आधुनिक युग की पहली सुनामी आपदा

धरती की कमज़ोर परत को तोड़कर बाहर निकलता है लावा

हिंद महासागर में 26 दिसंबर 2004 को आए भूकंप से पैदा हुई सुनामी लहरों की विनाशलीला विश्व की सबसे बड़ी त्रासदियों में गिनी जाती है. अब जापान में भी बड़ी सुनामी आई है.

माना जाता है कि आधुनिक युग की पहली सुनामी आपदा हिंद महासागर में आई थी और इसका केंद्र इंडोनेशिया के पास था.

हालाँकि 1880 के दशक में तबाही मचाने वाली सुनामी लहरें भूकंप की वजह से नहीं बल्कि जावा और सुमात्रा के बीच स्थिक क्राकाटोआ ज्वालामुखी के फटने से पैदा हुई थीं.

एक जर्मन व्यक्ति अगस्त 1883 में आई इन सुनामी लहरों से बाल-बाल बच निकला और बाद में उसने अपने अनुभवों के बारे में लिखा था.

जिस समय सुनामी लहरें आईं वे 30 मीटर ऊँचे पहाड़ पर स्थित तीन मंज़िली इमारत में अपने दफ़्तर में बैठा था.

उसने लिखा है कि उस सोमवार की सुबह 40 मीटर उँची लहरें आईं और उसे अपने साथ बहाकर ले गईं.

जब वह लहरों के साथ बह रहा था उसे एक घड़ियाल पर सवार होना पड़ा. मगर ये भी कोई आसान काम नहीं था, उसे घड़ियाल की आँखों में अपने अंगूठा डालकर अपने आप को बचाना पड़ा.

आख़िरकार, सुनामी लहर जब थमी तो वो वहाँ से भाग निकला.

आधुनिक युग की पहली आपदा

क्राकाटोआ ज्वालामुखी के फटने और उसके बाद आई सुनामी लहरों को औपचारिक रूप से आधुनिक युग की पहली प्राकृतिक आपदा माना जाता है.

26 दिसंबर 2994 में सूमात्रा के पास आए भूकंप के जो कारण थे क्राकाटोआ ज्वालामुखी के फटने के पीछे भी वही कारण थे और उनका प्रभाव भी उतना ही गहरा हुआ है.

माना जाता है कि जब क्राकाटोआ ज्वालामुखी फटा तो धमाका इतना ज़ोरदार था क़रीब 4,776 किलोमीटर दूर रोड्रीग्स द्वीपों में पुलिस प्रमुख का कहना था कि उन्हें आवाज़ साफ़ सुनाई दी थी.

फिर जब ज्वालामुखी फटा तो छह हज़ार सो भी ज़्यादा किलोमीटर दूर लाशें तैरती नज़र आई थीं.

माना जाता है कि इसके बाद आई सुनामी लहरों से प्रभावित जावा और सुमात्रा द्वीपों में 40 हज़ार लोग मारे गए थे.

क्राकाटोआ ज्वालामुखी के फटने के समय विश्व में विज्ञान इतना विकसित नहीं था कि वो भूकंप और ज्वालामुखी को समझ पाए.

उस वक़्त लोगों ने ईश्वर से अपने सवालों का जवाब मांगा था. यहाँ तक की जावा द्वीप में कुछ इस्लामिक नेताओं ने कहा था कि ये अल्लाह के क्रोध का संकेत है.

क्राकाटोआ त्रासदी ने इंडोनेशिया समेत कई देशों में भयंकर तबाही मचाई थी मगर अब अगर उन्हीं देशों उन्हीं द्वीपों को देखें तो मनुष्य ने फिर वहीं गांव बसाए हैं, वहाँ पुनर्निमाण किया है.

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