नया कारोबार यानी कार में बार

गाड़ी में शराब पी रहे युवक

दिल्ली में कार-ओ-बार या एक शब्द में कहूं तो ‘कारोबार’ का चलन हालांकि नया नहीं है, लेकिन अब गाड़ी में शराब पीने का चलन युवाओं में बेहद लोकप्रिय होता जा रहा है और पुलिस की सख़्ती के बावजूद लोग सार्वजनिक जगहों पर गाड़ियों में शराब पीने से नहीं कतराते.

दिल्ली में मयखाना बैठाने के लिए शाम ढलने का नहीं, बल्कि ऑफ़िस से छुट्टी होने का इंतज़ार किया जाता है. फिर चाहे वो रात के 11 बजे हो, या सुबह के चार बजे.

ख़ास तौर पर कॉल सेंटर में काम करने वालों की वक़्त बेवक़्त शिफ़्ट होने की वजह से उन्हें जब भी समय मिलता है, तो वो गाड़ी में ही अपनी महफ़िल जमा लेते हैं.

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दिल्ली की एक सुनसान सड़क के एक कोने में चल रहे कार-ओ-बारियों से जब मैंने ये जानना चाहा कि वे गाड़ी में ही शराब पीना क्यों पसंद करते हैं, तो उनमें से एक युवक ने कहा, “पहली बात तो ये कि गाड़ी में शराब पीने का मज़ा ही कुछ और है. दूसरी वजह ये कि पब में जाना बहुत महंगा पड़ता है. अगर पब में ही शराब पीने का विकल्प बच जाए, तो अपने वेतन के हिसाब से मैं साल में सिर्फ एक बार ही पब जा पाऊंगा. और वैसे भी गाड़ी में अपनी पसंद का संगीत चलाया जा सकता है, जो हम किसी पब में नहीं कर सकते.”

पियो और पीने दो

अगर पुलिस आएगी तो उन्हें भी थोड़ी पिला देंगें, या फिर 100-200 रुपए दे कर मामला रफ़ा दफ़ा कर देंगें. मेरा मानना है पियो और पीने दो.

गाड़ी में शराब पीने वाला एक युवक

राजधानी में शराब पीकर गाड़ी चलाना एक जुर्म है और इससे जुड़े कानून को तोड़ने वाले पर 2000 रुपए जुर्माना और छह महीने तक की जेल हो सकती है.

साथ ही दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस ने अब दोषी पाए जाने वालों को तुरंत जेल भेजने की कार्रवाई भी शुरु कर दी है.

लेकिन कार में शराब पी कर गाड़ी चलाने वालों पर इसका कोई असर नहीं.

गाड़ी में शराब पी रहे कुछ कुछ लोगों से जब मैंने पूछा कि उन्हें पुलिस से डर नहीं लगता, तो एक जनाब ने अपना शराब से भरे गिलास को हवा में लहराते हुए बड़े बिंदास अंदाज़ में कहा, “अगर पुलिस आएगी तो उन्हें भी थोड़ी पिला देंगें, या फिर 100-200 रुपए दे कर मामला रफ़ा दफ़ा कर देंगें. मेरा मानना है पियो और पीने दो.”

उनके साथ खड़े एक दूसरे युवक ने मेरे सवाल पर चुटकी लेते हुए कहा, “शराब पीने से डर नहीं लगता साहब, नशे में न होने की अवस्था से डर लगता है.”

गाड़ी में शराब

पुष्पेश पंत गाड़ी में शराब पीने के चलन के लिए सरकार की दोहरी नीति को ज़िम्मेदार ठहराते हैं.

ज़िम्मेदार कौन?

दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस के मुताबिक साल 2010 में 2,104 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हो गई.

दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस के संयुक्त आयुक्त सत्येंद्र गर्ग का कहना है कि इनमें से ज़्यादातर मौत शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों की लापरवाही की वजह से हुई.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि शाम ढलने के बाद शहर में जितनी भी दुर्घटनाएं होती हैं, उसका सबसे बड़ा कारण है लोगों का शराब पी कर गाड़ी चलाना.”

गाड़ी की बढ़ती पहुंच के कारण अब ये संभव हो गया है कि आप उसे ही अपना घर बना लें और उसमें जो मन कहे, वो करें. गाड़ियों में शराब पीने के चलन को रोकने के लिए ये ज़रुरी है कि गोवा राज्य की तरह दिल्ली में भी पब 24 घंटे खुले होने का प्रावधान होना चाहिए और शराब सस्ते दामों में उपलब्ध होनी चाहिए.

पुश्पेश पंत, लेखक और विश्लेषक

लेकिन लेखक और विश्लेषक पुष्पेश पंत इस मुद्दे को दूसरी ऐनक से देखते हैं.

उनका कहना है कि सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं का ताल्लुक़ गाड़ियों में शराब पीने से बिलकुल नहीं है.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, “शराब पी कर गाड़ी चलाने से जो सबसे बड़ी दुर्घटनाएं हुई हैं, वो अगर आप देखें तो बीएमडब्ल्यू, मर्सेडीज़ या होंडा सिटी जैसी बड़ी गाड़ियों से जुड़े हैं. इसका मतलब ये हुआ कि ऐसे लोगों को बार में या पब में बैठ कर शराब पीने की कोई असुविधा नहीं है. इसे केवल ग़ैर-ज़िम्मेदार आचरण कहा जा सकता है, जिसके लिए गाड़ी को दोष देना ठीक नहीं है.”

पुष्पेश पंत गाड़ी में शराब पीने के चलन के लिए गाड़ियों की उपलब्धता और सरकार की दोहरी नीति को ज़िम्मेदार ठहराते हैं.

उनका कहना है, “गाड़ी की बढ़ती पहुंच के कारण अब ये संभव हो गया है कि आप उसे ही अपना घर बना लें और उसमें जो मन कहे, वो करें. गाड़ियों में शराब पीने के चलन को रोकने के लिए ये ज़रुरी है कि गोवा राज्य की तरह दिल्ली में भी पब 24 घंटे खुले होने का प्रावधान होना चाहिए और शराब सस्ते दामों में उपलब्ध होनी चाहिए.”

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक़ दुनिया में हर एक लाख की जनसंख्या में से लगभग 16 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते है, और भारत की औसत वैश्विक औसत से ज़्यादा है, जहां एक लाख की जनसंख्या में से लगभग 17 लोग सड़क दुर्घटना में जान गंवा देते हैं.

इस आंकड़े को देखते हुए दिल्ली के सुनसान इलाकों में चलने वाले कार-ओ-बार पर शायद पाबंदी लगाने की ज़रुरत है.

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