
इराक़ में अगले साल जनवरी में आम चुनाव होने है
इराक़ी संसद ने एक अहम चुनाव विधेयक को मंज़ूरी दे दी है, जिसके तहत पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक़ अगले साल जनवरी में आम चुनाव हो पाएगा.
हफ़्तों तक चली जद्दोजहद के बाद इस चुनाव सुधार विधेयक को बड़े अंतर से पास कर दिया गया है.
इराक़ में चुनाव
2003: अमरीका ने शासकीय परिषद की नियुक्ति की
2004: शासकीय परिषद ने अंतरिम सरकार का चयन किया
अगस्त 2004: नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने अंतरिम नेशनल असेंबली का चयन किया
जनवरी 2005: अस्थायी नेशनल असेंबली और प्रांतीय परिषदों के लिए पहले आम चुनाव हुए. सुन्नियों ने मतदान का बहिष्कार किया.
दिसंबर 2005: पहली पूर्णकालिक सरकार और संसद के लिए आम चुनाव हुए
जनवरी 2009: प्रांतीय परिषद के लिए चुनाव
जनवरी 2010: इसी महीने आम चुनाव होने वाले हैं
पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि इस विधेयक के पास होने में हो रही देरी के कारण राष्ट्रीय चुनाव की तिथि आगे बढ़ानी पड़ेगी.
ये भी चिंता थी कि चुनाव टालने की वजह से देश में स्थिरता की दिशा में हो रही प्रगति भी प्रभावित हो सकती है.
इस विधेयक पर मतदान 10 से ज़्यादा बार टाला गया था क्योंकि कई मुद्दों पर असहमति थी. इनमें मतपत्रों पर उम्मीदवारों के नाम सूचीबद्ध करने से लेकर किरकुक में सीटों के बँटवारे का मुद्दा था.
इस मुद्दे को समय रहते हल करने के लिए इराक़ी सांसदों पर संयुक्त राष्ट्र और अमरीका के साथ-साथ देश के धार्मिक नेताओं और राजनेताओं का काफ़ी दबाव था.
संयुक्त राष्ट्र ने तो यहाँ तक कह दिया था कि अगर ये विधेयक मंज़ूर नहीं होता तो वे चुनाव को मान्यता देने की गारंटी नहीं देंगे.
इराक़ से बीबीसी संवाददाता जिम म्यूर का कहना है कि क़ानून पास हो जाने के बाद अमरीका ने भी राहत की साँस ली होगी.
















