
पहले इस घटना में तीन लोगों के शामिल होने की बात कही गई थी
अमरीका में टेक्सस प्रांत के फ़ोर्ड हुड सैन्य अड्डे पर एक मेजर ने गोलीबारी करके अपने ही 12 साथियों को मार दिया है और 31 अन्य को घायल कर दिया है. मरने वालों में एक पुलिस कर्मी भी है.
सैन्य अड्डे के कमांडर लेफ़्टिनेट जनरल बॉब कोन ने कहा है कि इस हमले के लिए ज़िम्मेदार मेजर घायल है.
पहले बताया गया था कि वह मारा गया है.
पहले यह भी कहा गया था कि इस गोलीबारी में तीन संदिग्ध लोगों का हाथ था और दो लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है लेकिन अब कहा गया है कि हमले के लिए सिर्फ़ एक ही व्यक्ति ज़िम्मेदार था.
राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसे हिंसा की दिल दहला देने वाली घटना बताते हुए इस घटना की विस्तृत जाँच करवाने की घोषणा की है.
उन्होंने कहा कि देश के सैनिक किसी दूसरे देश में मारे जाते हैं तो वह त्रासदी होती है लेकिन जब वे अपनी ही ज़मीन पर सैन्य ठिकाने में गोलियों का शिकार होते हैं तो यह दिल दहला देने वाला होता है.
घटना

अधिकारियों का कहना है कि अभी यह पता नहीं चला है कि मेजर हसन ने गोलियाँ क्यों चलाईं
अधिकारियों के अनुसार इस मेजर निदाल मलिक हसन ने हमले के लिए दो बंदूकों का इस्तेमाल किया. इसमें से एक सेमी ऑटोमैटिक थी.
मेजर हसन अमरीका में ही जन्मे मुसलमान हैं. उनकी उम्र 40 वर्ष के आसपास है और वे सेना में मनोचिकित्सक हैं.
उन्हें इराक़ में तैनात किया गया था और उन्हें जल्द ही वहाँ जाना था.
मेजर हसन के चचेरे भाई नादिर हसन ने फ़ॉक्स न्यूज़ से कहा कि वे इराक़ नहीं जाना चाहते थे.
उनका कहना है, "उन्होंने इस मसले को सुलझाने के लिए सेना के एक वकील की सहायता ली, सेना छोड़कर जाने के लिए सरकार को पैसों का भुगतान किया. उन्होंने हर संभव कोशिश कर ली थी."
लेफ़्टिनेंट कोन का कहना है कि गोलीबारी दोपहर डेढ़ बजे सैन्य अड्डे के मेडिकल सेंटर में हुई जहाँ सैनिक बाहर तैनाती से पहले अंतिम जाँच के लिए आते हैं.
उन्होंने बताया कि मेजर हसन घायल हैं और उनकी हालत स्थिर बनी हुई है. उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया है.
उनका कहना है कि पहले दो और लोगों को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही थी लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इसमें सिर्फ़ मेजर हसन ही शामिल थे.
फ़ोर्ड हुड दुनिया के सबसे बड़े अमरीकी सैन्य ठिकानों में से एक है.
यहाँ कोई 40 हज़ार सैनिक रहते हैं.
बीबीसी के संवाददाता एडम ब्रुक्स का कहना है कि इस सैन्य अड्डे पर बड़ी संख्या में वो सैनिक रहते हैं जिनकी तैनाती इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में होनी है.
वहाँ कुछ ऐसे सैनिक भी रहते हैं जो इन देशों में तैनाती के बाद लौटे हैं.
यहाँ सैनिकों को मानसिक तनाव आदि का इलाज भी किया जाता है.












