1.76 लाख करोड़ का घाटा नहीं हुआ: सिब्बल

कपिल सिब्बल

कपिल सिब्बल ने 2जी स्पेक्ट्रम पर सीएजी की रिपोर्ट का ख़ारिज किया

दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने नियंत्रक एंव महालेखा परिक्षक (सीएजी) के इस आरोप को ग़लत बताया है कि 2जी स्पेक्ट्रम मामले में कथित तौर पर 1.76 लाख करोड़ की धांधली हुई है.

उनका ये भी आरोप था कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए शासन काल में पहले आओ पहले पाओ की लाइसैंस नीति लागू की गई थी.

मंत्री ने कहा है कि सीएजी जिस आधार पर ये आँकड़े लेकर आया है उसकी कोई बुनियाद नहीं है और उसमें कई ग़लतियाँ हुई है जिसने सनसनी फैलाई.

दूरसंचार मंत्री ने कहा कि सरकारी खज़ाने को नुक़सान सत्रह हज़ार सात सौ 75 करोड़ ही का था.

स्पेक्ट्रम मामला

कपिल सिब्बल ने ये भी कहा कि कांग्रेस पार्टी संस्थाओं की इज़्जत करती है और उन पर कभी हमला नहीं करती. पर सीएजी की रिपोर्ट को उन्होंने पूरी तरह से सही नहीं बताया.

हम सीएजी की प्रक्रिया और तरीक़े से बहुत दुखी हुए है. इतने बड़े नुक़सान के अनुमान का कोई आधार नहीं है. हाँ मैं सीएजी से इस बात पर सहमत हूँ कि 2जी आवंटन की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है, इसलिए इस पर सरकार ने समिति गठित की है. अगर किसी के ख़िलाफ़ कोई सबूत पाए जाते हैं तो उसको सज़ा दी जाएगी

कपिल सिब्बल

मंत्री का कहना था, “हम सीएजी की प्रक्रिया और तरीक़े से बहुत दुखी हुए है. इतने बड़े नुक़सान के अनुमान का कोई आधार नहीं है. हाँ मैं सीएजी से इस बात पर सहमत हूँ कि 2जी आवंटन की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है, इसलिए इस पर सरकार ने समिति गठित की है. अगर किसी के ख़िलाफ़ कोई सबूत पाए जाते हैं तो उसको सज़ा दी जाएगी.”

सीएजी ने अपनी 77 पन्नों की रिपोर्ट पिछले साल संसद में पेश की थी और इसमें कहा था कि 2जी आवंटन में नियमों का पालन नहीं किया गया था और यहा तक कि टेलीकॉम नियामक एजेंसी, ट्राई की सिफ़ारिशों को पूरा नहीं किया था.

2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में कथित घोटाले पर राजनीति गरमाई हुई है. संसद का शीतकालीन सत्र मामले की जेपीसी जांच की मांग को लेकर बिल्कुल नहीं चल पाया था.

स्वामी की याचिका

सीबीआई की विशेष अदालत ने जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है जिसमें उन्होंने ए राजा के खिलाफ 1.76 लाख करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान के लिए मुक़दमा चलाने का अनुरोध किया था.

अदालत ने माना कि सीएजी की रिपोर्ट के आधार पर मामला दायर हो सकता है.

अदालत के सामने स्वामी ने ये भी अनुरोध किया था कि उन्हें इस मामले में सरकारी वकील बनाया जाए, जिस पर अदालत ने कहा कि वो शिकायतकर्ता और सरकारी वकील दोनों किरदार नहीं निभा सकते.

अदालत ने सुब्रह्मण्यम स्वामी को आदेश दिए कि वो भारतीय दंड संहिता के तहत अपना बयान दर्ज करवाएँ.

अदालत ने सीबीआई को भी आदेश दिए कि वो इस मामले में स्वामी का सहयोग करें. इस मामले में अगली सुनवाई पाँच फरवरी को होगी.

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