स्टूडेंट वीज़ा पर ब्रिटेन चिंतित

पिछले वर्ष स्टूडेंट वीज़ा पर ब्रिटेन आने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है

ब्रिटेन में एक ताज़ा सरकारी जाँच से पता चला है कि यूरोपीय संघ से बाहर के देशों से आने वाले क़रीब बीस प्रतिशत छात्र ऐसे हैं जो अपनी वीज़ा की अवधि की समाप्त होने के पाँच साल बाद भी ब्रिटेन में ही बने हुए हैं.

इमिग्रेशन मामलों के मंत्री डेमियन ग्रीन का कहना है कि वीज़ा नियमों को चुस्त बनाए जाने की ज़रूरत है. पिछले वर्ष स्टूडेंट वीज़ा पर ब्रिटेन आने वाले लोगों की संख्या में लगभग पैंतीस प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

ब्रिटेन में इसी साल हुए आम चुनाव में इमिग्रेशन एक बड़ा मुद्दा था और तीनों पार्टियों ने अपने अपने तरीक़े से एक ही बात कही थी कि वे यूरोपीय संघ के बाहर से आने वाले लोगों की संख्या में कटौती करना चाहते हैं, लेकिन इसके बावजूद वर्ष 2009 में स्टूडेंट वीज़ा पर ब्रिटेन आने वाले लोगों की संख्या में एक तिहाई की वृद्धि हुई है.

अब ब्रितानी सरकार की चिंता को बढ़ाने वाली एक और जानकारी सरकारी अध्ययन के बाद सामने आई है कि 2004 में एक लाख 85 हज़ार लोग यूरोपीय संघ के बाहर के देशों से ब्रिटेन आए थे लेकिन उनमें से लगभग 45 हज़ार लोग अब भी देश में मौजूद हैं.

बाहर से आने वाले छात्रों की संख्या में कटौती करना या उनकी सीमा तय कर देना एक व्यावहारिक निर्णय नहीं होगा, हमें नियमों में बदलाव करने की ज़रूरत है ताकि सिर्फ़ वही लोग स्टूडेंट वीज़ा के ज़रिए आ सकें जो वास्तव में छात्र हैं और सचमुच सही ढंग से कोई कोर्स कर रहे हैं

डेमिनय ग्रीन

ब्रिटेन के इमिग्रेशन मिनिस्टर डेमियन ग्रीन का कहना है कि वे बाहर से आने वाले लोगों की कुल संख्या में कटौती तो करना चाहते हैं लेकिन सिर्फ़ स्टूडेंट वीज़ा पर आने वाले लोगों की संख्या सीमित करना समस्या का हल नहीं है.

वे कहते हैं, "बाहर से आने वाले छात्रों की संख्या में कटौती करना या उनकी सीमा तय कर देना एक व्यावहारिक निर्णय नहीं होगा, हमें नियमों में बदलाव करने की ज़रूरत है ताकि सिर्फ़ वही लोग स्टूडेंट वीज़ा के ज़रिए आ सकें जो वास्तव में छात्र हैं और सचमुच सही ढंग से कोई कोर्स कर रहे हैं".

गठबंधन सरकार अपने चुनावी वादे के मुताबिक़ व्यवस्था में बदलाव कर रही है, यूरोपीय संघ के बाहर के देशों से नौकरी करने के लिए ब्रिटेन वाले आने वाले लोगों की संख्या सीमित कर दी गई है.

विदेश से ब्रिटेन आने वाले छात्रों को सप्ताह में कुछ घंटे काम करने की अनुमति होती है, पिछले दिनों कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनसे पता चला है कि कई ब्रितानी संस्थानों की मिलीभगत से लोग छात्र के रूप में ब्रिटेन आकर पढ़ाई के बदले काम-धंधे में लग जाते हैं जो ग़ैर क़ानूनी है.

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