अब मेलमिलाप की कोशिश में ओबामा

बराक ओबामा

ओबामा ने अभी कार्यकाल के दो साल ही पूरे किए हैं

दो दिन पहले मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी को मिली करारी हार के बाद अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दोनों पार्टियों के नेताओं को चुनाव के बाद की बातचीत के लिए 18 नवम्बर को व्हाइट हाऊस बुलाया है.

बराक ओबामा ने कहा कि 2012 में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों से पहले रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स- दोनों पार्टियों के बीच सहयोग की चर्चा करने के लिए ये बैठक बुलाई गई है.

इसके अलावा ओबामा ने दोनो पार्टियों के नए चुने गए गवर्नरों को भी अगले महीने व्हाइट हाउस बुलाया है.

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को हुए मध्यावधि चुनावों में बराक ओबामा की डेमोक्रेटिक पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है और नतीजा यह हुआ है कि निचले सदन यानी कांग्रेस में अब बहुमत रिपब्लिकन का है.

वहीं उच्च सदन यानी सीनेट में डेमोक्रैट्स का बहुमत तो है लेकिन उनकी ताक़त पहले से घट गई है.

इन परिणामों के बाद माना जा रहा है कि बराक ओबामा को प्रशासन संभालने में काफ़ी दिक़्कतों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि व्हाइट हाउस को हर प्रस्ताव के अनुमोदन के लिए प्रतिनिधि सभा यानी कांग्रेस में जाना होगा और वहाँ रिपब्लिकनों का बहुमत होने की वजह से उन्हें हर बार रिपब्लिकनों को सहमत करना होगा.

असल बातचीत

मैं चाहता हूँ कि इस मुलाक़ात में हम ठोस चर्चा कर पाएँ कि कैसे हम अमरीकी लोगों के एजेंडे को आगे बढ़ा सकते हैं

बराक ओबामा

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि इस मुलाक़ात का मक़सद सिर्फ़ फ़ोटो खिंचवाना नहीं बल्कि एक असल बातचीत करना है.

गुरुवार की सुबह मंत्रिमंडल की बैठक बाद बराक ओबामा ने कहा कि वो कांग्रेस में नए नेताओं के साथ बेहतर काम का माहौल चाहते हैं.

ओबामा ने ये भी कहा कि देश अगले दो साल तक दोनों पार्टियों के बीच मतभेद नहीं सहन कर सकता.

बराक ओबामा ने कहा, "मैं चाहता हूँ कि इस मुलाक़ात में हम ठोस चर्चा कर पाएँ कि कैसे हम अमरीकी लोगों के एजेंडे को आगे बढ़ा सकते हैं."

हालांकि लम्बे समय तक टकराव का रास्ता अपनाने के बाद ये अनुमान लगाना मुश्किल होगा कि दोनों पार्टियाँ एक अधिक सहयोगी दौर के लिए तैयार हैं.

रिपब्लिकनों का रुख़

बैठक बुलाने के बराक ओबामा के फ़ैसले के पहले ही रिपब्लिकन नेताओं ने अपना रुख़ स्पष्ट कर दिया है कि उनका मक़सद 2012 राष्ट्रपति चुनावों में अपना उम्मीदवार व्हाइट हाउस भेजने का है और इस जीत से उनकी जवाबदेही और बढ गई है.

दोनों पार्टियो के बीच सहयोग की परीक्षा भी जल्द ही होगी.

आर्थिक मंदी से उबरने के लिए पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने जो कटौतियाँ की थीं उसकी समय सीमा जल्द ही समाप्त होने जा रही है. इसके बाद संसद को इस पर विचार करना होगा.

इस दौरान यह तय हो जाएगा कि बराक ओबामा कटौती को लेकर जो प्रस्ताव रखते हैं उस पर रिपब्लिकन क्या रुख़ अपनाते हैं.

वहीं बराक ओबामा ने भी ये कहा है कि वो चाहते हैं कि कांग्रेस रूस के साथ हुई नई परमाणु हथियार संधि की पुष्टि करे.

ये दो मु्द्दे उन कई अहम मुद्दों में से हैं जिन पर राष्ट्रपति बराक ओबामा को विपक्षी से कड़ी चुनौती मिल सकती है.

मसलन रिपब्लिकन कह चुके हैं कि वे ओबामा की स्वास्थ्य नीति को भी चुनौती देंगे और उसे पलटने का प्रयास करेंगे.

बीबीसी संवाददाता पॉल एडम्स के अनुसार राष्ट्रपति ओबामा के लिए राहत की बात सिर्फ़ इतनी हो सकती है कि हार के तनाव के बाद वे एशिया के दौरे पर जा रहे हैं जिसमें वे भारत में कुछ अहम बातचीत करेंगे और विश्व नेताओं के दो सम्मेलनों में शिरकत करेंगे.

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