अफ़्सपा हटाने पर ना सुनना मंज़ूर नहीं: उमर

 गुरुवार, 10 नवंबर, 2011 को 17:08 IST तक के समाचार
उमर अब्दुल्लाह (फ़ाईल फ़ोटो)

उमर अब्दुल्लाह ने साफ़ कहा है कि वो इस मामले में अपने फ़ैसले पर क़ायम हैं.

जम्मु-कश्मीर राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा है कि सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून(अफ़्सपा) को राज्य के कुछ इलाक़ों से हटाने के बारे में उन्हें ना सुनना मंज़ूर नहीं.

गुरूवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने ये बातें कही.

ग़ौरतलब है कि बुधवार को इस मुद्दे पर उमर अब्दुल्लाह की अध्यक्षता में एकीकृत कमांड की बैठक हुई थी, जिसमें सेना और राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया था.

उसी बैठक के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि मेरा मानना है कि एकीकृत कमांड की बैठक के दौरान हुई बातचीत को गुप्त रखा जाना चाहिए था लेकिन दुर्भाग्यवश आप सभी लोगों को इस बात की जानकारी है कि उस बैठक में क्या बातें हुई.

'अंतिम फ़ैसले का अधिकार'

उमर ने आगे कहा, ''हां ये बात सही है कि बुधवार की बैठक में मैने सेना के अधिकारियों से साफ़ कहा था कि अफ़्सपा को हटाने के बारे में ना सुनने के लिए मैं तैयार नहीं हूं. आप मुझे इसके अलावा कोई सुझाव दें जिस पर अमल करना संभव हो.''

'ना मंज़ूर नहीं'

"हां ये बात सही है कि बुधवार की बैठक में मैने सेना के अधिकारियों से साफ़ कहा था कि एएफ़एसपीए को हटाने के बारे में नहीं सुनने के लिए मैं तैयार नहीं हूं. आप मुझे इसके अलावा कोई सुझाव दें जिस पर अमल करना संभव हो."

उमर अब्दुल्लाह, जम्मु-कश्मीर के मुख्यमंत्री

ये पूछे जाने पर कि अफ़्सपा को हटाने के बारे में अंतिम फ़ैसला करने का अधिकार किसके पास है, उमर अब्दुल्लाह का कहना था, ''इस मामले में राज्य सरकार के पास पूरा अधिकार है. राज्यपाल साहब राज्य सरकार की सिफ़ारिश पर अंतिम फ़ैसला करेंगे.''

उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति के फ़ैसले और केंद्रीय गृह मंत्री के हाल में दिए गए बयान से भी उनकी राय को बल मिलता है.

इस मामले में सेना के ज़रिए उठाए गए कथित सवाल के बारे में उन्होंने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि इस मामले में सेना या किसी और की ये राय होगी कि अफ़्सपा को हटाने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है.''

राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी पीडीपी ने उमर अब्दुल्लाह के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उमर अब्दुल्लाह की बयानबाज़ी से किसी का कोई भला नहीं होगा.

पार्टी के नेता नईम अख़्तर ने एक समाचार चैनल से बात करते हुए कहा, ''पीडीपी हमेशा से इस क़ानून को हटाने के पक्ष में रही है. लेकिन उमर अब्दुल्लाह जिस तरह से सेना के बारे में सार्वजनिक बयान दे रहें हैं उससे किसी का कोई फ़ायदा नहीं होगा. अगर वो इस क़ानून को हटाना चाहते हैं तो वो उसे फ़ौरन हटा सकते हैं, उन्हें किसी से इजाज़त लेने की ज़रूरत नहीं है.''

पीडीपी नेता के अनुसार उमर अब्दुल्लाह अपनी सरकार की नाकामियों को छुपाने के लिए इसके ज़रिए लोगों का ध्यान बँटाना चाहते हैं.

'बयानबाज़ी ठीक नहीं'

"पीडीपी हमेशा से इस क़ानून को ह़टाने के पक्ष में रही है. लेकिन उमर अब्दुल्लाह जिस तरह से सेना के बारे में सार्वजनिक बयान दे रहें हैं उससे किसी का कोई फ़ायदा नहीं होगा. अगर वो इस क़ानून को हटाना चाहते हैं तो वो उसे फ़ौरन हटा सकते हैं, उन्हें किसी से इजाज़त लेने की ज़रूरत नहीं है."

नईम अख़्तर, पीडीपी नेता

बुधवार को हुई बैठक के बारे में और जानकारी देते हुए उमर ने कहा कि सेना इस मामले में उनसे कुछ और विचार विमर्श करना चाहती थी लेकिन उन्होंने कह दिया कि इस मामले में पहले से दो समितियां गठित हैं और उनके सिफ़ारिश जानने के बाद ही वे सेना से कोई बातचीत करना चाहेंगे.

लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी दोहराया कि अलग-अलग अवसर पर वो सेना से इस बारे में बातचीत करते रहेंगे.

लेकिन एक साल पहले गठित समितियों ने अब तक अपनी रिपोर्ट क्यों नहीं तैयार की, इस सवाल के पूछे जाने पर उमर ने कहा कि उन्होंने अपनी नाराज़गी जता दी है.

घाटी के कुछ इलाक़ों से अफ़्सपा को कब तक हटा लिया जाएगा, ये पूछे जाने पर उमर का कहना था कि ये जितनी जल्दी हो उतना बेहतर है. सर्दियों का मौसम शुरू होने वाला है और आम तौर पर इस दौरान चरमपंथी गतिविधियों में कमी आती है. इससे अभी कुछ इलाक़ों से अफ़्सपा को हटाना बेहतर रहेगा.

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