व्यापक निंदा, पर ईसाई संगठन क़ुरान की प्रतियाँ जलाने पर अड़ा

अमरीका ने कहा इससे कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलेगा

एक अमरीकी ईसाई संगठन के ग्यारह सितंबर को क़ुरान की प्रतियाँ जलाने के फ़ैसले की अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय, नैटो, रोमन कैथोलिक चर्च, अफ़गा़निस्तान, इंडोनेशिया और ईरान ने निंदा की है.

लेकिन मात्र 50 सदस्यों वाले ईसाई संगठन डव वर्ल्ड आऊटरीच सेंटर अपने फ़ैसले पर अड़ा हुआ है. इसके पैस्टर टेरी जॉंस ने कहा है, "हमारे लिए इस्लाम धर्म के कट्टरपंथी तत्वों को स्पष्ट संदेश देना ज़रूरी है."

एक अन्य पैस्टर ने बीबीसी को बताया कि उसके सदस्यों की योजना क़ुरान की सैकड़ों प्रतियाँ जलाने की है. उनका कहना था कि यह उस आदेश के विरोध में किया जाएगा जिसके तहत खुले में बॉनफ़ायर जलाने पर पाबंदी लगाई गई है.

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अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना के शीर्ष कमांडर जनरल डेविड पेट्रियस पहले ही आगाह कर चुके हैं कि ऐसा करने से अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की जान को ख़तरा बढ़ सकता है और इससे पूरे विश्व में समस्याएँ खड़ी हो सकती हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यलाय के प्रवक्ता रॉबर्ट गिब्स ने कहा कि यदि कोई भी कार्रवाई (अमरीकी) सैनिकों के लिए ख़तरा बढ़ाती है तो वह चिंता का विषय है.

'एक पैस्टर ही अमरीकी प्रतिनिधि नहीं'

अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पीजे क्रॉली ने कहा, "ऐसी योजना भड़काऊ, अपमानजनक, असंवेदनशील और विभाजित करने वाली है. हमें इस बात का एहसास है कि अनेक लोगों ने इसकों ख़ारिज किया है. और अधिक संख्या में अमरीकियों को इसका विरोध करना चाहिए और कहना चाहिए कि ऐसा काम अमरीकी मूल्यों के अनुरूप नहीं है."

ऐसी योजना भड़काऊ, अपमानजनक, असंवेदनशील और विभाजित करने वाली है. हमें इस बात का एहसास है कि अनेक लोगों ने इसकों ख़ारिज किया है. और अधिक संख्या में अमरीकियों को इसका विरोध करना चाहिए और कहना चाहिए कि ऐसा काम अमरीकी मूल्यों के अनुरूप नहीं है. जैसा जनरल पेट्रियस ने कहा मीडिया के कारण इसकी प्रतिक्रिया उतनी ही शक्तिशाली हो सकती है जितनी अबू ग़रैब की तस्वीरों और घटनाक्रम की हुई थी

अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता

उनका कहना था, "इस कार्यक्रम का आयोजन करने वाले पैस्टर का कहना है कि वे कट्टरपंथ का मुक़ाबला करना चाहते हैं. दरअसल, यदि ऐसा होता है (हम आशा करते हैं ऐसा नहीं होगा) तो इससे कट्टरपंथ पढ़ेगा. जैसा जनरल पेट्रियस ने कहा मीडिया के कारण इसकी प्रतिक्रिया उतनी ही शक्तिशाली हो सकती है जितनी अबू ग़रैब की तस्वीरों और घटनाक्रम की हुई थी."

अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना था कि दुनिया भर में लोगों को भी ये समझना चाहिए कि एक पैस्टर या 50 समर्थक अमरीका का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं.

उनके अनुसार अमरीका 30 करोड़ लोगों का देश है और बड़ी बहुमत में अमरीकी इस सप्ताह स्पष्ट तौर पर कह रहे हैं कि ये योजना अनुचित है, घृणा करने योग्य है और ऐसा नहीं होना चाहिए.

मंगलवार को वॉशिंगटन में विभिन्न धर्मों के नेताओं की बैठक में इस फ़ैसले की निंदी हुई और इसे बाईबल और अमरीकी मूल्यों का उल्लंघन बताया गया. इस बैठक में रोमन कैथोलिक, यहूदी और मुसलमान नेता शामिल हुए.

जहाँ अफ़ग़ानिस्तान और इंडोनेशिया में विरोध प्रदर्शन हुए हैं वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि क़ुरान के साथ ऐसा होता है तो अनियंत्रित मुस्लिम प्रतिक्रिया शुरु हो सकती है.

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