चीन को भारत का जवाब: पीछे नहीं हटेंगें

 मंगलवार, 20 सितंबर, 2011 को 13:02 IST तक के समाचार

24 से 26 सितंबर को चीन और भारत के बीच कूटनीतिक व आर्थक बातचीत होगी.

दक्षिण चीन सागर में भारतीय कंपनियों द्वारा हो रही तेल की खोज पर चीन की चेतावनी के जवाब में भारत ने कहा है कि पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता.

चीन ने पिछले हफ़्ते अप्रत्यक्ष रूप से भारत को चेतावनी दी थी कि वो दक्षिण चीन सागर से दूर रहे और उसी चेतावनी को दोहराते हुए चीन ने कड़े शब्दों में कहा है कि ऐसा करना चीन की प्रभुसत्ता का उल्लंघन है.

"अपने अधिकारों और हितों को लेकर भारत का रूख़ साफ़ है. हम अपने हितों की मज़बूत रूप से रक्षा करेंगें. तो ऐसे में पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता. लेकिन हमें इस बात को स्वीकार करना चाहिए कि चीन के साथ भारत की आर्थिक सहभागिता काफ़ी महत्तवपूर्ण है."

पल्लम राजू, भारत के रक्षा राज्य मंत्री

दरअसल भारतीय तेल कंपनी ‘ओएनजीसी विदेश’ ने दक्षिण चीन सागर के वियतनामी ब्लॉक में तेल की खोज के लिए वियतनामी कंपनियों के साथ एक करार किया है.

दक्षिण चीन सागर को भारी मात्रा में तेल और गैस का गढ़ कहा जाता है और इसमें मौजूद द्वीपों को लेकर चीन और वियतनाम के बीच तनाव रहता है और विवाद बना हुआ है.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग ली ने कहा, “दक्षिण सागर के द्वीपों पर चीन का स्पष्ट रूप से अधिकार बनता है और ये दावा ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है. अगर कोई दूसरा देश इस क्षेत्र में चीन सरकार की इजाज़त के बग़ैर तेल और गैस की खोज से जुड़ी गतिविधी करेगा, तो वो चीन की प्रभुसत्ता का उल्लंघन होगा. इसलिए ऐसा करना अवैध और अमान्य होगा.”

इसके अलावा होंग ली ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दूसरे देश चीन के मत और उसके अधिकारों को ध्यान में रखेंगें ताकि विवाद ज़्यादा न बढ़े.

इस वक्तव्य पर प्रतिक्रिया करते हुए भारत के रक्षा राज्य मंत्री एमएम पल्लम राजू ने कहा कि चीन को भारत के साथ द्वीपक्षीय संबंधों पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए.

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं इस बारे में ज़्यादा नहीं बोलूंगा. मैं बस इतना कहूंगा कि हर देश अपने अधिकारों को बल देने की कोशिश करता है और चीन भी यही कर रहा है. लेकिन अपने अधिकारों और हितों को लेकर भारत का रूख़ साफ़ है. हम अपने हितों की मज़बूत रूप से रक्षा करेंगें. तो ऐसे में पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता. लेकिन हमें इस बात को स्वीकार करना चाहिए कि चीन के साथ भारत की आर्थिक सहभागिता काफ़ी महत्तवपूर्ण है.”

ऐसी भी ख़बरें हैं कि भारत की ओर से दक्षिण चीन सागर में तेल की खोज जारी रखने के बाद चीन ने हिंद महासागर में सक्रियता बढ़ाने की बात कही है.

चीन का कहना है कि वो हिंद महासागर के दक्षिण पश्चिम में दस हजार किलोमीटर तक अपनी खनन गतिविधियों का विस्तार करेगा.

ग़ौरतलब है कि आगामी 24 से 26 सितंबर तक चीन और भारत के बीच कूटनीतिक व आर्थक वार्ता होगी और चीन जाने वाली भारतीय टीम की अगुवाई प्लानिंग कमिशन के उपाध्यक्ष मोनटेक आहलुवालिया करेंगें.

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