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केवल महिलाओं के लिए टैक्सी

 मंगलवार, 29 नवंबर, 2011 को 15:20 IST तक के समाचार
मलेशिया में महिलाएं

मलेशिया में इससे पहले ट्रेनों में गुलाबी रंग के के डब्बे और बसें भी चलाई गईं थीं

भारत में केवल महिलाओं के लिए चलने वाली बसों और ट्रेनों की तर्ज़ पर अब मलेशिया ने केवल महिलाओं के लिए टैक्सियाँ शुरु की हैं.

अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने के लिए यह किया गया है.

महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मलेशिया में इससे पहले ट्रेनों में गुलाबी रंग के डिब्बे लगाए गए थे और बसें भी चलाई गई थीं.

भारत में भी इसी तरह 'केवल महिलाओं के लिए' ट्रेनें और बसें चलाई गई हैं. दिल्ली के मेट्रो ट्रेन में महिलाओं के एक लिए एक डब्बा आरक्षित कर दिया गया है.

उत्पीड़न से बचाने के लिए

मलेशिया की सरकार का कहना है कि वहां हर रोज़ कम से कम दस महिलाएं उत्पीड़न, बलात्कार और इसी तरह की हिंसक घटनाओं का शिकार होती हैं.

इसलिए उसने टैक्सी चलाने वाली कंपनियों से महिला चालकों को उपयोग में लाने को कहा है ताकि महिलाएँ रात को टैक्सी का इस्तेमाल करते समय महफूज़ महसूस कर सकें.

मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में फिलहाल 'केवल महिलाओं के लिए' 50 टैक्सियाँ उपलब्ध हैं जिनकी संख्या को बढ़ा कर 400 किए जाने की संभावना है.

दिल्ली में चलने वाली मेट्रो ट्रेनों का पहला डब्बा महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया है और ऐसा करने के पीछे भी यही सोच है कि महिलाएँ सुरक्षित महसूस कर सकें.

मेट्रो के प्रवक्ता अनुज दयाल ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''अब महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं. पहले महिलाओं से बदतमीज़ी और छेड़छाड़ की काफी शिकायतें आती थीं लेकिन अब यह ना के बराबर हैं. अलग डब्बे का प्रयोग सफल रहा है.''

भारत भी पीछे नहीं

"ऐसा माहौल बनाना जरूरी है कि महिलाएं सुरक्षित रहें. चूंकि हम ऐसा करने में नाकाम रहे हैं, यह एक अस्थायी समाधान हो सकता है. आखिरकार आप महिलाओं को घर पर तो नहीं बिठा सकते"

पैम राजपूत, महिला अधिकार कार्यकर्ता

भारत में भी महिलाओं के उत्पीड़न की घटनाएँ कम होने का नाम नहीं ले रही हैं.

राष्ट्रीय आपराधिक रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक़ अन्य सभी अपराधों, जैसे हत्या, डकैती, अपहरण और दंगों के मुक़ाबले भारत में बलात्कार की घटनाओं में सबसे ज़्यादा बढ़ोत्तरी हुई है.

वर्ष 1971 में ढाई हज़ार से भी कम बलात्कार के मामले दर्ज हुए थे जबकि वर्ष 2010 में ये आंकड़ा बढ़कर 22,000 से भी ज़्यादा हो गया.

वर्ष 2010 में अकेले राजधानी दिल्ली में बलात्कार के 414 मामले दर्ज किए गए.

सवाल

मलेशिया में कुछ कार्यकर्ता इस क़दम को गलत मानते हैं. उनका कहना है कि इस मुस्लिम बहुसंख्यक देश में सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं को पुरुषों से अलग रखना एक ग़लत उदाहरण पेश कर सकता है.

मलेशिया में मुस्लिम महिला और पुरूष एक साथ घुलते मिलते हैं. केवल मस्जिदों में वह अलग अलग प्रार्थना करते हैं.

वूमैन एड ऑरगनाइज़ेशन की आइवी जोसिआ ने कहा कि उन्हें डर है कि इस तरह का लिंग अलगाव सार्वजनिक जीवन के हर क्षेत्र में होने लगेगा.

कुछ लोगों को आशंका है कि जो महिलाएं केवल महिलाओं वाली टैक्सियों का इस्तेमाल न कर दूसरी टैक्सियों मे सवारी करेंगी उन्हें अपने साथ हुए शोषण के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा.

लंबे समय से भारत में महिला अधिकारों के लिए काम करती आईं पैम राजपूत का कहना है कि इस तरह के फ़ैसले समस्या का समाधान नहीं हैं.

उन्होंने कहा, ''ऐसा माहौल बनाना जरूरी है कि महिलाएं सुरक्षित रहें. चूंकि हम ऐसा करने में नाकाम रहे हैं, यह एक अस्थायी समाधान हो सकता है. आखिरकार आप महिलाओं को घर पर तो नहीं बिठा सकते.''

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