
चीन ने कहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए ईरान पर प्रतिबंध लगाना सही तरीका नहीं है.
चीन की तरफ़ से यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमरीकी अधिकारी ये संकेत दे रहे हैं कि ईरान के ख़िलाफ़ कड़ा रवैया अपनाने के मुद्दे पर चीन के साथ सहमति हो गई है.
बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता च्यांग यू का कहना था कि चीन हमेशा से ये मानता रहा है कि ईरान के मुद्दे को सुलझाने के लिए वार्ताओं का रास्ता सबसे सही है न कि दबाव या प्रतिबंध.
इससे पहले वाशिंगटन में चल रहे परमाणु सुरक्षा सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ और अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा की मुलाक़ात हुई थी.

वाशिंगटन में हू जिंताओ और ओबामा की मुलाक़ात हुई है.
इस मुलाक़ात के बाद व्हाइट हाउस ने कहा था कि दोनों नेताओं ने अपने कूटनीतिज्ञों को ईरान के ख़िलाफ़ संभावित प्रतिबंधों की रुपरेखा तैयार करने को कहा है.
परमाणु सुरक्षा सम्मेलन
उधर वाशिंगटन में शुरु हुए परमाणु सुरक्षा सम्मेलन से पहले फ्रांस ने जहां साफ़ कर दिया है कि वो परमाणु हथियार त्यागने के पक्ष में नहीं है वहीं यूक्रेन ने कहा है कि वो 2012 तक अपना यूरेनियम भंडार ख़त्म कर देगा.
सम्मेलन शुरु होने से पहले ही अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने परमाणु हथियारों के ग़लत हाथों में पड़ने की चेतावनी दी थी और कहा था कि ऐसा होने पर भयावह परिणाम सामने आ सकते हैं.
ओबामा वर्ष 1945 के बाद इस तरह के बड़े सम्मेलन की अगुआई करने वाले पहले अमरीकी राष्ट्रपति हैं.
दुनिया भर के लगभग 50 देशों के नेता इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं.
इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी के प्रमुख यूकीया अमानो ने कहा कि परमाणु ताकत संपन्न देशों को इस संवेदनशील सामग्री की चोरी और तस्करी रोकने के लिए और प्रयास करने होंगे.
ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने कहा कि पाकिस्तान में इस तरह के ख़तरे ज़्यादा हैं.














