'नए संविधान को लोगों की मंज़ूरी'

किर्गिस्तान में नए संविधान के लिए जनमतसंग्रह हुआ है

किर्गिस्तान की अंतरिम राष्ट्रपति ने कहा है कि ज़्यादातर लोगों ने जनमत संग्रह के तहत नए संविधान को मंज़ूरी दे दी है.

अंतिरम नेता रोज़ा औटुनबायेफ़ा का कहना है कि देश सच्चे लोकतंत्र की राह की ओर निकल पड़ा है.

देश की अंतरिम सरकार ने अप्रैल में राष्ट्रपति कुरमानबेक बकिएफ़ को अपदस्थ करने के बाद जनमत संग्रह कराने की घोषणा की थी.

प्रस्तावित संविधान के तहत संसद को ज़्यादा अधिकार दिए जाएँगे और और सितंबर में आम चुनाव का रास्ता साफ़ हो जाएगा.

ये जनमतसंग्रह जून में हुई जातीय हिंसा के बाद करवाया गया है. किर्गिज़ और उज़्बेक जातियों के बीच झड़पें हुई थीं जिसमें कई सौ लोग मारे गए थे हालांकि ग़ैर आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक हिंसा में करीब 2000 लोग मारे गए थे.

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक स्थित बीबीसी के संवाददाता का कहना है कि जनमत संग्रह कराने के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं.

अंतरिम राष्ट्रपति रोज़ा औतुनबायेफ़ का कहना है कि नया संविधान उनकी सरकार को वैधता प्रदान करेगा.

इस जनमत संग्रह का समर्थन संयुक्त राष्ट्र, अमरीका और रूस सभी ने किया है.

अगर संविधान संशोधन को जन समर्थन मिल गया तो किर्गिस्तान एक संसदीय गणतंत्र बन जाएगा जिसमें सत्ता प्रधानमंत्री के हाथों में होगी.

रोज़ा रोज़ा औटुनबायेफ़ा 2011 तक अंतरिम राष्ट्रपति बनी रहेंगी और फिर पद छोड़ देंगी.

संसदीय चुनाव हर पांच साल में होंगे और राष्ट्रपति का चुनाव छ साल के लिए हुआ करेगा. कोई भी राष्ट्रपति दोबारा नहीं चुना जा सकेगा.

लेकिन विपक्षी दलों और कुछ मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह जनमत संग्रह बहुत जल्दी कराया गया है क्योंकि देश में अब भी उज़्बेक और किर्गिज़ लोगों के बीच गहरे विभाजन हैं.

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