दो भाई आमने-सामने

डेविड और एड मिलिबेंड

दोनों भाई पिछली लेबर सरकार में मंत्री थे

ब्रिटेन में गॉर्डन ब्राउन के लेबर पार्टी के नेता का पद छोड़ने के निर्णय के बाद पार्टी में नए नेता के लिए होड़ तेज़ हो गई है.

इस दौड़ में दो भाईयों के आमने-सामने आने के बाद लोगों की इसमें रुचि बढ़ गई है.

ब्रिटेन की पिछली सरकार में विदेश मंत्री रहे डेविड मिलिबैंड तो पहले से ही इस पद के मज़बूत दावेदार माने जा रहे थे लेकिन अब बीबीसी को पता चला है कि उनके छोटे भाई एड मिलिबैंड भी इस दौड़ में शामिल हो गए हैं.

एड मिलिबैंड लेबर सरकार में ऊर्जा मंत्री थे. उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र डॉनकैस्टर में कहा है कि वे लेबर पार्टी के नेता पद में प्रत्याशी बनने की घोषणा शनिवार को करेंगे.

छोटे भाई एड मिलिबैंड ने कहा है कि उन्होंने इस बारे में काफ़ी सोच-विचार के बाद फ़ैसला किया है.

लेबर पार्टी के नेता पद के लिए अब तक सिर्फ़ इन्हीं दो भाईयों ने प्रत्याशी बनने का फ़ैसला किया है.

पूर्व शिक्षा मंत्री एड बॉल्स और जॉन क्रड्डास ने भी लेबर का नेता बनने की इच्छा के संकेत दिए हैं हांलाकि इन दोनों ने ही अब इसकी घोषणा नहीं की है.

‘प्रगतिशील कार्यकर्ता’

बड़े भाई डेविड पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के नज़दीकी रहे हैं. वे लेबर पार्टी को ‘ब्रिटेन में सामाजिक और आर्थिक सुधारों का हिमायती’ बनाना चाहते हैं.

हम दोनों ने आपस में साफ़ और खुली बातचीत की है क्योंकि हम दोनों भाई एक-दूसरे बहुत प्यार करते हैं. दो भाईयों का प्यार बरक़रार रहेगा क्योंकि वो राजनीति से अधिक अहम हैं

डेविड मिलिबेंड, लेबर पार्टी के नेता पद के दावेदार

उन्होंने कहा है कि लेबर पार्टी को ये स्वीकार कर लेना चाहिए कि हाल ही में हुए चुनावों में पार्टी की ‘क़रारी हार’ हुई है.

गत सप्ताह जब डेविड मिलिबैंड से उनके भाई एड मिलिबैंड के लेबर पार्टी नेता पद के लिए खड़े होने की अटकलबाज़ियों के बारे में पूछा गया था, तब उन्होंने कहा था, “हम दोनों ने आपस में साफ़ और खुली बातचीत की है क्योंकि हम दोनों भाई एक-दूसरे बहुत प्यार करते हैं. दो भाईयों का प्यार बरक़रार रहेगा क्योंकि वो राजनीति से अधिक अहम हैं.”

एड मिलिबैंड के इस दौड़ में शामिल होने की इच्छा से पहले उनके समर्थकों ने एक वेबसाइट शुरु की थी जिसमें उनसे इस दौड़ में शामिल होने की अपील की गई थी.

ये वेबसाइट कहती है कि इसका निर्माण 'प्रगतिशील कार्यकर्ताओं ने किया है जो टोरी यानि कंज़रवेटिव सत्ता का जल्द से जल्द अंत चाहते हैं.’

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