क्या चीन में अब सस्ती मज़दूरी खत्म?

फाक्सकॉन

फाक्सकॉन अक्तूबर तक अपने कर्मचारियों का वेतन दोगुना कर देगी.

दक्षिण चीन में आई-फोन और आई-पैड बनाने वाली कंपनी फाक्सकॉन के कारखाने मे हुई सिलसिलेवार आत्महत्याओं के मामलों ने एक बार फिर वहां के मज़दूरों के वेतन और हालात पर ध्यान केन्द्रित कर दिया है.

अब ताईवानी कंपनी का कहना है कि वो अक्तूबर तक अपने कर्मचारियों का वेतन दोगुना कर देगी.

ये घोषणा तब की गई है जब होंडा के लिए कलपुर्जे उपलब्ध करवाने वाली कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के वेतन में 10 प्रतिशत से ज्यादा बढोतरी की है.

कुछ लोगो का कहना है कि ये खबरे दिखाती है कि चीन में कर्मचारी अब कम वेतनमान पर काम करने को तैयार नहीं है और सस्ती मज़दूरी का वक्त जा चुका है. पर क्या ये सब सच है?

हमारी बेईज्जती करते है

चीन में बने कपडे, घर और ऑफिस मे इस्तेमाल होने वाली वस्तुएँ इस्तेमाल करते वक्त ज़्यादातर लोग ये ध्यान नहीं देते कि इन्हें बनाने वाले कर्मचारियों पर क्या बीतती है.

दक्षिणी चीन के शहर शैनजैंग मे जब सूरज अस्त होता है तो फैक्टिरियों सें नौजवान कर्मचारियों की एक फौज निकलती है.

यहाँ सब सस्ता है फिर भी कुछ प्रवासी कर्मचारी यहाँ सिर्फ ज़रूरी सामान ही खरीद पाते है.

वो हमें हर समय व्यस्त रखना चाहते है, अगर हम धीरे से काम करते है, या फिर हम कुछ देर के लिए रुकते है तो वो हमारी बेईज्ज़ती करते है."

फाक्सकॉन कर्मचारी

पर फाक्सकॉन के कारखाने मे हुई आत्महत्याओं ने ये सब बदल दिया है.

उपनगर इलाके के एक ख़स्ताहाल रेस्त्रां मे फाक्सकॉन की वर्दी पहने एक कर्मचारी कंपनी के बारे में बात करने के लिए राज़ी हुआ. उसे अपने साथियों के साथ सिर्फ 30 प्रतिशत वेतन बढोतरी मिली है और बाकी 70 प्रतिशत वेतन को भविष्य में बढाने का आशवासन मिला है.

ये कर्मचारी वेतन बढोतरी के बारे मे नहीं बल्कि कारखाने मे काम करने की हालात के बारे में बात करना चाहता है.

वह शिकायत करते हुए कहता है, " वो हमें हर समय व्यस्त रखना चाहते है, अगर हम धीरे से काम करते है, या फिर हम कुछ देर के लिए रुकते है तो वो हमारी बेइज़्जती करते है."

"काम थकाने वाला है और 10 मिनट से 1 घंटे तक की छुट्टी भी देर से मिलती है."

फाक्सकॉन ने ये वेतन बढा कर कोशिश की है कि कर्मचारियों पर दबाव कम किया जा सके, ताकि कर्मचारियों को ओवरटाईम की जरुरत ना पडे और वो अपनी घरेलु ज़रूरतें आसानी से पूरी कर सके.

कंपनी का ये कदम काफी मँहगा है. जानकार मानते है कि वेतन मे 30 प्रतिशत बढोतरी कंपनी के मुनाफे को 20 प्रतिशत घटा देगा.

पैसे नहीं मानवाधिकार चाहिए

वो इंसान है उन्हे सिर्फ ज्यादा पैसे नहीं चाहिए, उन्हे मानवाधिकार चाहिए.उन्हे उनका आत्म-सम्मान चाहिए, उनकी माँग है कि उनके साथ उचित व्यहवार किया जाए

शाओ किग शांग ,मज़दूर कार्यकर्ता

कर्मचारी कार्यकर्ता शाओ किग शांग फाक्सकॉन के फैसले का स्वागत करते है पर वो चेतावनी देते है कि जब तक कंपनी अपने कर्मचारियों का ध्यान नहीं रखेगी तब तक ऐसी बढोतरी सिर्फ सतही होगी.

शाओ किग शांग कहते है " वो इंसान है उन्हे सिर्फ ज्यादा पैसे नहीं चाहिए, उन्हे मानवाधिकार चाहिए. उन्हे उनका आत्म-सम्मान चाहिए, उनकी माँग है कि उनके साथ उचित व्यवहार किया जाए "

फॉक्सकॉन के कारखाने से कुछ किलोमीटर दूर ही अंडरगार्मेंट बनाने वाली जेलेसी इंटरनैशनल का कारखाना है.

अधिकारियों का कहना है कि फोशान क्षेत्र में जेलेसी इंटरनैशनल 40 अंडरगार्मेंट बनाने वाली कंपनियों में से एक है.

भले ही ये कंपनी फाक्सकॉन से अलग उत्पाद बनाने वाली कंपनी हो पर ये कंपनी ये काम पूरा करने के लिए घटते जा रहे कुशल नौजवान कारीगरों पर निर्भर है.

हालांकि कंपनी के मालिक डेविड ही इस बात को नकारते है कि फाक्सकॉन जैसी कंपनियो मे हुई वेतन बढोतरी से इस क्षेत्र मे मज़दूरी मंहगी होगी.

मालिक डेविड कहते है "फाक्सकॉन द्वारा 70 प्रतिशत वेतन बढोतरी दिखाता है कि कर्मचारियों को पहले कितना कम पैसा मिलता था"

बीबीसी को दिए गए एक वक्तव्य में फाक्सकॉन ने कहा है कि कंपनी कर्मचारियों के लिए विभिन्न सहयोग कार्यक्रम चला रही है ताकि कर्मचारियों की लगातार बदलती ज़रुरतों को पूरा किया जा सके.

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