क़ुरान जलाने की धमकी देने वाले पादरी पर रोक

टैरी जोन्स

ब्रिटेन के अनुसार टैरी जोन्स का ब्रिटेन में आना सार्वजनिक हित में नहीं

विवादों में घिरे अमरीकी पादरी टैरी जोन्स के ब्रिटेन में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

मिल्टन कीन्स में एक दक्षिणपंथी संस्थान 'इंगलैड इस आवर्स' (इंगलैंड हमारा है) ने उन्हें भाषण देने के लिए आमंत्रित किया था.

ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने कहा है कि उनका ब्रिटेन में होना सार्वजनिक हित में नहीं है.

गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, "पैस्टर जोन्स के कई बयान उनके अस्वीकार्य व्यवहार के साक्षी हैं".

प्रवक्ता ने कहा, "यूके आना किसी का अधिकार नहीं है और उन लोगों को आने से रोका जा सकता है जिनकी उपस्थिति आम जनता के हित में न हो".

टेरी जोन्स का कहना है कि वह इंगलैंड के अपने प्रवास के दौरान किसी क़ानून के उल्लंघन का इरादा नहीं रखते थे.

यूके आना किसी का अधिकार नहीं है और उन लोगों को आने से रोका जा सकता है जिनकी उपस्थिति आम जनता के हित में न हो.

ब्रितानी गृह मंत्रालय के प्रवक्ता

उन्होंने कहा, "मैं मुसलमानों के ख़िलाफ़ नहीं हूँ न ही उनके मज़हब का विरोधी हूँ. यहाँ पश्चिम में हमको धर्म और बोलने की आज़ादी है जो कि उनके देशों में नहीं है. मैं कट्टरपंथी तत्वों के ख़िलाफ़ हूँ और अगर मैं इंगलैंड आता तो मैं अपेक्षा करता कि मुसलमान भी हमारा साथ देंगे".

उनका कहना है कि यह प्रतिबंध मानवीय आधार पर भी अनुचित है क्योंकि उनकी बेटी इंगलैंड में रहती हैं और उनके नाती ब्रितानी हैं.

टेरी जोन्स को आमंत्रित करने वाली संस्था 'इंगलैंड इज़ आवर्स' के सचिव बैरी टेलर का कहना है कि वह सरकार के फ़ैसले से बहुत निराश हैं.

उनका कहना था कि वह इस समारोह में लगभग सौ लोगों के हिस्सा लेने की अपेक्षा कर रहे थे.

क़ुरान जलाने की धमकी

टैरी जोन्स ने पिछले साल ग्यारह सितंबर को वर्ल्ड ट्रेड टावर पर हुए हमले की बरसी के मौके पर क़ुरान की प्रतियाँ जलाने की घोषणा करके सनसनी फैला दी थी.

वे लगातार, पश्चिमी समाज में इस्लाम की भूमिका के खिलाफ़ बोलते रहे हैं.

यह प्रतिबंध मानवीय आधार पर भी अनुचित है क्योंकि मेरी बेटी इंगलैंड में रहती हैं और मेरे नाती ब्रितानी हैं.

टेरी जोन्स

ब्रिटेन की गृह मंत्री टेरेसा मे का कहना है कि जोन्स के इस बयान के कारण उन्होंने अपना ध्यान उनपर केंद्रित किया.

उन्होंने ब्रिटेन में आने पर रोक के आदेश की पुष्टि की है.

गृह मंत्रालय के एक वक्तव्य में कहा गया है कि सार्वजनिक हुई जोन्स की टिप्पणियाँ इस बात का सबूत हैं कि उनके व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

अधिकारियों का कहना है कि ये निर्णय न तो हल्के में लिया गया है और न ही ये खुली बहस को रोकने के लिए ही लिया गया है.

पैस्टर जोन्स के भाषणों का आयोजन कर रही संस्था 'स्टैंड अप अमेरीका' का कहना है कि ये प्रतिबंध बोलने की आज़ादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मूल मानवाधिकारों के हनन का उदाहरण है.

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