‘अमीर’ देश के ग़रीब बच्चे

कई बच्चे अपने पोषण के लिए स्कूलों में मिलने वाले एक वक्त के भोजन पर निर्भर हैं.

ब्रिटेन भले ही विश्व के सबसे अमीर देशों में से एक हो लेकिन बच्चों की ग़रीबी के मामले में ब्रिटेन की हालत दूसरे औद्दोगिक देशों के मुक़ाबले सबसे खराब है.

ब्रिटेन जैसे विकसित देश में भी 35 लाख से ज़्यादा बच्चे ग़रीबी के शिकार हैं.

औद्योगिक देशों में बच्चों की स्थिति पर नज़र डालें तो ब्रिटेन के ये आंकड़े सबसे खराब हैं. ब्रिटेन की पिछली सरकारें लगातार इस स्थिति से निपटने में नाकाम रही हैं.

16 वर्षीय केलेग़ लाइचेस्टर में अपने पिता के साथ रहती हैं. उनके लिए हर आने वाला दिन नई मुश्किलें लिए आता है. अक्सर उन्हें भूखे पेट सोना पड़ता है.

केलेग़ के भाई सैम को अक्सर स्कूल में शर्मिंदा होना पड़ता है क्योंकि वो अपनी बहन की पुरानी कमीज़ पहनकर स्कूल जाते हैं.

बदहाल बचपन

लगभग 16 लाख बच्चों के हालात तो इतने ख़राब हैं कि उनके भोजन का कोई ठिकाना नहीं और भीषण सर्दी में भी ये बच्चे नमी भरे सर्द घरों में रहने को मजबूर हैं.

बीबीसी संवाददाता नेओमी ग्रिमले कहती हैं कि केलेग़ के लिए ग़रीबी अब ज़िंदगी की एक कड़वी सच्चाई बन चुकी है.

ब्रिटेन में कई बच्चे ऐसे भी हैं जो अंधेरी गलियों में रहते हैं और उनके पास न खेलने की जगह न रहने के साफ़-सुथरे ठिकाने.

ये बच्चे अपने पोषण के लिए स्कूलों में मिलने वाले एक वक्त के भोजन पर निर्भर हैं.

इनमें से लगभग 16 लाख बच्चों के हालात तो इतने ख़राब हैं कि उनके भोजन का कोई ठिकाना नहीं और भीषण सर्दी में भी ये बच्चे नमी भरे सर्द घरों में रहने को मजबूर हैं.

ब्रिटेन सरकार ने अपनी नीतियों के तहत 2020 तक बच्चों की स्थिति सुधारने और और उनके बेरोज़गार माता-पिता तक आर्थिक मदद पहुंचाने का वादा किया है.

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