तालिबान से 'ग़ैर सरकारी' बातचीत

हामिद करज़ई

करज़ई ने हाल ही में एक 'हाई पीस काउंसिल' का गठन किया है.

अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने स्वीकार किया है कि लड़ाई रोकने के लिए तालिबान के साथ ‘ग़ैर सरकारी तौर पर संपर्क’ किए जाते रहे हैं.

अमरीकी टीवी चैनल सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में करज़ई ने कहा कि ये संपर्क काफ़ी समय से जारी हैं.

करज़ई का ये बयान उनके उस क़दम के तुरंत बाद आया जिसमें उन्होंने तालिबान से बात करने के लिए एक ‘हाई पीस काउंसिल’ का गठन किया है.

हाल के दिनों में चरमपंथियों के साथ बातचीत की ख़बरें आती रहीं हैं.

ग़ैर सरकारी स्तर पर कोशिशें

हम तालिबान से अपने देशवासियों की तरह बात करते रहे हैं. ये बातचीत अधिकारिक नहीं बल्कि अनाधिकारिक संपर्को के ज़रिए चल रही है.

हामिद करज़ई

करज़ई ने सीएनएन को बताया, “हम तालिबान से अपने देशवासियों की तरह बात करते रहे हैं. ये बातचीत अधिकारिक नहीं बल्कि अनाधिकारिक संपर्को के ज़रिए चल रही है.”

लेकिन करज़ई ने ये स्पष्ट कर दिया कि वो अल-क़ायदा जैसे गुटों से लड़ते रहेंगे. उन्होंने अल-क़ायदा पर ‘अफ़गानिस्तान के विरुद्ध’ काम करने का आरोप लगाया.

सीएनएन को दिए गए इंटरव्यू के अंश रविवार को जारी किए गए थे.

अफ़गानिस्तान में इससे पहले भी तालिबान के साथ बातचीत की कोशिशें होती रही हैं लेकिन ये तालिबान के उस नज़रिए के बाद विफल रही हैं जिसमें वे बातचीत से पहले विदेशी सेनाओं को देश से बाहर करने की मांग करते रहे हैं.

इस समय अफ़गानिस्तान में क़रीब डेढ़ लाख विदेशी सैनिक मौजूद हैं.

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.