लीबिया में गृह युद्ध की आशंका: मूसा खूसा

कर्नल गद्दाफ़ी

अफ्रीकी युनियन ने कहा था कि गद्दाफ़ी युद्धविराम के लिए तैयार हैं लेकिन उसके बाद विद्रोहियों ने ये प्रस्ताव ठुकरा दिया था.

लीबिया से भागने वाले सबसे ऊंचे ओहदे वाले नेता मूसा खूसा ने गृह युद्ध के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है और कहा है कि उनका देश “एक नया सोमालिया” बन सकता है.

ब्रिटेन आने के बाद पहली बार सार्वजनिक रुप से बोलते हुए उन्होंने बीबीसी को बताया कि किसी भी समझौते में लीबिया की एकता सर्वोपरि है.

उनका ये बयान अफ्रीकी युनियन के युद्ध विराम के प्रस्ताव को छापामारों के रद्द करने के बाद आया.

अफ्रीकी युनियन का कहना था कि कर्नल गद्दाफ़ी ये योजना मान गए है लेकिन सोमवार को उनकी फौज ने मिस्राता शहर पर हमला किया था.

आठ हफ्तों से लीबिया में जारी लड़ाई के दौरान गद्दाफ़ी समर्थक सेना ने पूर्वी लीबिया में छापामारों को उत्तरी समुद्री किनारे की ओर धकेल दिया है. पर नेटो की सेना ने उनकी बढ़त पर रोक लगाई है.

मैने सभी से कहा था कि लीबिया को गृह युद्द की स्थिति में मत धकेलों. इस से इतना रक्तपात होगा कि लीबिया नया सोमालिया बन जाएगा. इससे भी अहम बात ये है कि हम लीबिया का बटवारा नहीं चाहते. लीबिया की एकता किसी भी समझौते के लिए ज़रुरी है.

मूसा खूसा

खूसा गद्दाफ़ी के विदेश मंत्री थे पर 12 दिन पहले वो भाग कर लंदन आ गए थे.

बीबीसी के सुरक्षा मामलों के संवाददाता गॉर्डन कोरेरा को बताया गया था कि खूसा कोई साक्षात्कार नहीं देंगे बस एक लिखित बयान पढ़ देंगे.

मूसा खूसा ने कहा, “मैने सभी से कहा था कि लीबिया को गृह युद्द की स्थिति में मत धकेलो. इस से इतना रक्तपात होगा कि लीबिया नया सोमालिया बन जाएगा. इससे भी अहम बात ये है कि हम लीबिया का बटवारा नहीं चाहते. लीबिया की एकता किसी भी समझौते के लिए ज़रुरी है.”

लीबिया के सामाजिक मामलों के मंत्री ज़रुक अल शरीफ़ ने कहा कि वो खूसा के बयान पर ऐसे समय कोई टिप्पणी नहीं करेंगे जब वो एक दुश्मन राष्ट्र में “बंदी” है.

त्याग

मूसा खूसा लीबिया की गुप्तचर सेवा के पूर्व प्रमुख रह चुके है और उनपर 1988 के लॉकरबी बॉम्बिंग का आरोप है.

हाल की घटनाओं ने चीज़े ऐसी बदली कि मैं वहाँ और नहीं रह पाया. मुझे पता है की इस्तीफ़ा देने के लिए मैने जो किया है उससे मुझे समस्याएं उत्पन्न होंगी पर मैं अपने देश के लिए ये बलिदान देने को तैयार हूँ.

मूसा खूसा, लीबिया के पूर्व विदेश मंत्री

ट्यूनिसिया से ब्रिटेन आने के बाद से ही वो किसी गुप्त स्थान पर रह रहे हैं.

सोमवार को अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि वो पिछले तीस सालों से निष्टापूर्वक अपना काम करते आ रहे हैं और उन्हें विश्वास था कि कर्नल गद्दाफ़ी लोगों की सेवा कर रहे है.

ख़ूसा ने कहा, "हाल की घटनाओं ने चीज़े ऐसी बदली कि मैं वहाँ और नहीं रह पाया. मुझे पता है की इस्तीफ़ा देने के लिए मैने जो किया है उससे मुझे समस्याएं उत्पन्न होंगी पर मैं अपने देश के लिए ये बलिदान देने को तैयार हूँ.”

उनका कहना था कि लीबिया का समाधान लीबियावासी ख़ुद बहस और लोकतांत्रिक संवाद के ज़रिए करेंगे.

उनका कहना था कि ब्रिटेन और उसके सहयोगी देशों को बातचीत की प्रक्रिया में मदद करनी चाहिए ताकि लीबियावासी एक लोकतांत्रिक देश स्थापित कर सकें.

बीबीसी के मध्य पूर्व संपादक जैरेमी बोवेन का कहना है कि खूसा ने अरबी में अपनी बात इसलिए की ताकि वो लीबिया में सरकार और छापामारों दोनों तक अपना संदेश पहुँचा पाएं.

लड़ाई तेज़

बेनगाज़ी में प्रदर्शन

विद्रोहियों ने युद्धविराम की पेशकश ठुकरा दी है क्योंकि इसमें गद्दाफ़ी को हटाए जाने की बात शामिल नहीं है.

इससे पहले बेनगाज़ी शहर में स्थित लीबियाई छापामारो ने अफ्रीकी युनियन के युद्धविराम प्रस्ताव को इसलिए नकार दिया था क्योंकि इसमें गद्दाफ़ी के सत्ता से हटने की योजना शामिल नहीं थी.

अमरीका, ब्रिटेन और इटली ने लीबियाई नेता से लगातार सत्ता छोड़ने की मांग की है.

इस प्रस्ताव में तुरंत युद्धविराम, सरकार और छापामारों के बीच बातचीत, मानवाधिकार सहायता बिना रोकटोक के पहुँचाना और नेटो हवाई हमलों को रोकना शामिल था.

पर नेटो का कहना है कि वो लीबिया में जब भी नागरिकों को खतरे में पाएगा हवाई हमले करेगा.

नेटो का कहना है कि युद्धविराम विश्वसनीय होना चाहिए और उसकी पुष्टि होनी चाहिए.

पश्चिमी शहर मिसराता के एक नागरिक का कहना है कि सोमवार को भी गद्दाफ़ी सेना ने रॉकेट दाग़े. सरकारी गोलीबारी में कई लोगों के मारे जाने के समाचार है और एक छापामार प्रवक्ता का कहना है कि शहर में लड़ाई और सघन हो गई है.

लीबिया सरकार पत्रकारों को स्वतंत्र रुप से रिपोर्टिंग की अनुमति नहीं दे रही इसलिए इन ख़बरों की पुष्टि नहीं हो पा रही.

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