
ब्रिटेन में हलाल मीट के बोर्ड आपको आमतौर पर दुकानों के बाहर दिख जाएँगे. हलाल मीट वहाँ के खान-पान का हिस्सा बन चुका है. अब एक कंपनी ने हलाल मेक-अप लॉन्च किया है जिसमें जानवरों की चरबी और अल्कोहल का इस्तेमाल नहीं होगा.
हालांकि मुस्लिम नेताओं ने आगाह किया है कि कुछ व्यापारी हलाल शब्द का इस्तेमाल केवल उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए कर रहे हैं.
बर्मिंघम की रहने वाली समीना अख़्तर ने समीना प्योर मेक-अप उत्पाद शुरु किए हैं. समीना कहती हैं कि उन्हें जब मालूम हुआ कि मेक-अप के लिए वे जो सामान इस्तेमाल करती हैं उनमें से कुछ में सुअर की गर्भनली और शराबयुक्त पदार्थ इस्तेमाल होते हैं तो वे हैरत में पड़ गईं.
जब मुझे मालूम हुआ कि मेक-अप के लिए मैं जो सामान इस्तेमाल करती हूँ उनमें से कुछ में सुअर की गर्भनली और शराबयुक्त पदार्थ इस्तेमाल होते हैं तो मैं हैरत में पड़ गईं. मेरी तरह कई मुस्लिम महिलाएँ अच्छा भी दिखना चाहती हैं और अपने धर्म का पालन भी ठीक से करना चाहती हैं. ऐसा करने में बहुत दिक्कत होती है.हलाल उत्पाद आने के बाद से मुस्लिम महिलाएँ शुक्रिया अदा कर रही हैं
समीना अख़्तर
वे बताती हैं, मेरी तरह कई मुस्लिम महिलाएँ अच्छा भी दिखना चाहती हैं और अपने धर्म का पालन भी ठीक से करना चाहती हैं. ऐसा करने में बहुत दिक्कत होती है.
ब्रिटेन में करीब 10 लाख मुस्लिम महिलाएँ रहती हैं और उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है.
समीना बताती हैं, करीब 500 महिलाएँ समीना प्योर उत्पाद ख़रीदती हैं. कई औरतें आकर शुक्रिया अदा करके जाती हैं कि अब वे बिना मेक-अप उतारे नमाज़ अदा कर सकती हैं.
समीना के उत्पादों में इंडोनेशिया और अमरीका से भी लोगों ने रुचि दिखाई है. समीना चाहती हैं कि मुस्लिम महिलाओं के पास ऐसे मामलों में विकल्प होना चाहिए.
वे कहती हैं, मैं ये नहीं कहती है कि फ़लाना उत्पाद हराम है और हम हलाल हैं. आप हमारा प्रोडक्ट इस्तेमाल करें और फिर तय करें.
ये हलाल उत्पाद ऑस्ट्रेलिया से आते हैं और हलाल सर्टिफ़िकेशन अथॉर्टी ऑस्ट्रेलिया की ओर से प्रमाणित हैं.
कौन सा मेक-अप सही?

इस बात को लेकर मुस्लिम विद्वानों में मतभेद हैं कि क्या मुस्लिम महिलाएँ किसी भी सुपरमार्केट से ख़रीदकर मेकअप का सामान इस्तेमाल कर सकती हैं या नहीं.
ब्रिटेन में इमाम शेख हैथम अल हदाद कहते हैं कि इसे लेकर दो तरह के विचार हैं. वे बताते हैं, कुछ लोग मानते हैं कि अगर उत्पादों में माँस, सुअर की चरबी , हराम सझने जाने वाले जानवरों के लेश या फिर शराब शामिल हैं तो ये मेकअप इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
इमाम शेख़ हैथम के मुताबिक नरमपंथी विचारधारा वाले लोग इन पदार्थों की मात्रा को पैमाना मानते हैं.
वे कहते हैं, अगर इन उत्पादों में जानवारों या शराब से जुड़े तत्व बहुत कम हैं तो कुछ विद्वानों के मुताबिक ये उत्पाद इस्तेमाल किए जा सकते हैं. साथ ही अगर रासायनिक प्रक्रिया के तहत प्रतिबंधित पदार्थ बाद में एक नए पदार्थ में तब्दील हो जाते हैं तो भी मेकअप उत्पाद उपयोग किए जा सकते हैं.
हालांकि मुस्लिम विद्धान इस बात पर सहमत हैं कि नमाज़ पढ़ने से पहले महिलाओं को किसी भी तरह का मेकअप हटाना होगा.
इमाम शेख़ हैथम ब्रिटेन में इस्लामिक शरिया काउंसिल के सदस्य भी हैं. वे मानते हैं कि मुस्लिमों को ऐसी चीज़ों से दूर रहना चाहिए जिन्हें लेकर संशय हो.
वे कहते हैं कि हलाल शब्द का इस्तेमाल कुछ लोग बिज़नेस बढ़ाने के लिए भी कर रहे हैं.














