उड़ान के प्रति लगाव ख़त्म कर दिया

 गुरुवार, 8 सितंबर, 2011 को 18:33 IST तक के समाचार

11 सितंबर 2001 को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर अलक़ायदा ने हमले किए थे

अफ़्रीकी पत्रकारों के विचारों की श्रृंखला में घाना की लेखिका एलिज़ाबेथ ओहेन एक दशक पहले अमरीका पर हुए अलक़ायदा के हमले के बाद हवाई अड्डों पर मज़बूत की गई सुरक्षा व्यवस्था पर दुख व्यक्त कर रही हैं. पढ़िए उनकी दास्तां.


मैं अपने हैंडबैग में हमेशा स्विस सेना का एक चाकू रखा करती थी और उसके बिना कहीं नहीं जाती थी. लेकिन अब मेरे पास एक भी वैसा चाकू नहीं है क्योंकि आप उसे विमान में नहीं ले जा सकते.

न्यूयॉर्क पर 11 सितंबर 2011 के हमलों के बाद मुझे कई बदलावों का सामना करना पड़ा, लेकिन अपनी इस आदत को छोड़ते हुए मुझे बहुत तकलीफ़ हुई.

11 सितंबर के भयानक और त्रासद हमले की 10वीं बरसी मनाई जानेवाली है, तो ऐसे में मैं अपने जीवन में लाए जाने वाले बदलावों की सूची तैयार कर रही हूं क्योंकि विमान अब महाविनाश के हथियार जैसे हो गए हैं.

हमले के बाद

आज मैं उन हज़ारों लोगों के बारे में भी सोचती हूं, जो इस चरमपंथी हमले के बाद हुई घटनाओं में मारे गए.

इस हमले में जो 3,000 लोग मारे गए, उनके परिजनों के लिए 11 सितंबर की तारीख़ हमेशा एक व्यक्तिगत क्षति और वेदना का विषय बनी रहेगी.

उस हमले के बाद अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान और इराक़ में जो लड़ाइयां छिड़ीं, उनके नतीजे मौत और विनाश के रूप में ही सामने आए.

आज मैं उन युवा सैनिकों के बारे में सोचती हूं जो इन लड़ाइयों में मारे गए. लेकिन फ़िलहाल मैं चर्चा कर रही हूं उन बदलावों की जो मेरी ज़िदगी में आए.

मैं विमान का सफ़र और हवाई अड्डे पसंद करती थी. लेकिन अब मुझे सफ़र से डर लगता है और हवाई अड्डों को देखकर दुखी हो जाती हूं.

किसी देश की यात्रा के लिए वीज़ा हासिल करना कभी भी बहुत आसान काम नहीं था, लेकिन 9/11 के बाद ये अत्यधिक समय लेने वाला और अपमानजनक काम बन गया.

अब मुझे वीज़ा के दफ़्तर में अपने दादा-दादी के धार्मिक विश्वास संबंधी सवालों के जवाब देने पड़ते हैं. लेकिन हक़ीक़त ये है कि जब मैं पैदा हुई तो केवल मेरी दादी ज़िंदा थी और वो भी मेरे 15 साल का होने से ही चल बसीं.

मुझे वो समय भी याद आता है, जब ज़रूरत पड़ने पर कुछ ही घंटों में कहीं जाने की तैयारी की जा सकती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है.

आज अगर आप घाना के पासपोर्ट पर अमरीका जाने का वीज़ा लेने जाएं, तो ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने में ही आपका साल निकल जाएगा.

शारीरिक जांच

एयरपोर्ट पर कड़ी सुरक्षा जांच की वजह से पहले वाली बात नहीं रही

एयरपोर्ट अब मौज-मस्ती की जगह नहीं रह गए हैं. अधिकारी आपके सामान और आपकी बारीक़ी से जांच करते हैं. यहां तक कि आपके अंतर्वस्त्रों की भी जांच की जाती है और सांस रोके प्रार्थना करते रहते हैं कि कहीं कुछ निकल न आए.

सालों तक मैं यही सोचती थी कि केवल अपराधियों के उंगलियों के निशान ही लिए जाते हैं, लेकिन आज स्थिति ये है कि मेरी दसों उंगलियों के निशान लिए जा चुके हैं, ताकि मैं यात्रा कर सकूं.

एक बार जब मुझे एयरपोर्ट पर एक्स-रे मशीन से गुज़ारा जा रहा था, तो अलार्म बज उठा. उसके बाद मुझे पूरे ज़ेवर उतारने पड़े और शरीर की बारीक़ी से जांच करवानी पड़ी. इस पूरी क़वायद से मुझे बहुत परेशानी हुई.

अभी हाल ही में न्यूयॉर्क के जेएफ़के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर एक बेहद उत्साही महिला अधिकारी की वजह से मुझे बहुत तक़लीफ़ उठानी पड़ी.

मेरे स्तन का आकार सामान्य से थोड़ा ज़्यादा है और इसी वजह से उस अधिकारी के मन में शंका पैदा हुई, उन्हें लगा कि कुछ गड़बड़ है.

कई बार मुझसे बेल्ट उतारने को भी कहा गया और इस प्रक्रिया में मैंने अपनी दो बेल्ट एयरपोर्ट पर खो दी. उसके बाद से यात्रा के दौरान मैंने बेल्ट पहनना ही छोड़ दिया.

कई सालों से एयरपोर्ट अधिकारियों के साथ मेरी बकझक हो जाती है. उन्हें लगता है कि मेरे पासपोर्ट पर जो तस्वीर है वो मुझसे नहीं मिलती. लेकिन सितंबर के हमलों से पहले ऐसा नहीं था.

एक उम्र की महिलाएं पहले अपनी तरह-तरह की क्रीम और लोशन के साथ यात्रा किया करती थीं लेकिन अब क्रीम को कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है.

11 सितंबर के हमले के बाद दुनिया वाक़ई बदल गई है, लेकिन जो बदलाव आए हैं उन्हें मैं क़तई पसंद नहीं करती.

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