किर्गिस्तान में सहायता की ज़रुरत: रेड क्रॉस

अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस ने कहा है कि दक्षिणी किर्गिस्तान में मानवीय सहायता की सख्त आवश्यकता है.

रेड क्रॉस का कहना है कि उसके राहतकर्मी भीतरी इलाक़ों तक पहुँच पाने में सफल हुए हैं और उन्होंने पाया है कि हज़ारों की संख्या में विस्थापित लोगों को खाने-पीने, रहने की जगह और दवाइयों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है.

रेड क्रॉस का कहना है कि बलात्कार और मारपीट के प्रकरण भी सामने आए हैं.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी संस्था का कहना है कि किर्गिस्तान में हिंसा के बाद से पौने तीन लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं.

संस्था के अनुसार इनमें दो लाख लोग किर्गिस्तान के भीतर विस्थापित हुए हैं जबकि 75 हज़ार लोग सीमा पार कर उज़्बेकिस्तान भाग गए हैं.

ग़ौरतलब है कि किर्गीज़ और उज़्बेक लोगों के बीच भड़की हिंसा में सैकड़ों लोग मारे गए हैं और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हो गए हैं.

राहत सामग्री की कमी

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी संस्था उज़्बेकिस्तान में शरणार्थियों के बढ़ते संकट से निबटने के लिए हवाई जहाज़ से राहत सामग्रियाँ पहुँचा रही है.

साथ ही संस्था ने उम्मीद जताई है कि किर्गिस्तान में भी मदद लाई जा सकेगी.

किर्गिस्तान के भीतर राहतकर्मियों की संख्या बेहद कम है और वहाँ जो भी लोग हैं उनके अनुसार वहाँ की स्थिति बेहद चिंताजनक है.

अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस के अनुसार पिछले सप्ताह दक्षिणी किर्गिस्तान में कीर्गिज़ और जातीय उज़्बेक लोगों के बीच भड़की जातीय हिंसा में सैकड़ों लोग मारे गए हैं.

वहाँ से राहतकर्मियों ने ख़बर दी है कि पानी की गंभीर कमी हो गई है और लोग सिंचाई के लिए बनाए गए गड्ढों में जमा पानी पीने पर मजबूर हैं.

किर्गिस्तान

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