ज़िम्बाब्वे में यातना शिविर का पता चला

मरांज में दुनिया के 20 फ़ीसदी हीरे का भंडार है

बीबीसी की एक जांच से इस बात के सबूत मिले हैं कि ज़िम्बाब्वे में मरांज की हीरे की खदानों के नज़दीक सुरक्षा बल यातना शिविर चला रहे हैं.

इस यातना शिविर में उत्पीड़न के शिकार लोगों ने बीबीसी को बताया है कि क़ैदियों को वहां नियमित रूप से पीटा जाता है और महिलाओं के साथ बलात्कार किया जाता है, यहां तक कि कुछ लोगों को कुत्तों से कटवाया जाता है.

हालांकि बीबीसी से बात करनेवाले लोगों ने ये बातें उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं किए जाने की शर्त पर बताई हैं.

ये तथ्य ऐसे समय प्रकाश में आए हैं, जब यूरोपीय संघ मरांज के हीरों की अंतरराष्ट्रीय बिक्री पर लगे प्रतिबंध को आंशिक तौर पर हटाने का प्रयास कर रहा है.

यातना शिविर

क़ैदियों की यातना का प्रमुख शिविर 'ज़ेंगेनी' मरांज क्षेत्र में ही स्थित है जबकि पास में ही एक और शिविर भी चलाया जा रहा है.

हाल के महीनों में रिहा किए गए क़ैदियों का कहना है कि शिविर में उन्हें एक ही दिन में कई बार पीटा जाता था और कई बार तो तलवों पर प्रहार किया जाता था.

उन्होंने ये भी बताया कि शिविर में रहनेवाली महिलाओं के साथ नियमित रूप से बलात्कार किया जाता है, खाना सीमित होता है और कई क़ैदियों को जब रिहा किया जाता है तो उनकी हालत इतनी ख़राब होती है कि वो चल भी नहीं पाते.

यातना शिविर में रहे एक व्यक्ति ने जो अपने हाथ का इस्तेमाल नहीं कर पाता और चलने में भी असमर्थ है, उसने बीबीसी को बताया,''वे सुबह, दोपहर और शाम में हमें 40-40 चाबुक लगाते थे.''

दो चश्मदीदों ने बीबीसी को बताया कि शिविर में या ग़िरफ़्तारी के वक़्त क़ैदियों को कुत्तों से कटवाया जाता है. शिविर में रखे गए क़ैदी वैसे लोग होते हैं जिन्हें ग़ैर-क़ानूनी रूप से हीरे निकालते हुए पकड़ा जाता है.

हीरे निकलवाने का काम दरअसल वहां की पुलिस और सैनिक नियमित रूप से करते हैं. चश्मदीदों का कहना है कि मरांज में ऐसे यातना शिविर कम से कम तीन साल से चल रहे हैं. हालांकि बीबीसी के आरोपों पर ज़िम्बाब्वे की सरकार ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है.

हीरे की बिक्री पर प्रतिबंध

वे सुबह, दोपहर और शाम में हमें 40-40 चाबुक लगाते थे

यातना शिविर में रहे एक व्यक्ति

बीबीसी को एक ऐसे दस्तावेज़ की जानकारी मिली है जिससे पता चलता है कि यूरोपीय संघ मरांज के हीरों की अंतरराष्ट्रीय बिक्री पर लगे प्रतिबंध को आंशिक तौर पर हटाने की कोशिश कर रहा है.

यूरोपीय संघ चाहता है कि मरांज के खदानों में मानव अधिकारों की निगरानी रखी जानी चाहिए. पहली बार मरांज के हीरों की अंतरराष्ट्रीय बिक्री पर ऐसा प्रतिबंध किंबरले प्रोसेस ने 2009 में लगाया था.

किंबरले प्रोसेस ने मरांज के हीरे की खदानों पर ये प्रतिबंध ज़िम्बाब्वे के सुरक्षा बलों द्वारा बड़े पैमाने पर हत्या और यातना दिए जाने की रिपोर्ट मिलने के बाद लगाया था.

दुनिया भर में हीरों पर निगरानी रखने का काम करने वाले किंबरले प्रोसेस का मानना है कि प्रतिबंध के बावजूद इसका ठीक से पालन नहीं किया जा रहा है.

केपी के चेयरमैन के मुताबिक़ मरांज के हीरों की बिक्री पर 2009 में जो प्रतिबंध लगाया गया था उसमें पहले ही आंशिक ढील बरती जा रही है.

BBC navigation

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.