मोटापा: अमरीका की राह पर है चीन

चीन में मोटापे का शिकार व्यक्ति

पिछले कुछ दशकों में चीन की विकास दर तेज़ी से बढ़ी है और इसी अनुपात में बढ़ी है चीन में मोटापे के शिकार लोगों की संख्या.

इस संबंध में चीन और अमरीका के आंकड़ों की तुलना की जाए तो चीन में मोटापे की समस्या अभी उतनी गंभीर नहीं जितनी अमरीका में है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक चीन में 2010 में 15 और उससे ऊपर की उम्र वाले 38.5 फीसदी लोग मोटापे का शिकार थे. चीन के मुकाबले अमरीका में 15 और उससे ऊपर की उम्र वाले 74 फीसदी वयस्क 'मोटे लोगों' की श्रेणी में आते हैं.

इस बात के कोई सबूत नहीं मिलते कि हमने अमरीकियों से कोई सबक लिया है. चीनी लोगों ने गरीबी का एक लंबा दौर देखा है और अब, जब उनकी जेब में कुछ पैसा आया है तो वो उसका पूरा लुत्फ़ उठाना चाहते हैं. चीनी लोग अमरीकियों की तरह जीना चाहते हैं.

प्रोफेसर चेन ज़ुन्शी, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ, चीन

हालांकि चीन में जिस तेज़ी से मोटापे के शिकार लोगों की संख्या बढ़ रही वो चौंकाने वाला है. इस मामले में चीन तेज़ी से अमरीका की राह पर है.

विश्व बैंक के मुताबिक साल 2009 में चीन में सकल घरेलु उत्पाद 4.99 खरब डॉलर रहा जो 2005 के 2.57 खरब डॉलर के आंकड़े से 181 फीसदी ज़्यादा था. लेकिन चीन में मोटापे के शिकार लोगों की संख्या और भी तेज़ी से बढ़ रही है.

साल 2005 के मुकाबले पांच गुना बढ़कर चीन में आज मोटे लोगों की संख्या लगभग दस करोड़ तक पहुंच गई है. 2005 में ये आंकड़ा एक करोड़ 80 लाख था.

मोटापे का एक लंबा इतिहास

चीन के एक जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ और चाईनीज़ अकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के सदस्य प्रोफेसर चेन ज़ुन्शी के मुताबिक, ''अमरीकियों ने हमें एक सबक सिखाया और हमारे लिए एक उदाहरण पेश किया, लेकिन अफसोल ये है कि हम अब भी अमरीकियों के अपनाए पुराने रास्ते पर ही चल रहे हैं.''

प्रोफेसर ज़ुन्शी कहते हैं, ''इस बात के कोई सबूत नहीं मिलते कि हमने अमरीकियों से कोई सबक लिया है. चीनी लोगों ने गरीबी का एक लंबा दौर देखा है और अब, जब उनकी जेब में कुछ पैसा आया है तो वो उसका पूरा लुत्फ़ उठाना चाहते हैं. चीनी लोग अमरीकियों की तरह जीना चाहते हैं.''

प्रोफेसर ज़ुन्शी की मानें तो बहुत से चीनी लोग अब ‘ईटिंग विदाउट मूविंग’ यानि बिना ऊर्जा खपाए खाते जाने के फलसफे पर जी रहे हैं.

पर्यावरण संरक्षण को लेकर चीन में कहा जाता है, ‘पहले विकास करो फिर समस्या से निपटो’. मुमकिन है मोटापे की समस्या को लेकर भी चीन इसी रास्ते पर चल रहा है.

प्रोफेसर चेन ज़ुन्शी, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ, चीन

इस समस्या से निपटने के लिए बेहद ज़रूरी है कि चीन में वज़न पर नियंत्रण का माहौल बने. जबकि चीन के लोग फिलहाल इसके लिए गंभीर नहीं दिखते.

अमरीका सहित कई विकसित देशों में मोटापे का एक लंबा इतिहास रहा है. हालांकि इन देशों में अब नियमित व्यायाम, वज़न कम करने और स्वस्थ जीवन शैली के प्रति जागरुकता को बढ़ावा दिया जा रहा है.

विकसित पश्चिमी देशों में मोटापे की समस्या अपने चरम पर पहुंच चुकी है यहां कि अमरीका में अब प्रति व्यक्ति औसत वज़न का स्तर बढ़ने की ओर नहीं बल्कि घटने की ओर है.

प्रोफेसर ज़ुन्शी कहते हैं कि चीन इस मामले में भी शायद अमरीका की राह चलेगा.

चीन में प्रचलित एक कहावत का उदाहरण देते हुए प्रोफेसर ज़ुन्शी कहते हैं कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर चीन में कहा जाता है, ‘पहले विकास करो फिर समस्या से निपटो’. मुमकिन है मोटापे की समस्या को लेकर भी चीन इसी रास्ते पर चल रहा है.

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