सुविधाओं ने दी लंबी उम्र

भारत और चीन में भी औसत जीवन आयु में अच्छी बढ़ोतरी हुई है

पोषण में सुधार, स्वच्छता पर ज़ोर, नियमित टीकाकरण और संक्रामक रोगों के बेहतर और असरदार इलाज के चलते दुनिया के अधिकांश देशों में आम व्यक्ति की औसत आयु बढ़कर 68 साल हो गई है.

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर तेज़ दौड़ लगा रहे भारत और चीन के लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है.

यानी 1950 की तुलना में भारत में औसत आयु बढ़कर 68 साल हो गई है, जबकि चीन में अब औसत आयु 72 वर्ष है.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून द्वारा जारी रिपोर्ट में ये तथ्य सामने आए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि 1950 के बाद से दुनियाभर में स्वच्छता और पोषण के स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.

भारत, चीन आगे

रिपोर्ट के मुताबिक 1950 के दशक में जहाँ अधिकतर मौतें संक्रामक रोगों और कुपोषण के चलते युवा अवस्था में होती थी, वहीं अब अधिकतर मौतें वृद्धावस्था में होती हैं. उम्र के इस पड़ाव पर लोगों को बहुत हद तक कैंसर, डायबिटीज़, दिल की बीमारी और सांस से जुड़ी तकलीफ़ों का सामना करना पड़ रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि 60 साल की उम्र के बाद हुई मौतों का अनुपात 1950 के दशक में जहाँ 26 फ़ीसदी था, वहीं अब ये बढ़कर 54 फ़ीसदी तक पहुँच गया है.

हालाँकि रिपोर्ट के मुताबिक अफ़्रीका में हालात अब भी बहुत अच्छे नहीं हैं. इस महाद्वीप में अधिकतर जानें अब भी संक्रामक रोगों के चलते होती हैं और इनमें भी एचआईवी संक्रमण से होने वाली मौतों का आंकड़ा सबसे अधिक है. यही वजह है कि अफ़्रीकी देशों में औसत जीवन आयु 55 साल से अधिक नहीं है.

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर दुनियाभर में मृत्युदर का आंकड़ा यूँ ही गिरता रहा तो ग़ैर संक्रामक रोगों का बोझ और बढ़ जाएगा.

कैंसर, डायबिटीज़ और हृदय रोग से जुड़ी बीमारियां लंबे समय तक चलती हैं और इन बीमारियों के इलाज पर भारत और चीन जैसे देशों में हर साल अरबों-खरबों डॉलर ख़र्च होते हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारों को तंबाकू के इस्तेमाल और मद्यपान को हतोत्साहित करना चाहिए और मोटापे के प्रति जागरूकता अभियान चलाना चाहिए.

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ग़रीब और विकासशील देशों में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के चलते बढ़ती आयु की इस रफ़्तार पर ब्रेक लग सकता है.

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