत 2003 में बुश प्रशासन ने की थी. लेकिन बाद में ये दावे झूठे साबित हुए कि सद्दान हुसैन के पास विनाशकारी हथियार हैं और वे अल क़ायदा को समर्थन दे रहे हैं. इसके बाद इराक़ युद्ध अमरीकी जनता के बीच काफ़ी अलोकप्रिय हो गया.

हालांकि ओबामा ने माना है कि इराक़ से सैनिक बुलाने के बाद स्थिति पूरी तरह से ठीक नहीं है लेकिन ये भी कहा कि सैनिक एक संप्रभुता वाला और आत्मनिर्भर इराक़ छोड़ कर जा रहे हैं जहाँ लोगों की चुनी सरकार है.

वादा

अमरीकी राष्ट्रपति ने इस बात का आश्वासन भी दिया है कि युद्ध में लड़ चुके सैनिकों को नौकरियाँ और संसाधन मुहैया करवाएँगे.

पूर्व सैनिकों में बेरोज़गारी दर पिछले एक दशक में काफ़ी ज़्यादा रही है.

इराक़ से अमरीकी सैनिकों को वापस बुलाने के बाद आशंका जताई जा रही है कि वहाँ फिर से जातीय हिंसा हो सकती है या ईरान का उस पर प्रभाव बढ़ सकता है.

अमरीका में भी ये चिंता है कि इराक़ में मज़बूत राजनीतिक ढाँचा नहीं है और न ही अपनी सीमाओं की रक्षा करने की क्षमता है.

बावजूद इसके प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वेक्षण के मुताबिक 75 फ़ीसदी अमरीकी सैनिक बुलाने के फ़ैसले का समर्थन करते हैं.

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