इस साल के छह महीने सबसे घातक

अफ़ग़ानिस्तान

अफ़ग़ानिस्तान में सड़क किनारे रखे बमों से कई लोग मारे गए हैं.

इस साल के शुरुआती छह महीने अफ़ग़ानिस्तान के आम नागरिकों के लिए सबसे ज़्यादा घातक रहे.

जनवरी से जून तक 1,462 आम नागरिक मारे गए, जबकि पिछले साल इन्हीं छह महीनों के दौरान मरने वालों की संख्या 15 प्रतिशत कम थी.

ज़्यादातर लोग सड़कों पर रखे गए बमों के कारण मारे गए. सरकार की कार्रवाई में मरने वालों की संख्या में नौ प्रतिशत की कमी आई है लेकिन नेटो या विदेशी सेनाओं के हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़ गई है.

ये नतीजे संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में प्रकाशित किए गए हैं. कुछ ही दिनों में नेटो सेनाएँ कुछ राज्यों में सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अफ़ग़ान बलों को सौंपने वाली हैं.

नेटो हमले

हामिद करज़ई

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने नेटो हमलों की निंदा की है.

नेटो के हवाई हमले में बुधवार की रात को ख़ोस्त प्रांत में कम से कम छह लोग मारे गए. स्थानीय लोगों का कहना है कि मरने वाले सभी आम लोग थे जबकि नेटो का दावा है कि वो विद्रोही थे.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में 80 प्रतिशत मौतों के लिए तालिबान और दूसरे सरकार-विरोधी संगठनों को ज़िम्मेदार ठहराया गया है.

इसके साथ ही आत्मघाती हमलों में मारे जाने वाले लोगों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हुई है.

रिपोर्ट में ख़बरदार किया गया है कि आत्मघाती हमलों की संख्या में भले ही बढ़ोत्तरी न हुई हो, उनमें मारे जाने वाले लोगों की संख्या में 53 फ़ीसदी बढ़ोत्तरी हुई है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इस तरह के हमले दिनों दिन जटिल होते जा रहे हैं. कई बार एक साथ कई आत्मघाती हमलावर हमला बोल देते हैं जिनसे सब व्यवस्था चकनाचूर हो जाती है.

नागरिक असंतोष

नेटो सैनिक

नेटो सैनिक जल्द ही कई प्रांतों में अफ़ग़ान सुरक्षा बलों को ज़िम्मेदारी सौंपेंगे.

रिपोर्ट में कहा गया है, “हिंसा में बढ़ोत्तरी इस कारण हुई है क्योंकि विद्रोही ये साबित करना चाहते हैं कि अफ़ग़ान बल सुरक्षा की ज़िम्मेदारी लेने क़ाबिल नहीं हैं.”

नेटो के हवाई हमलों में 79 अफ़ग़ान नागरिक इस साल के शुरुआती छह महीनों में मारे गए हैं.

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस तरह के हमलों में आम नागरिकों की मौत से लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई बार बार कह चुके हैं कि नेटो के हवाई हमलों में आम नागरिकों की मौत से असंतोष बढ़ता है और लोगों में विद्रोहियों के प्रति सहानुभूति बढ़ने लगती है.

संयुक्त राष्ट्र की एक अधिकारी कैयरन डॉयल ने बीबीसी को बताया है कि अंतरराष्ट्रीय सेनाओं की मौजूदगी और तालिबान की ओर से हमलों की घोषणाएँ होने के कारण आने वाले दिनों में लड़ाई और बढ़ेगी.

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