सिंगूर की ज़मीन लौटाने का रास्ता साफ़

ममता बैनर्जी के विरोध की वजह से ही टाटा को सिंगूर में काम बंद करना पड़ा था

सिंगूर में टाटा मोटर्स को दी गई क़रीब 1000 एकड़ ज़मीन के क़रार को रद्द करने का विधेयक पश्चिम बंगाल विधानसभा में पारित हो गया है.

सरकार ने सिंगूर भूमि पुनर्वास और विकास विधेयक 2011 मंगलवार को ही सदन में पेश किया था जो बिना किसी विरोध के पारित हो गया.

विपक्षी वामपंथी पार्टियां विधेयक पर मतदान से पहले ही सदन से बहिर्गमन कर दिया था.

अब इस विधेयक के सदन में पारित होने के बाद सिंगूर के उन किसानों को ज़मीन वापस देने की प्रक्रिया शुरू होगी जिन्होंने अपनी ज़मीन के बदले कोई मुआवज़ा नहीं लिया था.

किसानों को ज़मीन लौटाने के लिए राज्य सरकार ने पहले अध्यादेश के ज़रिए टाटा से ज़मीन वापस लेने की घोषणा की थी लेकिन अध्यादेश के संवैधानिक आधार पर निरस्त होने के बाद सरकार ने 24 जून से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र को पहले बुलाने का फ़ैसला लिया और ये विधेयक पेश किया.

टाटा मोटर्स ने अपनी आरंभिक प्रतिक्रिया में कहा है कि विधेयक में इस बात का तो ज़िक्र है कि सिंगूर में गतिविधियाँ बंद हैं लेकिन इस बात का ज़िक्र नहीं है कि संयंत्र की गतिविधियाँ क्यों बंद हुईं.

कंपनी ने कहा है कि विधेयक का अध्ययन करने के बाद अगले क़दम का फ़ैसला करने की बात कही है.

विधेयक

विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले हुई सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय मामलों के राज्य मंत्री मनोज चक्रवर्ती ने सिंगूर भूमि पुनर्वास और विकास विधेयक 2011 के प्रारूप की जानकारी दी.

विधेयक के मुताबिक़ टाटा मोटर्स और उससे जुड़े दूसरे विक्रेताओं को हुगली ज़िला कलक्टर को ज़मीन सौंप देनी होगी. ऐसा नहीं करने पर ज़िलाधिकारी को ये अधिकार होगा कि वो बलपूर्वक टाटा से ज़मीन खाली करवाकर उसे अपने अधिकार में ले ले.

चार सौ एकड़ का मुआवज़ा किसानों ने नहीं लिया है

जहां तक टाटा को दिए जाने वाले मुआवज़े का सवाल है तो इसे तय करने का अधिकार हुगली के ज़िला न्यायाधीश को होगा और तय राशि पर छह फ़ीसदी प्रतिवर्ष के हिसाब से ब्याज दिया जाएगा.

विधेयक में ये भी कहा गया है कि राज्य सरकार पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम को मुआवज़ा देगी जिसने राज्य सरकार के कहने पर ज़मीन के मालिकों को 137 करोड़ रुपए का भुगतान किया था.

नए मुआवज़े के मुताबिक़ विवादित 1000 एकड़ ज़मीन पर पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम का मालिकाना हक़ ख़त्म हो जाएगा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मुताबिक़ उनकी सरकार सिंगूर के उन किसानों की 400 एकड़ ज़मीन लौटाने के लिए प्रतिबद्ध है जिन्होंने अधिग्रहण के एवज़ में कोई मुआवज़ा नहीं लिया है. बाक़ी बची 600 एकड़ ज़मीन का उपयोग सामाजिक आर्थिक विकास, रोज़गार सृजन और दूसरे सार्वजनिक कार्यों के लिए किया जाएगा.

पूरा किया वादा

टाटा ने अधिग्रहित ज़मीन पर कब्ज़ा अभी तक नहीं छोड़ा है

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले जारी तृणमूल कांग्रेस के घोषणापत्र में ये एलान किया था कि सत्ता में आने पर सिंगूर के किसानों की ज़मीन वो वापस दिलाएंगी.

20 मई को राज्य का मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद अपनी पहली प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार की पहली प्राथमिकता ज़मीन देने के अनिच्छुक किसानों को उनकी ज़मीन वापस दिलाना है.

इसके लिए पिछले गुरुवार को राज्य सरकार ने एक अध्यादेश भी जारी किया लेकिन संवैधानिक आधार पर अध्यादेश निरस्त हो गया क्योंकि 24 जून से पश्चिम बंगाल विधानसभा का सत्र शुरू होने वाला था.

इसके बाद ही राज्य सरकार ने विधानसभा का सत्र तय समय से पहले बुलाया ताकि विधेयक सदन में पास कराकर इसे क़ानूनी रूप दिया जा सके.

सिंगूर और नंदीग्राम के किसानों के मुद्दे पर ही ममता बनर्जी ने 2009 के लोकसभा चुनाव में अप्रत्याशित जीत हासिल की थी और कुछ हफ़्ते पहले हुए विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन कर 32 साल से चली आ रही वामपंथी सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया.

सिंगूर में भूमि अधिग्रहण के मुद्दे के राजनीतिक मोड़ लेने के बाद टाटा ने नैनो का लगभग तैयार हो चुका प्लांट बंद कर दिया था और नैनो का कारखाना गुजरात में स्थापित कर लिया था.

अब सरकार का कहना है कि चूंकि सिंगूर के नैनो और उसके सहायक संयंत्रों में काम ठप पड़ा है इसलिए उस ज़मीन को भी सरकार वापस ले रही है ताकि उसका इस्तेमाल सामाजिक-आर्थिक विकास के कामों किया जा सके.

टाटा की प्रतिक्रिया

टाटा मोटर्स लिमिटेड की ओर से पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से उठाए गए इस क़दम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा गया है कि सरकार ने सिंगूर में कामकाज न होने की बात तो कही है लेकिन ये नहीं बताया है कि किन परिस्थितियों में कामकाज बंद किया गया.

कंपनी की ओर से जारी एक लिखित बयान में कहा गया है, "वर्ष 2008 में निर्माणाधीन संयंत्र के आसपास परिस्थितियाँ बहुत प्रतिकूल थीं. हिंसा की घटनाएँ घट रही थीं, कामकाज में रुकावटें डाली जा रही थीं और संपत्ति को नुक़सान पहुँचाने के अलावा कर्मचारियों को धमकियाँ दी जा रहीं थीं."

कंपनी ने कहा है कि उनकी ओर से काम करने के लिए अनुकूल परिस्थितियों निर्मित करने की अपील भी की गई थी. लेकिन सड़कों पर यातायात रोकने और लोगों पर हमलों की घटनाएँ बढ़ती गईं और तब टाटा मोटर्स ने फ़ैसला किया कि यहाँ काम करने योग्य परिस्थितियाँ नहीं है.

सिंगूर में संयंत्र के निर्माण में 1800 करोड़ रुपयों के खर्च का ब्यौरा देते हुए कंपनी ने कहा है कि उसने सामुदायिक विकास के कई कार्यक्रम भी शुरु किए थे जिसमें स्कूल, अस्पताल के अलावा स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण देना भी शामिल था.

टाटा मोटर्स का कहना है कि कंपनी राज्य सरकार के न्यौते पर पश्चिम बंगाल गई थी जिससे कि राज्य में औद्योगिक गतिविधियाँ फिर से शुरु हो सकें.

कंपनी ने कहा है कि वह विधेयक का पूरा अध्ययन करने के बाद ही आगे के क़दम के बारे में फ़ैसला लेगी.

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